हस्तिनापुर की जब बात होती है तो महाभारत की याद आ जाती है. महाभारत के युद्ध की बुनियाद में द्रौपदी का अपमान बड़ी वजह थी. महाभारत को धर्मयुद्ध कहा जाता है. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पुराणवादी लोगों के द्वारा हस्तिनापुर से विधानसभा का चुनाव लड़ रही कांग्रेस की अर्चना गौतम को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर के उन का अपमान किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के योगी राज में महिलाओं का अपमान पुराणों की कहानियों जैसा ही है. पौराणिक कहानियों में बताया गया है कि औरत का अपमान सत्ता के विनाश का कारण बनता है.

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जिन उम्मीदवारों के नाम चुनें उन में एक नाम मेरठ जिले की हस्तिनापुर सीट से अर्चना गौतम का है. अर्चना गौतम का नाम पता चलते ही उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा. कट्टरवादी संगठनों और नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि अगर अर्चना गौतम चुनाव जीत गईं तो वे घंटाघर पर अपनी गरदन कटा लेंगे.

यह साजिश क्यों

अर्चना गौतम को ले कर तमाम तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाने लगा. इस की वजह यह है कि अर्चना गौतम मौडलिंग करती हैं. उन्होंने ब्यूटी कौंटैस्ट में हिस्सा लिया. ‘बिकिनी गर्ल’ के रूप में उन की अलग पहचान है. कट्टरवादी लोगों को अर्चना गौतम की ‘बिकिनी गर्ल’ वाली पहचान से ही एतराज है. इसे ले कर ही उन के नाम की घोषणा होते ही उन्हें ट्रोल किया जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी, अखिल भारतीय हिंदू महासभा और संत महासभा से जुड़े लोग अर्चना गौतम का विरोध कर रहे हैं.

अर्चना गौतम पेशे से मौडल और अभिनेत्री हैं. उन्होंने कई बौलीवुड फिल्मों में काम किया है. 2021 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें कांग्रेस पार्टी में शामिल किया था. इसी बीच उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों का चुनाव कर रही थी.

कांग्रेस ने इस चुनाव में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का फैसला किया. कांग्रेस ने महिला राजनीति को मुद्दा बनाने के लिए ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा दिया. ऐसे में कांग्रेस में शामिल होने के 2 माह के अंदर ही अर्चना गौतम को हस्तिनापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे दिया गया.

अर्चना गौतम का जन्म पहली सितंबर, 1995 को हुआ था. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली हैं. अर्चना ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है. अपने मौडलिंग के कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए वे मुंबई में रहती हैं. 2014 में अर्चना ने मिस यूपी का खिताब जीता था.

इस के बाद वे मौडलिंग और ऐक्टिंग के कैरियर में आगे बढ़ीं. कई मशूहर फिल्मों में अर्चना ने काम किया. इन में ‘ग्रैंड मस्ती,’ ‘हसीना पार्कर,’ ‘बैंड बाजा बारात’ और ‘वाराणसी जंक्शन’ प्रमुख हैं. छोटे रोल्स के सहारे अर्चना अपनी अलग पहचान बना रही थीं. उन्होंने हिंदी के साथसाथ तमिल फिल्मों में भी काम किया.

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अर्चना बनीं बिकिनी गर्ल

अर्चना गौतम की चर्चा तब शुरू हुई जब 2018 में उन्होंने ‘बिकिनी इंडिया 2018’ का खिताब जीता. इसी साल अर्चना गौतम ने ‘कास्मो वर्ल्ड 2018’ में भी हिस्सा लिया और अपनी अलग पहचान बनाई. अब अर्चना राजनीति में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं. कांग्रेस के टिकट पर वे मेरठ की हस्तिनापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं. बिकिनी गर्ल होने के कारण ही उन को विरोधी लोग ट्रोल कर रहे हैं.

