तेरा सुरूर….. सिंगर हिमेश रेशमिया के ये गाना हर कोई सुनना पसंद करते है, क्योंकि इस गाने में हिमेश ने प्यार की भावना को बहुत ही सुंदर तरीके से गाने की कोशिश की है. हिमेश एक इमोशनल सिंगर है, इसलिए उनके गीतों में मेलोडी अधिक होती है. हिमेश रेशमिया का जन्म 23 जुलाई 1973 को गुजरात में हुआ था. उनके पिता का नाम विपिन रेशमियां है और उनकी माँ का नाम मधु रेशमियां है. हिमेश के पिता की इच्छा थी कि उनका बड़ा बेटा संगीत की दुनिया में कुछ करें, लेकिन अचानक एक एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गयी और तब हिमेशकेवल 11 वर्ष के थे.उन्होंने अपने पिता की इच्छा को पूरा करने की वजह से संगीत में अपना कैरियर बनाया.केवल 16 साल की उम्र में हिमेश ने दूरदर्शन अहमदाबाद से अपने कैरियर की शुरुआत की थी.
मिली सफलता
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सलमान खान की फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’से उन्होंनेहिंदी फिल्मों के लिए संगीतकार का काम किया, फिल्म काफी हिट साबित हुई और इस फिल्म के बाद रेशमियां ने सलमान की कई फिल्मों में अपना संगीत दिया, जो हमेश सुपरहिट रहा. हिमेश को बतौर संगीत निर्देशक सफलता फिल्म तेरे नाम से वर्ष 2003 में मिली थी. सफल निर्देशन के बाद उन्होंने अपनी किस्मत गायकी में फिल्म ‘आशिक बनाया आपने’ से किया. इस फिल्म के गाने उस दौर में काफी हिट साबित हुए थे. साथ ही उन्हें इस फिल्म के बेहतरीन गानों के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ गायक के पुरुस्कार से भी नवाजा गया था. हिमेश हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे गायक और संगीत निर्देशक हैं जिन्हें उनके पहले डेब्यू गाने के फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ नवोदित गायक के अवार्ड से नवाजा गया.
अभिनय करना पड़ा भारी
फिल्मों में कैरियर शुरू होने से पहले हिमेश संगीत के कई शो किया करते थे,जिन्हें लोग काफी पसंद करते थे. हिमेश का संगीत निर्देशन और गायकी का कैरियर हिंदी सिनेमा में सुपरहिट रहा, लेकिन उनका अभिनय कैरियर अच्छा नहीं था. उन्होंने बतौर अभिनेता कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी एक भी फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों का दिल नहीं जीत सकी. हिमेश की पहली शादी 21 वर्ष की उम्र में कोमल से हुई, उनसे उनका एक बेटा स्वयं रेशमिया है. कुछ सालों साथ रहने के बाद हिमेश ने कोमल को तलाक देकर दूसरी शादी सोनिया कपूर से की, जो उनकी लॉन्ग टर्म गर्लफ्रेंड रही है.
दिए अवसर
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हिमेश बड़े पर्दे के अलावा छोटे पर्दे पर भी कई रियलिटी शोज के जज बने और हर काबिल प्रतियोगी को गाने का अवसर भी देते रहे. इतना ही नहीं उन्होंने बंगाल की राणाघाट रेलवे स्टेशन पर गाना गाकर भीख मांगती हुई रानू मंडल को भी गाने का अवसर दिया, जिसकी वजह से आज वह स्टेज शो कर अच्छा कमाती है. हिमेश इन दिनों सोनी टीवी पर रियलिटी शो इंडियन आइडल 13 में एक बार फिर जज बनें है और अपने अनुभवों को उन्होंने वर्चुअल इंटरव्यू के जरिये बयान किया कि वे अभी भी इस रियलिटी शो से बहुत कुछ सीखते आ रहे है, जो उन्हें जीवन की हकीकतों से रूबरू करवाता है.
