आज की महिलाएं खाना बनाने से कतराती है, जबकि खाना बनाने के कई फायदे है. इस बात को कोरोना संक्रमण के दौरान कई फिल्म और टीवी सेलेब्रिटी ने स्वीकार किया है, क्योंकि उन्हें कभी खाना बनाना नहीं आता था, लेकिन अब उन्हें खाना बनाना पसंद है, क्योंकि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान विभिन्न प्रकार के डिशेज बनाकर परिवार के साथ एन्जॉय किया है.

खाना बनाने की शौक़ीन पुणे की मधुरा मंगेश बाचल आज डिजिटल दुनिया की पायोनियर है. उनके पति मंगेश जो सॉफ्टवेर इंजिनियर है, उन्होंने उसे महाराष्ट्रियन रेसिपी सोशल मीडिया पर डालने की सलाह दी. आज मधुरा के करोड़ों में सबस्क्राइबर है और वह भारत की पहली महाराष्ट्रियन फ़ूड रेसिपी ऑनलाइन देने वाली महिला उद्यमी है. उनकी ब्रांड मधुरा रेसिपी को उन्होंने पूरे विश्व में स्थापित किया है.

खाना बनाने की प्रेरणा के बारें में पूछे जाने पर मधुरा बताती है कि मेरी क्रिएटिविटी खाने को लेकर अमेरिका में रहने के दौरान शुरू हुआ. वहां मैं बैंक में काम करती थी, लेकिन प्रेग्नेट होने के बाद मैं मैटरनिटी लीव पर थी, मेरे पास बहुत समय था और कुकिंग की शौक होने की वजह से मैं हमेशा ऑनलाइन रेसिपी खोजती थी. रीजनल रेसिपी आसानी से मिल जाती थी, लेकिन ट्रेडिशनल मराठी डिश जैसे पूरणपोली, मिसळ पाव आदि की रेसिपी ब्लाक या वीडियो फॉर्म में नहीं मिलती थी. तब मैंने सोचा कि मुझे खाना बनाना पसंद है और डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्लोबली काम करती है. यही से मेरे अंदर प्रेरणा जगी और मैने मराठी रेसिपी को ग्लोबली पहुँचाने के लिए लिखना और वीडियो बनाना साल 2009 से शुरू कर दिया.

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शुरु-शुरु में मधुरा ने ब्लॉग का सहारा लिया, जिसमें वह मराठी रेसिपी के साथ उसकी पिक्चर भी लगाती रही, इससे उन्होंने देखा कि उनके ब्लॉग को लोग बहुत पसंद कर रहे है और लोग कुछ नयी रेसिपी के बारें में मधुरा से जानना भी चाहते थे. ये मधुरा के लिए उत्साहवर्धक था. वह कहती है कि रेसिपी ब्लॉग में लोगों की रूचि देखकर मैंने अपने डोमेन मधुरा रेसिपी में लिखने लगी और सोशल मीडिया का सहारा लिया, ताकि अधिक से अधिक लोग मराठी रेसिपी का प्रयोग कर सकें, ऐसे धीरे-धीरे मैं आगे बढती गयी. ट्रेडिशनल रेसिपी सबसे अधिक पोपुलर है, जिसमें भरवा बैगन, पूरनपोली, मिसळ पाव, बड़ा पाव आदि की रेसिपी को लोग पसंद करते है. रेसिपी केवल इंडिया में ही नहीं, दुबई, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई जगहों से रेस्पोंस मिलता है. डिजिटल एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसमें किसी प्रकार की बंदिश नहीं होती. गांव, छोटे कस्बे, शहर, विकसित देश जैसे हर जगह इन्टरनेट होने पर इसकी सहायता ली जा सकती है. पहले विदेशों में महाराष्ट्रियन रेसिपी की लोकप्रियता अधिक थी, लेकिन अब यहाँ भी इसकी संख्या में वृद्धि हुई है.