इन आलोचनाओं से दूर अर्चना गौतम कहती हैं, ‘‘मुझे इस बात की खुशी है कि हस्तिनापुर से टिकट दिया गया है. यह एक पर्यटन स्थल है. यहां बहुत सारे प्राचीन मंदिर हैं. इस के बाद भी लोग यहां उतना नहीं आ रहे जितने आने चाहिए. अगर मैं यहां से चुनाव जीत गई तो सब से पहले यहां आनेजाने की सुविधा बढ़े इस का प्रयास करूंगी.

‘‘यहां एक अच्छा बस स्टौप और रेलवे स्टेशन बनवाने का काम करूंगी ताकि पर्यटक यहां आसानी से आ जा सकें. इस के साथसाथ मुझे किसानों के भी लिए काम करना है. सड़कें सही न होने के कारण खेती की पैदावार सही तरह से मंडियों तक नहीं पहुंच पाती. फसलों का नुकसान न हो, इस का प्रयास करूंगी. यहां केवल एक चीनी मिल है जबकि किसानों को ज्यादा चीनी मिलों की जरूरत है.’’

अपनी फिल्मी दुनिया की छवि को राजनीति से जोड़े जाने को ले कर अर्चना गौतम कहती हैं, ‘‘मेरे फिल्मी कैरियर को राजनीति से जोड़ कर न देखा जाए. सभी को पता है कि मैं ने कई ब्यूटी कौंटैस्टों में हिस्सा लिया है. वहां की तसवीरों को ले कर ट्रोल करना विरोधियों का काम है. मुझे पूरा भरोसा है कि हस्तिनापुर की जनता मेरा साथ देगी और वह मेरी बात को समझ रही होगी.

जब मुझे कांग्रेस में टिकट दिया गया तो हमारी नेता प्रियंका गांधी ने कहा था कि आधेअधूरे मन से राजनीति में कदम मत रखना. तुम्हें तुम्हारे फोटोज को ले कर ट्रोल किया जाएगा. तुम हिम्मत मत हारना. प्रियंका दीदी के हिम्मत देने के बाद मेरा साहस और बढ़ गया है. उन के शब्दों से मुझे ताकत मिली है.’’

निशाना तो औरतों को बनाना है

अर्चना गौतम कहती हैं, ‘‘हस्तिनापुर की पहचान से द्रौपदी भी जुड़ी हैं. हस्तिनापुर में उन का अपमान हुआ था, जिस के बाद महाभारत हुआ और द्रौपदी जीती थीं. अपमान करने वालों के पूरे वंश का नाश हो गया था. मैं द्रौपदी के उसी कथानक को फिर लिखना चाहती हूं. मेरे लिए अब यह चुनाव विधानसभा के चुनाव से अलग धर्मयुद्ध हो गया है. जहां औरत का अपमान किया जा रहा है.

महाभारत की सभा की ही तरह कुछ लोग सोशल मीडिया पर बुराभला लिख कर मेरा अपमान कर रहे हैं. लोग कहते हैं कि हस्तिनापुर को द्रौपदी का श्राप लगा है इस कारण यहां खुशहाली नहीं है. हस्तिनापुर को इस श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए मैं यहां आई हूं. मैं इसी शहर में पैदा हुई हूं. यहां मेरा घर है. यहीं पलीबढ़ी हूं. मैं उन लोगों में नहीं जो मुंबई से उड़ कर चुनाव लड़ने उत्तर प्रदेश आते हैं.

‘‘भाजपा के लोग कहते हैं कि कांग्रेस के पास कोई उम्मीदवार नहीं था इसलिए मुझे सस्ती लोकप्रियता के लिए यहां से टिकट दिया गया है. यह उन के दिमाग का दिवालियापन है. ये लोग महिलाओं को सम्मान देना ही नहीं जानते. इन्हें कांग्रेस से और महिलाओं के साथ उस के जुड़ाव से डर लग गया है. महिला विरोधी होने के कारण मुझे निशाना बना रहे हैं. भाजपा में फिल्मों में तमाम महिलाएं आई हैं.

लेकिन उन पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर रहा. मेरे मामले में बिकिनी तो एक बहाना है. महिला विरोधी लोग महिलाओं के विरोध के लिए मुझे निशाना बना रहे हैं. मैं डरने वाली नहीं हूं.’’

