फिल्म समीक्षाः
रेटिंग : ढाई स्टार
निर्माताः भूषण कुमार , दिनेश विजन
निर्देशकः कुणाल देशमुख
कलाकारः सनी कौशल, राधिका मदान, मोहित रैना, डायना पेंटी, च्रिस विल्सन, अल्फ्रेडो तवारेस, दिलजॉन सिंह, अतुल शर्मा, रिचा प्रकाश व अन्य
अवधि : दो घंटे 26 मिनट
ओटीटी प्लेटफार्म : डिज्नी प्लस हॉट स्टार
इंटरनेट व मोबाइल के युग में जी रही नई पीढ़ी को नब्बे के दशक के रोमांस का अहसास कराने वाली फिल्म ‘‘शिद्दत’’लेकर फिल्मसर्जक कुणाल देशमुख आए हैं, जो कि एक अक्टूबर से ‘डिज्नी प्लस हॉट स्टार ’पर स्ट्रीम हो रही है. जिन्हे नब्बे के दशक के रोमांस का अहसास करना हो, वह इस फिल्म को देख सकते हैं.
कहानीः
फिल्म ‘‘शिद्दत” दो समानांतर प्रेम कहानियां हैं. जिसमें इस बात का चित्रण है कि कैसे पूरे दिल से विश्वास करने से प्यार मिलता है. इसमें एक प्रेम कहानी फ्रांस में भारतीय राजदूत गौतम(मोहित रैना )और ईरा(डायना पेंटी)की है. अपनी शादी की रिसेप्षन पार्टी में गौतम एक लक्की अंगूठी और अपने प्यार को लेकर दार्षनिक बाते करते हुए कहता है कि ‘अगर मैं आपसे लंदन में नहीं मिला होता, तो यह पेरिस या एम्स्टर्डम होता. क्योंकि तुम मेरी किस्मत हो. तुम मेरी नियति हो. और वह षिद्दत की बात करता है. गौतम की इन बातों से उस पार्टी में बिना निमंत्रण अपने दो साथियों संग पहुॅचे हाकी खिलाड़ी जग्गी (सनी कौशल )प्रभावित हो़ता है. मोबाइल, इंटरनेट व इंस्टाग्राम युग में जी रहे जग्गी को प्यार के नए मायने समझ में आते हैं. कुछ समय बाद हाकी खिलाड़ी जग्गी और तैराक कार्तिका( राधिका मदान )की प्रेम कहानी षुरू होती है. दो षुद्ध आत्माएं मिलती हैं, नोकझोक करते करते प्यार में पड़ जाती हैं, मगर तकदीर उन्हे जुदा कर देती है. जग्गी पंजाब, भारत में ही रह जाता है, जबकि कार्तिका लंदन चली जाती है और तीन माह बाद लंदन में कार्तिका की शादी है. कार्तिका के लंदन जाने से पहले जग्गी उससे शादी करना चाहता है और
वह कार्तिका से कह देता है कि वह अपने प्यार को पाने के लिए लंदन आएगा. कार्तिका, जग्गी से कहती है कि सिर्फ प्यार के लिए शादी नहीं होती, शादी होती है सैटल होने के लिए. वह जग्गी के प्यार को ठुकराते हुए भरी जवानी में अपने बुढ़ापे तक की रील पे कर देती है. जग्गी के ज्यादा जोर देने पर कहती है कि अगर तुझमें तीन महीने तक प्यार की यही शिद्दत भरी फीलिंग बनी रहे तो लंदन आ जाना. अब जग्गी निर्णय कर लेता है कि वह कार्तिका को इस जमाने में सच्चा प्यार दिखाएगा. इसलिए अब जग्गी लंदन जाना चाहता है. पर उसे वीसा नही मिलता. तब वह गैर कानूनी तरीके से लंदन के लिए रवाना होता है और आठ देषों की सीमाएं पार कर फ्रांस पहुॅच जाता है, जहां जग्गी पकड़ा जाता है. तब वहां उसकी मुलाकात गौतम से हो जाती है. इस बीच गौतम व ईरा के बीच वैचारिक मतभेद के चलते दूरियां पैदा हो चुकी हैं. क्योंकि गौतम