हर महिला चाहती है कि वो सबसे खूबसूरत दिखे. इसके लिए वो पहनावे से लेकर ज्वैलरी, मेकअप हर चीज का खास खयाल रखती हैं. महिलाओं का लोकप्रिय त्योहार हरियाली तीज मनाया जा रहा है. इस फेस्टिवल में महिलाएं खूब सजती हैं. इसमे पारंपरिक साङियां पहनने का खास महत्व है. इस त्यौहार में लाह लहठी पहनने का भी चलन है. आइए जानते हैं, लाह इतना क्यों है पौपुलर?

बिहार से लहठी का है खास कनैक्शन

लाह की चूड़ियों को लहठी कहा जाता है. बिहार में शादियों या किसी त्यौहार के दौरान शादीशुदा महिलाएं लाह की लहठी पहनती हैं. ये लहठी बाजार में रंगबिरंगी और अलगअलग डिजाइनों में मिलती हैं. यह लहठी देशभर मे प्रसिद्ध है. वैसे तो बिहार के हर शहर में यह लहठी मिलती है पर मुजफ्फरपुर की लहठी ज्यादा मशहूर है. लाह की चमक काफी तेज होती है. इसकी लहठियां चमकिली गुलाबी, हरा, लाल, और भी कई रंगों में मिलती हैं. इसकी चमक और डिजाइन को शायद ही किसी महिला को पसंद न आए.

इस लहठी की कई वैरायटिज मिलती हैं, इसमें दुल्हन लहठी, राज बड़ा सेट, कुन्दन कड़ी दुल्हन सेट, स्पेशल दुल्हन लहठी ट्रैंड में है. इन लहठियों पर फोटो और पतिपत्नी के नाम भी लिखवाए जाते हैं. महिलाएं अपने पसंद की डिजाइन की भी लहठी बनवाने के लिए और्डर देती हैं.

इन लहठियों की ये हैं कीमत

ये लहठियांं 100 रुपये से लेकर हजारों की कीमत में बिकती हैं. मुजफ्फरपुर के इस्लामपुर मार्केट में लाह की लहठियों का बड़ा बिजनैस है. कहा जाता है कि यहां की लहठियां बौलीवुड एक्ट्रैस भी पहन चुकी हैं. यहां के कारीगर लहठियों पर तरहतरह के डिजाइन तैयार करते हैं. झारखंड और बंगाल से कच्चा मैटेरियल आता है, जिससे लहठी तैयार की जाती है.

सिर्फ देश ही नहीं विदेशो में भी ये लहठियां मशहूर हैं. बाहर से आए लोग भी इन लहठियों को जरूर खरीदते हैं. सावन या अन्य किसी फैस्टिवल में इसकी डिमांड ज्यादा बढ़ जाती है. इस मार्केट में इतनी भीड़ होती है कि जो लोग नहीं पहुंच पाते हैं वो औनलाइन आर्डर देते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हर साल मुजफ्फरपुर के लहठी मार्केट में दोतीन करोड़ से अधिक का कारोबार होता है. लहठी की इतनी डिमांड है कि यहां से अयोध्या भी लाह की लहठियां भेजवाई जाती है.

राजस्थान में  बनती हैं लाख की लहठी

राजस्थान में भी ये लहठी बनाई जाती है, जिसे लाख की लहठी कहते हैं. हालांकि लाह और लाख की लहठी में ज्यादा कोई अंतर नहीं है. कारीगरों के अनुसार, बिहार और राजस्थान के लहठियों में सिर्फ डिजाइन का फर्क है. बिहार के भी कई कारिगर राजस्थान में बनने वाले लाख के लहठियों को डिजाइन करने के लिए जाते हैं.

क्या आप जानते हैं लाख की लहठी कैसे बनाई जाती है

लोगों में ये अफवाहें हैं कि लाख की लहठी पेड़ों से बनाई जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है. लाख कीड़ों से निकलने वाला एक पदार्थ है, ये कीड़ें पेड़ों पर पाए जाते हैं. खासकर पीपल, गूलर, पलाश जैसे पेड़ों की टहनियों पर ये कीड़े पाए जाते हैं और इन्हीं से लाख बनता है. क्या आप जानते हैं, जब एक बार लाख पिघल जाता है, तो  इसका रंग लाल होता है. लहठी बनाने के लिए इसे और सख्त करना पड़ता है. इसमें टाइटैनियम, वैक्स और अलगअलग रंगों को मिलाया जाता है ताकि चूडियों को सही आकार मिल सके. चूड़ियों को साइज देते समय लाख को गर्म किया जाता है, इसे डिजाइन देने के लिए मोटी नग और पत्थर को चिपकाया जाता है.

हालांकि ये लहठियां ज्यादा दिनों तक नहीं टिकती हैं. ये पिचक जाती हैं.  पानी के संपर्क में आने से ये आसानी से टूटने लगती हैं, ये लहठियां चूल्हे या आग के पास भी रहने से पिघल सकती हैं. जिन महिलाओं का सेंसिटिव स्किन होता है, उनके लिए ये लहठियां नुकसानदायक होती हैं. अगर आपको पहले से स्किन एलर्जी की समस्या है, तो लाह की लहठियां पहनने से बचें.

लाख कहने का क्या है कारण

इसे लाख इसलिए भी कहा जाता है कि ये कीड़े लाखों की संख्या में टहनियों पर बैठते हैं. इस नाम के पीछे बस इसकी संख्या है और कोई अन्य कारण नहीं है.

Pic Credit: Instagram

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...