पौराणिक सोच में है महिला विरोध

धर्म की सोच हमेशा से महिला विरोध की रही है. पौराणिक और धार्मिक कहानियों में हमेशा यही बताया गया कि महिलाओं को अपना जीवन अपनी मरजी से जीने का हक नहीं है. इसी कारण कदमकदम पर पुरुषों के खराब कामों का दंड भी महिलाओं को भोगना पड़ा. सीता, द्रौपदी और अहिल्या जैसी कहानियों के पौराणिक ग्रंथ भरे पड़े हैं. इन महिलाओं के साथ जो कुछ घटा उस में इन का दोष नहीं था. दोष पुरुष मानसिकता का था. दंड महिलाओं को भुगतना पड़ा.

आज के दौर में भी महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता है. हस्तिनापुर में चुनाव कांग्रेस लड़ रही है. महिला उम्मीदवार के ‘बिकिनी गर्ल’ होने के नाते उस को निशाना बनाया जा रहा है. जिस समाज में अपराध करने वाला, भ्रष्टाचार करने वाला, दंगे कराने वाले को टिकट दिया जा रहा हो उस पर किसी को एतराज नहीं होता है.

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‘बिकिनी गर्ल’ से समाज के बिगड़ने का खतरा दिख रहा है. भारत ऐसा देश है जहां वात्स्यायन ने ‘कामसूत्र’ लिखा, जिस में सैक्स को परिभाषित किया गया. खजुराहो के मंदिरों में सैक्सरत मूर्तियां उकेरी गई हैं. वहां बिकिनी के नाम पर बदनाम किया जा रहा है. ‘बिकिनी गर्ल’ एक प्रतियोगिता थी, जिस में तमाम लड़कियों ने हिस्सा लिया था. इस में जीतना हरकोई चाहता था. यह किस संविधान में लिखा है कि ‘बिकिनी गर्ल’ चुनाव नहीं लड़ सकती.

हमारा समाज उदार है. यहां पोर्न फिल्मों में काम करने वाली सनी लियोनी तक को स्वीकार किया गया है. कलाकार के जीवन का आकलन उस के कला क्षेत्र में किए गए काम से नहीं करना चाहिए. औरतों की आजादी को दबाने के लिए उन को मुख्यधारा से दूर रखने का काम किया जाता है. औरत को बिकिनी में देखना भले गुनाह न हो पर उस के चुनाव को गुनाह समझ जा रहा है.

महिला आरक्षण का विरोध

महिला विरोधी इसी सोच के कारण महिला आरक्षण बिल संसद में पास नहीं हो पाया. 2014 और 2019 में भारतीय जनता पार्टी की बहुमत वाली सरकार केंद्र में बनी. बहुत सारे क्रांतिकारी काम करने का दावा इस दौरान किया गया. इस के बाद एक भी बार महिला आरक्षण बिल को पास करने पर विचार नहीं हुआ. 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं. अभियान की शुरुआत की, जिस का समाज की महिलाओं ने स्वागत किया. कांग्रेस ने ज्यादा से ज्यादा टिकट महिलाओं को देने का काम किया.

देश के इतिहास में पहली बार 40 फीसदी टिकट कोई दल महिलाओं को दे रहा है. कांग्रेस का यह दांव बाकी दलों के लिए भारी पड़ रहा है. कांग्रेस की पहल के चलते ही बाकी दलों ने भी अधिक से अधिक सीटें महिलाओं को देने की पहल की. ये सीटें पहले पुरुष उम्मीदवारों को मिलती थीं.

ऐसे में कांग्रेस की यह शुरुआत पुरुषवादी मानसिकता के लोगों को पसंद नहीं आ रही. वे इस के विरोध में हैं. पुरुषवादी मानसिकता के लोग मानते हैं कि अगर महिलाएं राजनीति में ज्यादा से ज्यादा आ गईं तो वे अपने लिए कानून बनाएंगी, अपने अधिकारों को पहचान लेगीं, जिस से पुरुषवादी मानसिकता के लोगों को डर लग रहा है.

