रिश्ते को निभाने के लिए प्यार जरूरी है या पैसे? कई लोग प्यार में अपनी सारी दौलत लुटा देते हैं तो कुछ लोग अपने प्यार को ही लूट लेते हैं. कई लोग मानते हैं कि जीवन में मजबूत रिश्तों के लिए प्यार जरूरी है जबकि सच यह है कि पैसे की वजह से कई सालों के रिश्ते टूट जाते हैं.

हाल ही में मिशिगन और टैक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिल कर रिश्ते निभाने के लिए प्यार या पैसा क्या ज्यादा जरूरी है इस विषय पर रिसर्च की. इस रिसर्च के अनुसार जो लोग पैसे को ज्यादा महत्त्व देते हैं यानी जो लोग अपनी कमाई पर फोकस रखते हैं वे रिश्तों को मजबूत नहीं बना पाते. ऐसे लोगों की अपने साथी से अच्छी बौंडिंग भी नहीं बन पाती. इस वजह से वे अपने पार्टनर से दूर हो जाते हैं.

इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने 434 ऐसे लोगों को शामिल किया जो शादीशुदा या रिलेशनशिप में थे और लंबे समय से एकदूसरे के साथ रह रहे थे. इस रिसर्च में इन जोड़ों से इस बारे में बात की गई कि ऐसी कौन सी बातें हैं जिन पर दोनों की नहीं बनती? ऐसा कबकब हुआ जब वे पार्टनर के साथ सहमत नहीं थे? इस स्टडी के लिए इन कपल्स को फाइनैंशियल सक्सैस के बारे में पढ़ने के लिए दिया गया.

शोध में खुलासा

शोध में यह बात सामने आई कि जो लोग पैसे पर ज्यादा ध्यान देते हैं वे अपने पार्टनर को कहीं न कहीं अनदेखा करते हैं यानी उन का फोकस साथी पर नहीं होता. इस वजह से दोनों में दूरी बन जाती है. दरअसल, जो लोग दिनभर पैसापैसा करते हैं वे अपने लाइफ पार्टनर से बात करते समय भी पैसे के हिसाबकिताब या सेविंग्स और इनवैस्टमैंट की ही बात उठाते हैं.

वैसे तो जिंदगी में पैसा भी जरूरी है लेकिन आप कमाते किस के लिए हैं? जब आप की जिंदगी में सुकून ही नहीं है, आप के पैसे की भूख मिटती नहीं है और इस आदत की वजह से आप का पार्टनर आप से चिढ़ने लगता है. आप दोनों में दूरी कब आ जाती है पता भी नहीं चलता. आप को पैसा चाहिए लेकिन आप के पार्टनर को आप का समय चाहिए. एक अच्छी जिंदगी के लिए आखिर कितना पैसा चाहिए होता है?

‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ फिल्म में ऋतिक रोशन ऐसा ही एक किरदार निभाता है जिस में वह पैसों के लिए जी रहा है. उस का पार्टनर से रिश्ता टूट जाता है और तब कैटरीना उस की लाइफ में आती है. वह ऋतिक को पैसों के बजाय रिश्तों और सुकून के महत्त्व का एहसास दिलाती है.

क्या जरूरी

पैसा या प्यार इस बारे में मिशिगन के असिस्टैंट प्रोफैसर और साइकोलौजिस्ट देबोराह ई वार्ड का कहना है कि आप का प्यार तब आप से दूर हो सकता है जब आप फाइनैंशियल सक्सैस को ही अपनी प्राथमिकता बना लेते हैं.

साधारण भाषा में कहा जाए तो जब प्यार से ज्यादा पैसे को अहमियत देते हैं तो रिश्ता तो वैसे ही टूट जाता है. कई बार देखने में आता है कि लोग पैसे के पीछे इतने पागल होते हैं कि अपने प्यार को ही छोड़ देते हैं.

कुछ लोग यह मानते हैं कि जो सुकून प्यार में है वह पैसे में कहां. आप पैसे से सबकुछ खरीद सकते हैं लेकिन प्यार नहीं. अगर आप का प्यार साथ है तो आप वह सब पा सकते हैं जो चाहते हैं. जबकि कुछ लोग यह मानते हैं कि जब पेट में भूख की आग लगती है तो इंसान सब से पहले प्यार को ही ठोकर मारता है. अगर जेब में पैसा हो तो आप की गर्लफ्रैंड बन सकती है. पैसे से कोई भी चीज खरीदी जा सकती है. वहीं कुछ लोग आज भी पैसे से ज्यादा प्यार और रिश्तों को तवज्जो देते हैं. दरअसल, कुछ लोग दिमाग से सोचते हैं तो कुछ दिल से.