जीता हूँ बचपन
हिमेश कहते है कि इस शो के ज़रिये मैं अपने बचपन की उन पलों को जीता हूँ, जिसे अब मैं भूल चुका हूँ, ये बहुत बड़ा भावनात्मक पल मेरे लिए होता है, लेकिन अच्छा भी लगता है. इसका प्रेशर केवल ऑडिशन, शूटिंग और जज करने तक ही होता है, जिसे इन छोटे-छोटे बच्चों को देखने पर ख़त्म हो जाता है. पहले किसी भी प्रतिभा को आगे आने का कम अवसर मिलता था, लेकिन अब इस मंच के द्वारा ये बच्चे आगे बढ़कर संगीत को एक अच्छा प्रोफेशन बना सकते है. इसबार का सीजन बहुत अच्छा, और प्रतिभायुक्त है. कोविड के बाद इस बार काफी संख्या में बच्चों ने भाग लिया है, जिसमे सही प्रतिभा को चुनना बहुत मुश्किल हुआ.
फिटनेस पर ध्यान
हिमेश हमेशा अपने लुक्स को लेकर बहुत सजग रहते है और इसकी जिम्मेदारी वे अपनी पत्नी को देते है, जो हमेशा डाइटिशियन के हिसाब से होता है, खाना वे सब खाते है, लेकिन समय से उन्हें खाना पड़ता है. वे कहते है कि समय से खाना जरुरी है, लेकिन इस तरह के डाइट में टेस्ट कही रह जाता है. ऐसा मुझे कुछ विडियो सॉंग और प्रोजेक्ट के लिए करना पड़ता है, जिसे मेरी पत्नी लगन से करती है, पर ऐसा करना कठिन होता है.
जरुरी मेहनत करने का जज्बा
हिमेश हमेशा नए टैलेंट को मौका देते है और ये वे ऑडिशन के समय ही प्रतियोगी से कह देते है, जिससे उन्हें अच्छा गाने का प्रोत्साहन मिलता है. इसकी वजह के बारें में पूछे जाने पर उनका कहना है कि अगर ये बच्चे पुराने गाने इतने सुंदर गाते है तो ये नए गानों को भी सही तरीके से गा सकते है, और उन सभी ने मेरी आने वाली फिल्मों और वेब सीरीज में अच्छा प्रदर्शन दिया है. मेहनत करने का जज्बा बच्चों में होने की जरुरत होता है, क्योंकि आज भी जब कोई गाना किसी शुक्रवार को किसी फिल्म के रिलीज के बाद आती है, तो मेरी मेहनत वैसी ही रहती है, जितना पहले हुआ करती थी.
जरुरी पर्सनल एपिअरेंस
हिमेश आगे कहते है कि मैं विश्वास करता हूँ कि हर इंसान में कुछ न कुछ प्रतिभा होती है, जिसे बाहर निकालना पड़ता है. एक जमाना था जब सिर्फ प्लेबैक हुआ करता था, वहां एक आर्टिस्ट, गायक कलाकार की आवाज कोसुनते थे, किसी प्रकार की पर्सनल कनेक्शन गायक के साथ एक्टर्स का नहीं था.आवाज से जज किया जाता था, अगर एक्टर ने उस गाने को सही से निभा दिया है तो आप उससे कनेक्ट हो पाते थे, पर आज का जमाना एपीयरेंस का है, सोशल मीडिया एक्टिव हुआ है, उसमे सभी के आँखों का रिएक्शन,गाने का ढंग, ओवर आल प्रस्तुति सब सामने आती है. आवाज के अलावा उनके आसपास के लोगों का प्रभाव पड़ता है. जो कुछ के लिए आसान और कुछ को कठिन लगता है.
करता हूँ मिस
गायक हिमेश का कहना है कि मैंने अपने पिता के साथ बहुत छोटी उम्र से संगीत सीखना शुरू कर दिया था. पहले मैंने अधिक लाइव शूट नहीं किया है. बड़े स्टूडियों में सभी का एक साथ होने वालाइंटरेक्शन बहुत अच्छा था, वह अब कम होता है, अभी ट्रैक दिया जाता है और तकनीक का प्रयोग बहुत होता है. मेरे पिता ने 100 से अधिक म्यूजिशियन के साथ बड़े स्टूडियों में गाया है. 8 घंटे की रिहर्सल के बाद एक टेक में गाने को रिकॉर्ड करवाना,अब एक एपिक बन चुका है. वह प्रोसेस अब नहीं है और दर्शक भी उसे पसंद नहीं करेंगे, लेकिन उस प्रोसेस में जो वाइब्सथी उसे मैं बहुत मिस करता हूँ. उन पुराने गानों को अभी भी सब सुनते है और उनसे प्रेरित होकर नया गाना बनाते है.