आसान नहीं महिलाओं के मुद्दों को दबाना

लखनऊ मध्य विधानसभा सीट से उम्मीदवार सदफ जफर कहती हैं, ‘‘समाज में आधी आबादी को हर तरह से दबाने की कोशिश होती है. उसे आंदोलन करने से रोका जाता है. उसे राजनीति में आने से रोका जाता है. उस के लिए घर और समाज में तमाम तरह की बंदिशें लगाई जाती हैं. कोशिश यह होती है कि महिला नेता केवल तमाशाई बन कर रहे. पार्टी में शो पीस बनी रहे. यह भी देश जानता है कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को और अधिकार देने में सब से अधिक काम किया है.

‘‘पंचायती राज चुनाव के जरीए महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का काम कांग्रेस ने किया. कांग्रेस की सरकार में ही लड़कियों को अपने पिता की संपत्ति में अधिकार का कानून बना. महिला आरक्षण बिल कांग्रेस लाई. दूसरे दलों ने उसे पास नहीं होने दिया. अब विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देना मील का नया पत्थर कांग्रेस ने लगाया है.

‘‘विधानसभा चुनावों की मुहिम आगे रंग लाएगी. अब इस कदम से पीछे हटना आसान नहीं है. हर चुनाव में यह मुद्दा बनेगा. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी महिलाओं की यह गूंज दिखेगी.’’

हर वर्ग को होगा लाभ

लखनऊ की मोहनलालगंज विधानसभा सीट से कांग्रेस ने ममता चौधरी को अपना प्रत्याषी बनाया है. मोहनलालगंज सुरक्षित सीट है. ममता चौधरी कहती हैं, ‘‘कांग्रेस में हर जाति और वर्ग की महिलाओं को सम्मानजनक स्थान दिया जाता है. कुछ दलों में केवल ऊंची जाति की महिलाओं को ही टिकट दिया जाता है. राजारजवाड़ों के साथ कांग्रेस ने गरीब कमजोर वर्ग की महिलाओं को भी टिकट दिया है. पंचायती राज चुनाव में महिलाओं को आरक्षण देने से पहले कोई कल्पना नहीं कर सकता था कि गरीब, कमजोर वर्ग की महिलाएं राजनीति में आ सकती हैं. पंचायती राज अधिनियम लागू होने के बाद कमजोर वर्ग की महिलाएं केवल प्रधान ही नहीं ब्लौक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष तक के पदों पर पहुंचीं.

‘‘अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू होता तो संसद और विधानसभा में महिलाएं अपने हितों और अधिकारों के कानून बनाने में हिस्सेदारी कर रही होती. वैसे तो हर दल का नेता ‘जिस की जितनी हिस्सेदारी, उस की उतनी भागीदारी’ की बात करता है. लेकिन जब आधी आबादी की महिलाओं को उस की हिस्सेदारी देने का वक्त आता है तो वे पीछे हो जाते हैं. कांग्रेस की यह पहल महिलाओं के अधिकार के लिए है. यह रंग जरूर लाएगी. जो लोग यह समझ रहे हैं कि महिलाएं कमजोर प्रत्याशी होती हैं, वे महिलाओं की ताकत का सही आकलन नहीं कर पा रहे हैं.’’

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कांग्रेस की महिला राजनीति के दूरगामी परिणाम सामने आएंगे. दूसरे दलों की महिलाएं भी यह मान रही हैं कि उन के दलों को भी 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने चाहिए. 2022 की यह सोच धीरेधीरे बड़ी होगी और आने वाले चुनावों में अब यह मुद्दा बनेगी. अब महिलाएं खामोश रह कर ही सही पर कांग्रेस की इस पहल के साथ खड़ी नजर आ रही हैं.

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव का कहना है, ‘‘मैं पूरी तरह से महिला आरक्षण के समर्थन में हूं. महिलाओं को अधिक से अधिक संख्या में संसद और विधानसभा में पहुंचना चाहिए. यह केवल राजनीतिक दलों की ही नहीं हम महिलाओं की भी जिम्मेदारी है.’’

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