आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने ऊपर कम ध्यान दे पाते हैं. ऐसे में सही मसाज उन के लिए बहुत उपयोगी होती है, क्योंकि मसाज केवल ब्लड सर्कुलेशन ही नहीं बढ़ाती, वह तो आप की थकान, तनाव सब दूर कर देती है. आजकल ‘मी टाइम’ बहुत आवश्यक हो चला है और लोग इस के प्रति जागरूक हो गए हैं, इसलिए आप को अपने रिहायशी क्षेत्र के आसपास मसाज पार्लर आसानी से मिल जाते हैं. इस के बारे में मुंबई की त्वारिका ब्यूटीपार्लर ऐंड मसाज सैंटर की ऐक्सपर्ट गीता उमप बताती हैं कि वैसे औयल मसाज तो सालों से चली आ रही है, लेकिन अब लोग हैड मसाज और बौडी मसाज दोनों कराना पसंद करते हैं क्योंकि इस से रक्त प्रवाह तो बढ़ता ही है, साथ ही सिरदर्द, तनाव और थकान से राहत भी मिलती है.

मसाज दरअसल एक प्रकार की पौलिश है, जो तेल के द्वारा की जाती है. मसाज से शरीर में स्फूर्ति आती है और त्वचा में कसाव आता है.

मसाज कई तरह से की जाती है, खास तरीके निम्न हैं:

मसाज का सब से पुराना तरीका चंपी मसाज है. जो सिरदर्द से आराम और स्कैल्प को पोषण देने के लिए की जाती है. इस से बालों में चमक भी आती है. इस में सिर की मालिश के लिए आमंड औयल, औलिव औयल, कोकोनट औयल आदि का प्रयोग किया जाता है.

औयल को थोड़ा गरम कर के बालों को विभाजित कर रुई के फाहे से स्कैल्प पर लगाया जाता है. फिर उंगली के पोरों से घुमावदार मालिश बहुत धीरेधीरे की जाती है ताकि बाल उलझें और गिरें नहीं.

आयुर्वेदिक मसाज का आजकल काफी प्रचलन है. इस के लिए चावल और जड़ीबूटियों को मिला कर तेल के साथ भिगो कर भाप के द्वारा पकाया जाता है. बाद में इसे मलमल के कपड़े में डाल कर शरीर पर रगड़ा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस से ई प्रकार के दर्द से राहत मिलती है.

अरोमैटिक मसाज अधिकतर तनावग्रस्त होने पर की जाती है. इस में सुगंधित तेल का प्रयोग होता है, जिस से दिमाग बिलकुल शांत हो जाता है, चिंताएं दूर हो जाती हैं.

कलारी मसाज खासतौर से केरल में हर्बल तेलों से की जाती है. शरीर को लचीला बनाने वाली कलारी मसाज केरल में कुश्ती के अभ्यास से जुड़ी प्राचीन कला है.

थाई मसाज थाई प्रणाली पर आधारित मसाज है. इस में शरीर की ऊर्जा को एक केंद्र में लाना पड़ता है. इस मालिश से व्यक्ति तनाव से राहत पाता है.

गीता बताती हैं कि हैड मसाज 8 दिन में एक बार करना आवश्यक है. जबकि बौडी मसाज महीने में एक बार करवा लेनी चाहिए ताकि आप पूरी तरह स्फूर्ति महसूस करें. मसाज के समय शरीर के आवश्यक केंद्र बिंदु पर प्रैशर देना जरूरी है, इसलिए हमेशा ऐक्सपर्ट से मसाज करवाना सही होता है.

कब कराएं हैड और बौडी मसाज

किस उम्र से मसाज करवानी चाहिए? इस के बारे में पूछने पर नैचुरल हेयर ऐंड ब्यूटी सैलून की नैशनल स्किन ट्रेनर करपागम बताती हैं कि हैड मसाज किसी भी उम्र में कराई जा सकती है, लेकिन बौडी मसाज 25 वर्ष की उम्र के बाद कराई जानी चाहिए. मसाज केवल सुंदरता के लिए उपयोगी ही नहीं, यह कई रोगों से भी मुक्ति दिलाती है. दक्षिण भारत के केरल में आयुर्वेदिक मसाज को दवा के साथ करवाया जाए, तो कई बीमारियां दूर हो सकती हैं. मोटापा, त्वचा संबंधी रोगों और अंगघात आदि रोगों के लिए यह मसाज काफी लाभप्रद होती है. इस थेरैपी को पिझिचिल, शिरोधारा आदि नाम से जाना जाता है. इस के आगे करपागम बताती हैं कि मसाज में औयल काफी महत्त्वपूर्ण है, जिस में अरोमा औयल, हर्बल, आमंड और औलिव औयल त्वचा का लचीलेपन और मजबूती को बढ़ाते हैं. रैग्युलर मसाज और आयुर्वेदिक थेरैपी अलगअलग हैं. रैग्युलर मसाज बौडी को रिलैक्स करती है जबकि आयुर्वेदिक थेरैपी में लगातार चिकित्सा से बीमारी ठीक की जाती है. पर दोनों के लिए ऐक्सपर्ट के पास जाना सही होता है.

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