हकीकत यही है कि प्यार जीवन में नई खुशियां ले कर आता है और जब आप दिल से रिश्ते निभाते हो तो जेब खाली हो या भरी इस का कोई फर्क नहीं पड़ता. प्यार से निभाए गए रिश्ते वर्षों बाद भी उतने ही जीवंत और मजबूत रहते हैं जबकि पैसों से खरीदे गए रिश्ते एक चोट से टूट जाते हैं.

मनोज कुमार और श्रद्धा का मजबूत प्यार

2023 में आई विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘12वीं फेल’ दरअसल गरीबी को मात दे कर आईपीएस अधिकारी बने मनोज कुमार शर्मा और आईआरएस अधिकारी श्रद्धा जोशी के प्यार और सफलता की कहानी है. इस फिल्म के बाद आईपीएस मनोज शर्मा और उन की पत्नी श्रद्धा जोशी की जोड़ी दुनियाभर में मशहूर हो गई. इन की प्रेम कहानी ऐसी ही है जिस में खाली जेब के बावजूद रिश्ते को बड़ी खूबसूरती से निभाया गया.

दरअसल, मनोज कुमार शर्मा और श्रद्धा जोशी के परिवारों की आर्थिक स्थिति में जमीनआसमान का फर्क था. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले मनोज 12वीं क्लास में फेल हो गए थे लेकिन खुद पर भरोसा था. पढ़ाई के दौरान उन्हें जीवन में चल रहे कई संघर्षों से लड़ना पड़ा था. इन में सब से बड़ा संघर्ष था आर्थिक संकट. उस दौरान उन के सिर पर छत तक नहीं थी, जिस वजह से उन्हें भिखारियों के साथ भी सोना पड़ा था. मनोज शर्मा की स्थिति इतनी खराब थी कि उन्हें चाय की दुकान से ले कर आटा चक्की पर काम करना पड़ा था.

पैसे कमाने के लिए उन्होंने ग्वालियर में टैंपो चलाने से ले कर दिल्ली में लाइब्रेरी के चपरासी तक का काम किया. लाइब्रेरी में काम करते हुए मनोज ने कई मशहूर लेखकों की किताबें पढ़ीं और उन की लिखी बातों पर अमल किया.

इन की जिंदगी ऐसी फिल्म की तरह रही जिस में प्यार की भी अहम भूमिका थी.

दरअसल, मनोज अपनी ही क्लास की लड़की श्रद्धा पर दिल हार बैठे थे. उन के  रास्ते पहली बार दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक यूपीएससी कोचिंग सैंटर में मिले. मनोज शर्मा की स्थिति ऐसी थी कि वे मुश्किल से अपना गुजारा कर के दिल्ली में अपनी यूपीएससी की तैयारी के लिए रहते थे, जबकि श्रद्धा अल्मोड़ा के एक मध्यवर्गीय परिवार से आती थी.

मनोज शर्मा जानते थे कि श्रद्धा एक ‘टी लवर’ है. वह पहाड़ी इलाके की रहने वाली है और इसीलिए चाय में उस का दिल बस्ता है. अत: मनोज ने उस के लिए चाय बनानी सीखी और अकसर उस के लिए चाय बना कर उसे इंप्रैस करने की कोशिशें करते.

एक दिन उन्होंने अपने दिल की बात उस के सामने रख दी. उन्होंने उस से इस बात का वादा किया कि अगर वह उन का प्रेम प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है और उन का साथ देती है तो वे पूरी दुनिया पलट देंगे. श्रद्धा जोशी ने आईपीएस मनोज शर्मा से न तो उन की हैसियत देख कर प्यार किया था और न ही उन का चेहरा देख कर. उन्हें मनोज शर्मा के गुणों से, उन की ईमानदारी से और उन के जनून से प्यार था. बाद में मनोज ने खूब मेहनत की और अपनी कही हर बात को सच कर दिखाया. यूपीएससी ऐग्जाम क्लीयर करने के बाद मनोज कुमार शर्मा 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर से आईपीएस बने.

मनोज और श्रद्धा की लव स्टोरी में कई बाधाएं थीं लेकिन उन सब के बावजूद इन दोनों ने कभी एकदूसरे का साथ नहीं छोड़ा जिस का परिणाम यह था कि दोनों के परिवार उन के रिश्ते के लिए मान गए और ये दोनों शादी के अटूट बंधन में बंध गए.