इसके आगे मधुरा कहती है कि शुरू में मैंने जब अंग्रेजी में ब्लॉग बनाया, तो विदेशी लोग इसे अधिक देखते थे, क्योंकि कई महाराष्ट्रियन लड़के या लडकियां जो विदेश में रहते है और इंटरकास्ट शादी की है, वे मराठी व्यंजन के बारें में सुना है, लेकिन उसके प्रोसेस को नहीं जानते. वहां मेरी रेसिपी काम आती है.

मधुरा के परिवार का सहयोग शुरू से उनके साथ रहा है. उसका कहना है कि परिवार के सहयोग के बिना महिलाओं को काम करना संभव नहीं और मेरे दो बच्चे है. मेरे पति बहुत सहयोग देते है, क्योंकि वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और किसी भी तकनीक से जुड़े अपग्रेड के बारें में जानकारी देते है. जब मैंने काम शुरू किया था, उस समय मेरी बेटी एक साल की थी. उसका नाम मनस्वी (14 वर्ष ) है. अभी बेटा मंथन भी 8 साल का हो चुका है. जब मेरी बेटी सोती थी, उस समय मैं वीडियो शूट पति के साथ मिलकर कर लेती थी. इसके अलावा मेरे पेरेंट्स का भी बहुत सहयोग रहा है. मैं प्रसाद के लिए शिरा बहुत अच्छा बनाती हूं. बच्चे भी खाना अच्छा बना लेते है.

इस काम में समस्या क्या होती है पूछे जाने पर मधुरा का कहना है कि शुरू में कुछ पता नहीं था कि इसे कैसे लोगों तक पहुंचाऊं, तब सोशल मीडिया का सहारा लिया. पहले खुद के नाम से पेज बनायीं फिर धीरे-धीरे उस पेज पर मैं रेसिपी डालने लगी. इससे मुझे मार्केटिंग के बारें में भी जानकारी मिलने लगी.

कोविड पीरियड में मधुरा को काम करना मुश्किल रहा, क्योंकि बच्चे और पति दोनों ही घर पर रहते है, इससे काम करने का समय कम होने लगा. लॉकडाउन की वजह से फ़ूड क्रिएटर का काम बहुत अधिक बढ़ गया था, क्योंकि लोग घर पर खाना बना रहे थे. ऐसे में उन्हें सुबह उठकर रेसिपी का शूट करना पड़ता था, जिसमें 3 सप्ताह शूट करना और एक सप्ताह खाली रखती थी. 6 महीने उन्होंने इसी तरह चलाया है. उस समय रेसिपी की सारे सामग्री का मिलना भी मुश्किल था.

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इसके अलावा मधुरा ने 365 ब्रेकफ़ास्ट रेसिपी के साथ एक किताब लिखी है, जिसमें हर मौसम में पाई जाने वाली फल और सब्जियों को लेकर ट्रेडिशनल रेसिपी दी गई है, क्योंकि आज वेस्टर्न रेसिपी को फोलो करते हुए लोग ट्रेडिशनल खाने को भूल चुके है. मधुरा ट्रेडिशनल महाराष्ट्रियन मसाला भी बनाती है. आगे दूसरे रीजन के रेसिपी भी मधुरा ऑनलाइन डालना चाहती है.

इसके आगे मधुरा कहती है कि घर पर बना खाना हेल्दी, हायजिन और सेटिसफेक्शन इन 3 चीजों पर आधारित होती है. स्मार्ट कुकिंग के लिए हमेशा पहले से प्लानिंग कर उसकी तैयारी कर लेनी चाहिए.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मधुरा कहती है कि महिलाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना और इमोशनली मजबूत होना बहुत जरुरी है. परिवार के लिए कैरियर का त्याग कभी न करें. कामकाजी महिलाओं के बच्चे भी जल्दी-जल्दी आत्मनिर्भर हो जाते है. आज के परिवेश में बच्चे होने के बाद भी कैरियर को बनाये रखें. आत्मनिर्भर होने से ही महिला इमोशनली भी मजबूत होती है.

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