दुनिया में कामवाली हर औरत का जीवन बड़ा संघर्षमय होता है, जो घर से दूर रह कर काम करती हैं, उन के लिए तो चुनौतियां और ज्यादा होती हैं. जो कभी हार नहीं मानतीं, आमतौर पर स्वभाव से हंसमुख होती हैं, उन्हें पार्टी करना, पार्टी में जाना और घूमना बहुत पसंद होता है. उन्हें सब के दिलों पर छा जाने की कला सीखनी होती है.

कई औरतों को चुनौतीपूर्ण काम मिलता है और साथ ही मातापिता की देखभाल का जिम्मा भी. अगर जौब ऐसी है जिस में अकेले ट्रैवल करना भी जरूरी हो तो कुछ और चैलेंज आ जाते हैं.

अनिता को अपनी जौब के सिलसिले में दिल्ली से मुंबई आनाजाना करना होता था क्योंकि वह मार्केटिंग और मैनेजमैंट का दोहरा काम संभाल रही थी.

वह हिमाचल की निवासी थी और जब दिल्ली आई तो मांबाप से मिलने भी जाती. उसे कालेज में डांस करने का शौक था और किसी भी अवसर पर वह अवश्य नृत्य करती थी. अब भी किसी पार्टी में वह घंटों नाच सकती है. पहले वह दिल्ली में काम करती थी पर बाद में उसे मुंबई में एक कंपनी ने बुलाया.

पहले वह वहां 1 हफ्ता काम करती और फिर वापस दिल्ली चली आती थी. फिर वह मुंबई आ गईर् और यहीं रहने लगी. तब तक काम इतना बढ़ गया था कि बारबार आनाजाना संभव नहीं था.

जीवन एक संघर्ष है

इस तरह की चुनौतियां हर सफल औरत को कई बार ?ोलनी पड़ती हैं. शादी तो हो जाती है पर अगर काम के बोझ में जीवनसाथी के कारण तो चैलेंज बढ़ जाते हैं, खासतौर पर जब बच्चे भी हो जाएं. डिवोर्स का समय काफी संघर्षपूर्ण रहता है क्योंकि लोग इस अलगाव को समझ नहीं पाते हैं. इस में सब से बड़ी सहायता अकसर उन की मां करती है क्योंकि उन्हें पता होता है कि ऊंचनीच क्या होती है.

आमतौर पर सफल तलाकशुदा औरतें अपने पति के बारे में अधिक बताना नहीं चाहतीं और यह सही भी है क्योंकि वह एक बीता हुआ कल था जिसे उसे याद करना अच्छा नहीं लगता है. लेकिन इतना जरूर है कि जो लोग इस तरह की स्थिति से न गुजरे हों उन्हें उस की बात समझ में नहीं आती और फिर यह भी चुनौतियों की लिस्ट में जुड़ जाता है. शादी टूटने को हमेशा एक सकारात्मक रूप में लें कि झगड़े वाले विवाह से चुनौती वाला एकाकीपन ज्यादा अच्छा है.

अगर परिवार की कोई लड़की ऊंचे पद पर न हो तो वह भी इसी तरह की सफल महिला को नहीं समझ पाती. काम कर के अपने पैरों पर खड़ा होना एक ऐसा जनून है जिसे रोकना नहीं चाहिए. एक औरत को चैन तभी आने लगेगा जब वह काम में सफल होने लगेगी. यही बात बच्चों में भी आ जाती है अगर बच्चे हों तो.

आसान बनाएं काम

आज भी किसी भी अकेली महिला का काम करना मुश्किल है. आज हर दिन, हर पल सिस्टम बदलते हैं. प्रैक्टिस के चक्कर में कंपनी के रोज नए प्रयोग करती है, दखलंदाजी करती है. इसलिए काम शुरू कहीं से होता है और हो आगे कुछ और रहा होता है, जिस का आगापीछा समझना और समझना चैलेंजिंग होता है. आप जिस जौब के लिए रखी जाती हैं उस का प्रोफाइल बदल जाता है. मैनेजर की निजी जिंदगी नहीं रहती.

बच्चों के पीटीए को अटैंड करना, फिर उन के साथ घूमना, उन का खयाल रखना, मातापिता का ध्यान रखना सब सही तरीके से करना होता है. काम 9 से 6 बजे तक हो या 9 से रात के 12 बजे तक सहना पड़ता है. काम की गुणवत्ता अधिक बनी रहे यह लगातार चैलेंज होता है.

बढ़ते जाना है

हां हर सफल महिला को अपने पहरावे पर पूरा ध्यान रखना चाहिए. हर तरह के कपड़े अच्छे नहीं होते. वही पहनें जो कंफर्टेबल रखे. पार्टियों में जाएं, प्रकृति से प्यार करें.

काम में ऐक्सप्लायटेशन हो तो हल्ला न मचाएं. यह हमेशा से होता रहा है. अगर आप को किसी से कुछ खास उम्मीद है तो आप को कुछ देना होगा. खुशीखुशी दें या रोधो कर यह आप पर है. यह गारंटी भी नहीं कि आप जो चाहें वह आप को मिलेगा पर छुईमुई न बनें.

काम का चैलेंज वह क्षेत्र है जहां मरना भी पड़ता है. अगर आप का कोई गौडफादर है तो आप कामयाब. आप की सफलता आप की बहुत सी खामियों को छिपा देगी. पीछे की फुसफुसाहट को इग्नोर करना भी चैलेंज है.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...