इस तरह यह एक छोटी सी प्रेम कहानी है जिस में नायक के पास पैसों का अभाव है फिर भी दिल से किए गए अपने छोटेछोटे प्रयासों के सहारे वह अपना प्यार उम्रभर के लिए पा लेता है.  इसीलिए कहते हैं रिश्ता निभाने के लिए पैसे नहीं सच्ची भावना की जरूरत होती है.

क्या है प्यार

प्यार क्या है? कुछ खूबसूरत पल साथ बिताना, किसी के लिए जबरदस्त आकर्षण महसूस करना, किसी पर पूरा भरोसा करना, उस का साथ देना, किसी भी हालत में उस का हाथ न छोड़ना, किसी को खुद से ज्यादा अहमियत देना, उस के साथ पूरी उम्र गुजारने के सपने देखना, उसे तकलीफ में देख कर दर्द महसूस करना, उसे हर मुसीबत से बचाना और उसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना इन्हीं एहसासों को तो प्यार कहते हैं.

प्यार एक ऐसा एहसास है जिस से हर परिस्थिति में इंसान को सुकून पहुंचता है. प्यार में डूबे इंसान के लिए इस दुनिया में अगर कुछ हसीन और दिलचस्प होता है तो वह है सिर्फ उस का महबूब. इस की कैफियत ही ऐसी है जो हर किसी को दीवाना बना देती है. जब प्यार की ताकत आप के साथ है तो जमाने की परवाह या पैसों की कमी भी कोई खलल नहीं डाल पाती.

फिल्मी दुनिया में भी ऐसे कई सितारे हैं जिन्होंने जाति, धर्म या दौलत से परे हो कर बस रिश्ता निभाया. बौलीवुड के शाहरुख खान भी उन्हीं में से एक हैं. शाहरुख खान और गौरी खान की जोड़ी बौलीवुड इंडस्ट्री में सब से सफल जोडि़यों में एक है. उन्होंने अपने रिश्ते को निभाने के लिए कोई कोरकसर नहीं छोड़ी जबकि उस समय उन के पास इतनी दौलत भी नहीं थी. गौरी को अपनी जिंदगी में लाने के लिए शाहरुख को खूब पापड़ बेलने पड़े. शाहरुख ने गौरी से उस समय शादी की थी जब वे बौलीवुड इंडस्ट्री में नए आए थे और यहां अपने पांव जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

गौरी के प्यार में पड़े थे शाहरुख

शाहरुख की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ का एक डायलौग है कि अगर किसी चीज को पूरी शिद्दत के साथ चाहो तो पूरी कायनात आप को उस से मिलाने की कोशिश में लग जाती है. यही बात शाहरुख के निजी जीवन में भी लागू होती है. गौरी को अपना बनाने के लिए शाहरुख ने पूरी शिद्दत से कोशिश की थी. जब शाहरुख खान गौरी के प्यार में पड़े थे तो उन की उम्र 18 साल थी और गौरी की उम्र 14 साल थी.

बात 1984 की है जब दिल्ली के पंचशील नगर के एक क्लब में पार्टी चल रही थी, जिस में शाहरुख की नजर गौरी पर पड़ी. उस के बाद वे उन्हें बस देखते ही रह गए, गौरी को देखते ही पहली नजर में शाहरुख को प्यार हो गया. बाद में शाहरुख गौरी का फोन नंबर पाने में सफल हुए और दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई.

दोनों एकदूसरे के करीब आने लगे. साथ में समय बिताना उन्हें अच्छा लगने लगा. उन्होंने लौंग ड्राइव पर भी जाना शुरू कर दिया. एक दिन शाहरुख ने गौरी को प्रपोज भी कर दिया. उस समय शाहरुख के पास न तो ज्यादा काम था और न ही पैसा. कहा जाता है कि शाहरुख ने अपनी शादी के वक्त जो शूट पहना था उसे उन्होंने अपनी फिल्म ‘राजू बन गया जैंटलमैन’ के सैट से भाड़े पर लिया था. शाहरुख ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शादी के वक्त वे काफी गरीब थे. गौरी भी मिडल क्लास फैमिली से आती थीं. हर किसी की तरह उन्होंने भी गौरी से कई वादे किए और कहा कि शादी के बाद मैं उन्हें पैरिस घुमाने के लिए ले जाऊंगा और ऐफिल टावर दिखाऊंगा. लेकिन उस समय शाहरुख के पास उन्हें घुमाने के लिए इतने पैसे नहीं थे कि वे टिकट खरीद पाते. मगर जज्बात जरूर सच्चे थे. यही सचाई गौरी को पसंद थी.

