कावेरी अपनी शादी पक्की होने के बाद से ही बहुत एक्साइटेड थी. इस दिन के लिए उस ने बहुत सारे सपने देखे थे. वह चाहती थी कि यह उस की जिंदगी का ऐसा दिन हो जो जिंदगी भर के लिए एक यादगार बन जाए.
कावेरी सब भाई बहनों में सब से छोटी और सब से लाडली है. उस के मातापिता ही नहीं बल्कि परिवार का हर सदस्य उस की शादी में खुल कर पैसे खर्च करने वाला था. आर्थिक रूप से उस का परिवार काफी संपन्न है. लिहाजा कावेरी की शादी की शौपिंग लिस्ट भी काफी लंबीचौड़ी बनी थी.
अपनी सहेलियों की और बड़ी बहनों की शादियों में कावेरी ने जैसे लकदख कपड़े, जेवर, मेकअप, सजावट, संगीत और रौनकें देखी थीं, अपनी शादी में वह उन सब से अच्छा, कुछ हट कर, कुछ यूनीक चाहती थी. शादी के लहंगे से ले कर मेंहदी और मेकअप आर्टिस्ट तक सैकड़ों चीजें उसे तय करनी थीं, लेकिन वह चाहती थी कि अपनी सारी शौपिंग किसी ऐसे के साथ करे, जिस से उस का मिजाज और चौइस मिलती हो.
जो उस के नजरिए को समझता हो, जो ट्रेडिशनल के साथसाथ लेटैस्ट फैशन की समझ रखता हो क्योंकि साडि़यों, लहंगों और कुछ भारी काम के सलवारसूट के अलावा कावेरी को वैस्टर्न स्टाइल और लेटैस्ट डिजाइन के आउटफिट्स भी लेने थे, जिन्हें वह हनीमून पर और फ्रैंड्स बगैरा के घर पर पार्टी आदि में पहन सके. अब हर जगह तो भारी सूट या साड़ी वह नहीं पहन सकती है.
शौपिंग में साथ की जरूरत
इस के साथ ही अपने कपड़ों से मिलतेजुलते सैंडल्स व बैग भी उसे लेने थे. फिर लेटैस्ट डिजाइन के अंडरगारमैंट्स, नाइटी, चूडि़यां, कौस्मैटिक्स की तो काफी लंबी लिस्ट थी. कावेरी इन तमाम चीजों की शौपिंग अपनी मां अथवा चाची या मामी के साथ नहीं बल्कि किसी हमउम्र के साथ करना चाहती थी.
कावेरी ने शौपिंग के लिए जो लिस्ट बनाई उस में आइटम्स के हिसाब से उस ने तीन कैटेगरी बनाई. शादी के लहंगे, कपड़े, लौंजरी, नाइटी, फुटवियर, बैग, कौस्मैटिक्स जैसी चीजों की खरीदारी के लिए उस ने अपनी बचपन की सहेली रत्ना को फोन किया.
दरअसल, कावेरी की आदत है कि वह एक चीज के लिए कई दुकानें देखती है. किसी एक जगह उसे चीज पसंद नहीं आती है. रत्ना और कावेरी स्कूल टाइम में खूब घूमती थीं. 1-1 चीज के लिए कईकई दुकानें देखती थीं. दुकानदार से खूब मोलभाव करती थीं. दोनों को एकदूसरे का साथ पसंद था. दोनों के बीच बढि़या ट्यूनिंग थी. दिनभर हाथ में हाथ डाले घूमतीं और थकान का नामोनिशान नहीं. कावेरी को उस वक्त किसी ऐसे का साथ चाहिए था जो दिनभर उस के साथ मार्केट में घूम सके.
ताकि कोई पछतावा न हो
शादी की शौपिंग करते वक्त ज्यादातर लड़कियां जो गलती करती हैं वह है शादी के बाद के लिए सारे हेवी आउटफिट्स खरीदने की. कावेरी की बहनों और कुछ सहेलियों ने अपनी शादी के वक्त काफी हैवी साडि़यां और सूट खरीदे मगर शादी के 1 महीने के बाद ही उन तमाम हैवी सूट्स और साडि़यों का कोई इस्तेमाल नहीं रहा.
वे आउट औफ फैशन हो गए. इसलिए अपनी शादी में कावेरी बहुत सारे हैवी आउटफिट्स खरीदने की जगह कुछ अलगअलग पैटर्न और डिजाइन के हैवी दुपट्टे और हैवी ब्लाउज भी लेना चाहती थी जो बाद में प्लेन सूट्स और साडि़यों के साथ मैच किए जा सकें, जिन्हें अलगअलग चीजों के साथ अलगअलग तरीकों से स्टाइल किया जा सके.
मगर कावेरी का यह पौइंट औफ व्यू उस की मम्मी या उन की उम्र की औरतें नहीं समझ सकेंगी, यह उसे पता था. इस के लिए उसे अपनी सहेली रत्ना पर भरोसा था.