गौतम हर काम कानून के हिसाब से करना पसंद करता है. जग्गी, गौतम को बताता है कि वह तो प्यार को लेकर उनकी दार्षनिक बातों से प्रभावित होकर ही अपने प्यार को पाने के लिए इस कठिन डगर पर पूरी षिद्दत के साथ निकला है और अब उसे उसकी मदद करनी चाहिए. तब गौतम उसे ईरा से दूरी की कहानी सुनाकर उसे अपने प्रयासों से भारत वापस भेजने का प्रयास करता है. मगर जग्गी एअरपोर्ट पर गौतम को चकमा देकर भागता है, पर अस्पातल पहुॅच जाता है. जहां फिर गौतम उसकी मदद के लिए पहुंचता है. अब गौतम , जग्गी को सुरक्षित भारत भेजना चाहता है. तो जग्गी एनकेन प्रकारेण लंदन पहुॅचना चाहता है. जग्गी इंग्लिश चैनल यानी कि समुद्र को तैर कर लंदन पहुॅचने का भी असफल प्रयास करता है. अंततः गौतम उसकी मदद करने का प्रयास करता है, तो वहीं जग्गी, गौतम व ईरा को पुनः मिलाने का प्रयास करता है. अब इन दो प्रेम कहानियां कहां पहुंचती हैं, इनके साथ क्या क्या होता है, इसके लिए फिल्म देखनी पड़ेगी.
लेखन व निर्देशनः
रोमांटिक फिल्म ‘‘शिद्दत’’ प्रेम नाम की पहेली के पीछे पागलपन, जुनून और दर्द को बयां करती है. मगर लेखक और निर्देशक के सिर पर शाहरुख खान अभिनीत
पुरानी फिल्म ‘‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’’ का भूत इस कदर सवार रहा कि उन्होने पूरी फिल्म का बंटाधार कर दिया. फिल्म का क्लायमेक्स काफी घटिया है. तो वहीं ‘षिद्दत’ देखकर अहसास होता है कि निर्देशक कुणाल देशमुख लगभग तेरह वर्ष बाद भी खुद को अपनी पहली फिल्म‘‘जन्नत’’से अलग नही कर पाए हैं. लेखक ने दो प्रेम कहानियां पेश की हैं, मगर दोनों में विरोधाभास है. कहानी में गहराई की बजाय उथलापन है. हॉकी खिलाड़ी और अप्रवासी भारतीय कार्तिका, जिसकी लंदन में शादी तय हो चुकी है, वह क्यों जग्गी की तरफ आकर्षित होती है, यह स्पष्ट नहीं होता. उपर से लेखक व निर्देशक दिखा रहे है कि कार्तिका को जग्गी के साथ ‘वन नाइट स्टैंड’में आपत्ति नही है, मगर शादी में है. प्यार को लेकर बड़ी-बड़ी बातें जरुर की गयी हैं. निर्देशक ने प्यार के बहाने फिल्म में यूरोप में अवैध प्रवासियों की समस्या की भी झलक दिखाने की असफल कोषिश की है. वह इस मुद्दे को भी सही ढंग से नही पेश कर पाए.
अभिनयः
जग्गी के किरदार में सनी कौशल ठीक ठाक ही हैं. पर उनका अंदाज रोमांटिक हीरो वाला नहीं है. कार्तिका के किरदार में राधिका मदान अपना प्रभाव छोड़ने में असफल रहीं. उनके चेहरे पर प्रेम के सहज भाव उभरते ही नही है. उनकी बॉडी लैंग्वेज रोमांटिक हीरोइनों वाली नहीं हैं. युवा राजनयिक गौतम के किरदार में मोहित रैना का अभिनय शानदार है. उन्होने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. ईरा के किरदार में डायना पेंटी, मोहित का कंधे से कंधा मिला कर साथ देती हैं, जबकि लेखक ने उनके किरदार को सही ढंग से लिखा नही है. अन्य सहायक कलाकार ठीकठाक हैं.