जब दोनों एकदूसरे के प्यार में पड़े तब गौरी शाहरुख के फिल्मी कैरियर को ले कर थोड़ा असमंजस की स्थिति में थीं. साथ ही उन्हें शाहरुख पर भरोसा भी था कि वे सफलता की ऊंचाइयों पर जरूर पहुंचेंगे. शादी से पहले उन के रिश्ते को कई उतारचढ़ाव का भी सामना करना पड़ा लेकिन इस से उन के प्यार पर कोई असर नहीं पड़ा. दोनों का प्यार आज तक कम नहीं हुआ.

प्यार ऐसा ही होता है. प्यार की भाषा आंखों से पढ़ी जाती है, दिल की बढ़ती धड़कनों से महसूस की जाती है और अपनेपन के स्पर्श से इस की सचाई का विश्वास दिलाया जाता है. जबान या पैसों की जरूरत ही नहीं होती. जज्बात सीधा दिल तक पहुंचते हैं. प्यार का एहसास दिलाने के लिए इंसान का बहुत धनी होना जरूरी नहीं. कम पैसों में भी इस की गरमाहट महसूस हो जाती है.

जरूरी नहीं कि मैक्डोनाल्ड या कैफे कैफिटेरिया में बैठ कर 2-3 सौ की कौफी ही पी जाए. गली के कौर्नर में लगी रेहड़ी से 5-10 रुपए की चाय पीते हुए भी आंखों से वही प्यार बरसता है और भीगे मौसम में अपने प्रिय के साथ गरम चाय की चुसकियों में भी वही आनंद आता है. अगर आप अपने घर में हैं और आप का साथी अपने हाथों से गरम चाय और पकौड़े बना कर लाए तो उस में जो प्यार भरा स्वाद होगा वह बड़े से बड़े रैस्टोरैंट में हजारों खर्च कर के भी नहीं मिल सकता.

प्यार के लिए जज्बात अहम

प्यार के लिए पैसे नहीं जज्बात अहम हैं. आप किसी के लिए क्या फील करते हैं, उस का कितना साथ देते हैं, उसे कैसे प्रोटैक्ट करते हैं, उसे कितना खुश रखते हैं, उस की छोटीबड़ी खुशियों की कितनी परवाह करते हैं, उस के बारे में कितना सोचते हैं. बस प्यार जताने का तरीका मालूम होना चाहिए.

चाय हो या कौफी अगर बिल आप दे रहे हैं, घर हो या होस्टल उन के लिए आप नाश्ता बना कर ला रहे हैं, भीड़ हो या तनहाई आप उन्हें सब से अलग महसूस करा रहे हैं, अमीर हों या गरीब आप अपना सबकुछ उन को देने को तैयार हैं, रात हो या दिन आप हर समय उन के लिए मौजूद हैं और जमाना हां कहे या न कहे आप उन के साथ ही जीने की तमन्ना रखते हैं तो फिर किसी को और क्या चाहिए? प्यार तो बस इन्हीं छोटीछोटी बातों में ?ालकता है.

जरा कल्पना कीजिए किसी छोटे से रिकशे या औटो में आप दोनों एकदूसरे का हाथ थामे बैठे बातें करने में मशगूल अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हों वह ज्यादा रोमांटिक है या फिर एक बड़ी सी गाड़ी में वह आगे और आप पीछे की सीट पर मोबाइल की स्क्रीन स्क्रौल कर रही हों वह रोमांटिक है? जाहिर है प्यार हो तो कोई भी सस्ता से सस्ता वाहन और कोई भी पथरीला रास्ता खूबसूरत हो जाता है. मगर इस के बिना केवल मन में सूनापन और आपस में बेगानापन ही आता है. भले ही आप के पास कितनी बड़ी गाड़ी क्यों न हो.

कुछ बातें जो किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं:

भावनात्मक जुड़ाव: भावनात्मक जुड़ाव बनाना एक नई भाषा सीखने जैसा है जिसे आप दिल की भाषा भी कह सकते हैं. एक मजबूत रिश्ते में पार्टनर एकदूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं. वे खुद को और ज्यादा सुरक्षित मानने लगते हैं जहां प्रत्येक व्यक्ति अपनी भावनाओं को खुल कर व्यक्त कर सकता है और इस बात पर उसे भरोसा होता है कि सामने वाला उसे सम?ोगा और स्वीकार करेगा. यह भावनात्मक जुड़ाव रिश्ते को पोषित करता है.