शादी में दुलहन को पहनाए जाने वाले जेवर और दूल्हे को दी जाने वाली चेन, अंगूठी जैसी चीजें सब से ऐक्सपैंसिव आइटम्स होती है. इन्हें सहेली के साथ नहीं बल्कि परिवार के सदस्यों के साथ ही खरीदा जाता है. कावेरी का परिवार सोने और हीरे के जेवर के लिए सिर्फ लाला जुगल किशोर ज्वैलर्स पर ही भरोसा करता है. शादी में क्व15-20 लाख के गहनों की खरीदारी होनी थी तो उस के लिए कावेरी को अपने मातापिता और बड़ी बहन के साथ जाना ठीक लगा. उन्हें गहनों की परख थी.
कावेरी से बड़ी दोनों बहनों और दोनों भाभियों के गहनों की खरीदारी उस के मातापिता ने ही की थी. उन की पसंद सभी को पसंद आई थी. सभी गहने नई डिजाइनों से बहुत आकर्षक थे.
भारतीय शादियों में दुलहन के घर वालों की पूरी कोशिश रहती है कि वे अपनी बेटी को अच्छी से अच्छी और हैवी से हैवी ज्वैलरी शादी में दें, जिस से उस की ससुराल में उस की तारीफ हो और समाज में उन के परिवार का स्टेटस बना रहे. मगर स्टेटस मैंटेन करने के चक्कर में अकसर प्रैक्टिकल होना भूल जाते हैं.
स्टेटस का चक्कर
कावेरी जानती थी कि शादी की हैवी ज्वैलरी को शादी के बाद दोबारा पहनने के बहुत ही कम मौके मिलते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए वह 1-2 हैवी सैट के साथ 4-5 हलके सैट या अलगअलग पीसेज लेना चाहती थी जिन्हें वह अलगअलग आउटफिट्स के साथ और कई तरीकों से स्टाइल कर सके. उस ने अपनी मां से कहा कि वे उस के लिए सिर्फ गोल्ड या डायमंड ज्वैलरी में इन्वैस्ट न करें बल्कि सिलवर और जंक ज्वैलरी भी लें.
हालांकि यह बात उस की मां को कुछ जमी नहीं, मगर बेटी की पसंद को देखते हुए उन्होंने कुछ हलके सैट के लिए हामी भर दी. कावेरी खुश थी कि उस की पसंद के अनुरूप ज्वैलरी की खरीदारी हो गई.
तीसरी कैटेगरी लकड़ी का फर्नीचर जैसे पलंग, गद्दे, चादरें, सोफा सैट, अलमारी, ड्रैसिंग टेबल और कावेरी की अपनी चीजें रख कर ले जाने के लिए सूटकेस और लगेज बैग की थी. इस के अलावा दूल्हे के कपड़े और दूल्हे के परिवार को दिए जाने वाले गिफ्ट भी खरीदे जाने थे.
ये सब भी कावेरी की पसंद से लिए जाने थे जिस के लिए उसे अपने दोनों बड़े भाइयों के साथ जाना ठीक लगा. उन्हें इस सामान की दुकानों की भी जानकारी थी और रेट्स की भी.
एक त्योहार की तरह
लड़कों के मुकाबले लड़कियों की शादी की शौपिंग एक बहुत ही हैक्टिक और स्ट्रैसफुल काम है.शादी की शौपिंग बहुत सोचसमझकर और सही प्लानिंग के साथ हो तो सारा पैसा वसूल हो जाता है वरना शादी के हफ्ते 2 हफ्ते बाद ही खरीदी गई चीजें बेकार महसूस होने लगती हैं और लगता है सारा पैसा व्यर्थ चला गया. इसलिए शादी के बाद के लिए एवरग्रीन और वर्सटाइल दिखने के साथसाथ कंफर्ट जैसी चीजों का विशेष ध्यान रखते हुए ही खरीदारी की जानी चाहिए.
नौकरीपेशा लड़कियां शादी के बाद हर वक्त क्रिसमस ट्री की तरह सजीधजी या जगमगाती नहीं दिखना चाहती हैं खासतौर से औफिस में. वे तो चंद रोज बाद ही हैवी गहने और भारी काम वाली साडि़यां पहनना छोड़ देती हैं. ये महंगी चीजें फिर हमेशा के लिए उन की अलमारी में ही बंद हो कर रह जाती हैं.
आज लड़कियां सोचती हैं कि शादी की खरीदारी ऐसी हो कि हैवी आउटफिट्स और चमचमाते गहनों के बिना भी न्यूली मैरिड लुक पाया जा सके. मगर घर के बुजुर्ग इन बातों को समझ नहीं पाते हैं इसलिए ‘गृहशोभा’ की राय तो यही है कि शादी की शौपिंग उस के साथ करें जिस के साथ आप की बढि़या ट्यूनिंग हो, जो आप की पसंद और आप की जरूरत को अच्छी तरह समझता हो. वह आप की सहेली भी हो सकती है और आप की बहन भी. –