अकसर गर्भवती महिलाओं को यह फिक्र सताती है कि पता नहीं वे गर्भावस्था के बाद फिर से अपना पुराना रूप पा सकेंगी या नहीं. अगर आप भी उन में शामिल हैं, तो चिंता न करें. अगर आप संतुलित और पोषक भोजन व सही ऐक्सरसाइज करेंगी और अपनी सोच सकारात्मक रखेंगी तो जब आप का बच्चा पहली सालगिरह मनाएगा, तब तक आप फिर से अपनी वही छरहरी काया और आकर्षक लुक पा चुकी होंगी. संतुलित और पोषक भोजन जरूरी: संतुलित और पोषक भोजन करें ताकि आप का शरीर बच्चे के विकास और खुद के शरीर में हो रहे बदलावों के लिए तैयार हो सके. कहा जाता है कि गर्भवती को अपनी खुराक दोगुनी कर देनी चाहिए. लेकिन वास्तविकता यह है कि शुरू के 6 महीनों में अतिरिक्त कैलोरी लेने की जरूरत नहीं होती क्योंकि इस दौरान बच्चे के अंग विकसित होते हैं. बच्चे का वजन 7वें, 8वें और 9वें महीने में बढ़ता है. इन 3 महीनों में गर्भवती को अपनी खुराक डेढ़ गुनी कर देनी चहिए. इस दौरान ताजा फल, सब्जियां, साबूत अनाज, सूखा मेवा, गुड़, दूध, दूध उत्पाद और अगर मांसाहारी हों तो मछली और अंडों का सेवन जरूर करें.
गर्भावस्था के दौरान ऐस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरौन हारमोंस का स्तर बढ़ने से कई महिलाओं को कब्ज की समस्या हो जाती है, जिस से बचने के लिए 3-4 लिटर पानी दिन में जरूर पीएं. पूरी नींद लें: गर्भवती को पूरी नींद की जरूरत होती है, इसलिए 8-10 घंटे की नींद जरूर लें. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: लेकिन गर्भावस्था के दौरान भी अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखें. घर का काम करें. अगर नौकरी करती हैं तो औफिस जाएं.
प्रसव के बाद: गर्भावस्था में शरीर कई बदलावों से गुजरता है. उसे फिर से पूरी तरह पहले वाले रूप में आने में समय लगता है. इसलिए पुराना आकार पाने में जल्दबाजी न करें.
बच्चे को स्तनपान जरूर कराएं: गर्भावस्था के दौरान जो वसा जमा हो जाती है उस का उपयोग दूध के निर्माण में होता है, जिस से शरीर पर वसा की परतें प्राकृतिक रूप से कम होने लगती हैं. बच्चे को दूध पिलाने में प्रतिदिन औसतन 600 से 800 कैलोरी इस्तेमाल होती है, जिस से डिलिवरी के बाद मां को वजन कम करने में आसानी होती है.
धीमी शुरुआत करें: अगर सामान्य डिलिवरी हुई हो तो 2 महीने तक कोई ऐक्सरसाइज न करें. अगर सीसैक्शन हुई हो तो इस अवधि को 3 महीनों तक बढ़ा दें. जब ऐक्सरसाइज शुरू करें तो शुरू में 10-15 मिनट से ज्यादा देर न करें. कठिन ऐक्सरसाइज करने से पैल्विक फ्लोर पर दबाव पड़ता है, जिस से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है.
डिप्रैशन से बचें: बच्चे के जन्म के बाद ऐस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरौन हारमोंस के स्तर में गिरावट आती है, जो पोस्टपार्टम डिप्रैशन का कारण बनता है. इस दौरान मूड स्विंग्स बहुत होता है. मगर यह अस्थायी अवस्था है, जो 1 से 4 सप्ताह में अपनेआप समाप्त हो जाती है. लेकिन लक्षण अधिक गंभीर हो जाएं और 4 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.
इन बातों का भी रखें ध्यान
दिन की शुरुआत 1 गिलास कुनकुने पानी में 1 चम्मच शहद डाल कर पीने के साथ करें.
दिन में 3 बार मेगा मील खाने के बजाय 6 बार मिनी मील खाएं.
वसा, नमक और चीनी का सेवन कम मात्रा में करें.
चाय और कौफी का सेवन कम करें.
सलाद नियमित रूप से खाएं.
जंक फूड, सोडा आदि से बचें.
साबूत अनाज, मौसमी फल, सब्जियां, सूखा मेवा और वसारहित दूध व दूध से बने उत्पादों को अपने भोजन में शामिल करें.
-डा. निशा जैन
एच.ओ.डी. गाइनेकोलौजिस्ट, सरोज सुपरस्पैश्यलिटी हौस्पिटल, नई दिल्ली.