रिश्ते में विश्वास: 2 इंसान जब आपस में मिलते हैं तो उन के बीच विश्वास ही ऐसी डोर होती है जो उन को आपस में जोड़े रखती है. इसी से रिश्ते में भरोसा कायम होता है और यह एहसास होता है कि हालात कैसे भी हों सामने वाला बदलेगा नहीं. इस का संबंध पैसों से नहीं बल्कि केवल व्यक्ति की फितरत से होता है. ऐसे कितने ही अच्छे से अच्छे पैसे वाले लोग हैं जो रिश्तों में विश्वास कायम नहीं रख सके और उन्हें तलाक की त्रासदी से गुजरना पड़ा. सुपर स्टार ऋतिक को ही लीजिए कहीं न कहीं उन के और सुजैन के रिश्ते में विश्वास की ही कमी थी जो उन्हें अलग होना पड़ा.

आपसी समझ: परिस्थिति कैसी भी हो आप को अपने पार्टनर को सम?ाना पड़ेगा. उस के व्यवहार में कोई बदलाव आया है तो उस की कोई वजह होगी. वह आप से कुछ नहीं कह रहा है मगर कोई बात उस के मन में हो सकती है. उसे कोई परेशानी है तो आप ही अपनी सम?ा से उस का निदान खोज सकते हैं. जो इंसान दिल से रिश्ते निभाते हैं वे पार्टनर के कहने से पहले उस की दिल की बातें सम?ा लेते हैं.

कंप्रोमाइज करने का जज्बा: रिश्ते तभी जिंदगीभर चलते हैं जब पार्टनर एकदूसरे के लिए कंप्रोमाइज करने से हिचकते नहीं. कई मौके ऐसे आते हैं जब आप को सम?ाते करने होते हैं. मसलन, प्रैगनैंसी के समय और उस के बाद पत्नी जौब छोड़ती है या छुट्टी लेती है. उस समय पति भी कंप्रोमाइज करते हुए 2-3 महीने की छुट्टी ले सकते हैं ताकि पत्नी को जौब न छोड़नी पड़े. इसी तरह अगर किसी पार्टनर का रिश्तेदार बीमार है तो दूसरे को इस दरम्यान सम?ाते करने चाहिए. पार्टनर के साथ सही रिश्ता बनाए रखने के लिए उस की पसंदनापसंद के अनुसार खुद को ढालना भी सम?ाता ही है.

हर हालत में मुहब्बत: जिंदगी में कब क्या हो इस का भरोसा नहीं होता. पार्टनर बीमार हो जाए, चोट लगने से चेहरा खराब हो जाए, उसकी नौकरी छूट जाए या कोई और समस्या आ जाए तो ऐसे में पार्टनर के साथ हिम्मत से खड़े रहने और साथ निभाने को प्यार कहते हैं. हालात कुछ भी हों मुहब्बत कम न हो. तभी पार्टनर भी आप के साथ उम्रभर के मजबूत रिश्ते से बंध जाएगा. बुरे दिनों में दिया गया यह साथ अच्छे दिनों में रिश्ते को अधिक सुकून और कौन्फिडैंस देता है.

दूरी से भी प्यार में कमी नहीं: कई दफा जौब के सिलसिले में पार्टनर्स के बीच दूरी आ जाती है. यह भी संभव है कि उन्हें अलगअलग शहरों में रहना पड़े. ऐसे में भी प्यार की कशिश कम न हो इस के लिए लगातार संपर्क में रहना और बेवफाई का विचार भी दिल में नहीं आने देना चाहिए क्योंकि आप दूर हों या पास कोई बात छिपती नहीं है.आजकल वैसे भी फोन और व्हाट्सऐप की दुनिया में कनैक्टेड रहना बहुत आसान है.

एक जनून जरूरी: प्यार जनून का ही दूसरा नाम है. इसलिए रिश्ते निभाने हैं तो अपनी चाहत को जनून में तबदील करें और पार्टनर की खातिर किसी से भी लड़ने को तैयार रहें. हमेशा अपने रिश्ते में जोश को जगाए रखने की जरूरत है. दीर्घकालिक रिश्ते ऐसे ही नहीं बन जाते. इस के लिए जनून, उत्साह और समर्पण की आवश्यकता होती है.

एक ही मंजिल हो: जब 2 लोग जीवन में एक ही चीज चाहते हैं यानी उन के जीने का मकसद और मंजिल समान होती है तो रिश्ते निभाने आसान हो जाते हैं. उन की सोच और चाहतें समान होती हैं.

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