अकसर गले में हार, हाथों में चूड़ी और माथे पर लगी बिंदी को महिला के साथ जोड़ कर देखा जाता है. गैटअप जरूर किसी जैंडर की आइडैंटिटी को दर्शाता हो लेकिन काम नहीं. इसी बात को साबित किया है एक ऐसे शख्स ने जो बौलीवुड के गलियारे का सब से यंग और चहेता ट्रांस जर्नलिस्ट है. जी हां, हम बात कर रहे हैं आदित्य राणा की, जोकि एक ट्रांसजैंडर जर्नलिस्ट है.
हाल ही में बिग बौस ओटीटी 3 में मीडिया राउंड के दौरान रैपर नैजी और एक जर्नलिस्ट के बीच मामला गरम होता देखा गया. यह मामला सोशल मीडिया में खूब गरमाया. देखने को मिला कि नैजी एक जर्नलिस्ट पर भड़क रहा था. जिस जर्नलिस्ट पर नैजी भड़का वह आदित्य राणा था.
आदित्य ने बहुत कम समय में अपनी खुद की एक अलग पहचान बना ली है, जो कि एक ट्रांसजैंडर जर्नलिस्ट है. अकसर वह गले में बड़ेबड़े औक्साइड हार, हाथों में बैंगल्स और नाक में लौंग डाले नजर आता है. वह अपने इसी लुक में अपने सारे इंटरव्यूज लेता है. उस के बात करने का स्टाइल लड़कियों जैसा ही है और यही उसे बाकियों से खास बनाता है.
कैरियर की शुरुआत
आदित्य ने अपने कैरियर की शुरुआत एक लोकल न्यूजपेपर में रिपोर्टर के रूप में की थी. वह उस में क्राइम रिपोर्टर था. इस के बाद उस ने चंडीगढ़ में मौर्निंग का रेडियो शो किया. 2 साल से भी कम समय में मायानगरी मुंबई में आदित्य ने अपनी एक अलग पहचान बना ली है. वह बौलीवुड गलियारे का सब से फेमस जर्नलिस्ट बन गया है, वह भी बहुत कम समय में. इंस्टाग्राम पर उस का अकाउंट ‘आदित्य राणा उर्फ ए से आदि’ नाम से है जिस पर करीब 24 हजार फौलोअर्स हैं.
नामीगिरामी शख्सियत के लिए इंटरव्यू
बात करें अगर आदित्य के कैरियर की तो आदित्य ने अपने छोटे से कैरियर में कई नामीगिरामी शख्सियतों के इंटरव्यू लिए हैं. उन में सुष्मिता सेन, मनीषा कोइराला, विद्या बालन, अमीषा पटेल, आयुष्मान खुराना, भूमि पेडनेकर, राजकुमार राव, सोनम कपूर जैसे बड़ेबड़े स्टार्स शामिल हैं. वह फेमस सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और बिग बौस ओटीटी 2 के विनर एल्विश यादव का भी इंटरव्यू कर चुका है.
इस के अलावा उस ने पूर्व कपड़ा मंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी का भी इंटरव्यू किया है, जिस में उस ने स्मृति से राजनीति और ट्रांसजैंडर से जुड़े सवालजवाब किए. आदित्य ने ट्रांजैंडर कम्युनिटी से जुड़े लोग जैसे गौरी सावंत, जोकि एक फेमस ट्रांसजैंडर एक्टिविस्ट हैं, ऋतुपर्णा बोरा, जो ट्रांसजैंडर अधिकारों की एक प्रमुख आवाज है, के भी इंटरव्यू किए हैं और उन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की. आदित्य एक ट्रांसजैंडर टीचर मानवी बंधोपाध्याय से भी बातचीत कर चुका है.
फिल्मी ज्ञान से जुड़े
आदित्य ‘फिल्मी ज्ञान’ का एडिटर और होस्ट दोनों है. वह अपने यूनीक स्टाइल के लिए भी जाना जाता है. आदित्य जर्नलिस्ट होने के साथसाथ एक कत्थक डांसर भी है. उसे सैलेब्स सब से ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि वह पत्रकारिता और काम करने का अपना अलग अंदाज रखता है.
आदित्य ने अपने मंच और काबिलीयत का इस्तेमाल एलजीबीटीक्यू समुदाय को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उजागर करने के लिए किया. भेदभाव और रूढि़वादी सोच का सामना करने के बावजूद वह डटा रहा, सोशल मीडिया पर मिलने वाली ट्रोलिंग इस बात की गवाह है. उस की इस भावना ने ही उसे अपने लक्ष्य से डगमागाने नहीं दिया.
समाज कम्युनिटी को करता है अनदेखा
भारतीय समाज में ट्रांसजैंडर को एक अलग ही हीनभावना से देखा जाता है. हालांकि यह भावना अब थोड़ीथोड़ी बदल रही है लेकिन फिर भी इन के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की अनदेखी नहीं की जा सकती. होता यह कि ट्रांसजैंडर खुले दिमाग या कहें ओपन माइंडेड होते हैं. ये वही करते हैं जो इन्हें सही लगता है. ये धर्मकर्म से अलग हो कर सोचते हैं. वहीं साधारण लोगों के जीवन में धर्म तय करता है कि क्या करना है और क्या नहीं. जबकि ट्रांसजैंडर में ऐसा कुछ नहीं है, वे अपनी मरजी के खुद मालिक होते हैं और इसलिए ही रूढि़वादी समाज उन का बहिष्कार करता है.
यह समाज एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी के साथ हमेशा ही भेदभाव करता आया है. उन्हें समाज के बाकी लोगों की तरह न देख कर एक कलंक के रूप में देखा जाता है. इस कम्युनिटी के लोगों के साथ समाज के रूढि़वादी और छोटी सोच वाले दकियानूसी लोगों ने जीवन के हर पड़ाव पर दुर्व्यवहार किया है.
इस का एक उदाहरण हाल ही में प्रियांशु यादव की खुदकुशी है. ट्रोलर्स ने प्रियांशु को इतना ट्रोल किया कि उस ने अपनी जिंदगी को ही खत्म कर लिया.
आदित्य ने भी एक इंटरव्यू में अपने साथ हुई एक घटना का जिक्र करते हुए बताया, ‘‘मेरे स्कूल की 12वीं क्लास में पढ़ने वाले एक लड़के ने मुझे वाशरूम में लौक कर दिया था. मैं वहां कई घंटों तक बंद रहा था.’’ वह कहता है कि आप को अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होती है.
बनना होगा बैस्ट
आदित्य ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि जर्नलिस्ट बनना कोई आसान काम नहीं है, खासकर, आप जब एक ट्रांसजैंडर हैं. आप को गैस्ट के इंटरव्यू के लिए कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता है. आदित्य ने अपना एक एक्स्पीरियंस बताते हुए कहा, ‘‘मेरे साथ एक बार ऐसा भी हुआ है कि एक इंटरव्यू लेने के लिए मुझे 9 घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ा. करीब 2 घंटे तो वाशरूम में ही बैठा रहा. 9 घंटे का समय काटना बिलकुल भी आसान नहीं था. उस समय मैं बहुत इरिटेट हो चुका था. लेकिन जब इंटरव्यू अच्छा हो गया तो मैं सब भूल गया. मुझे लगा कि मेरा इंतजार करना सफल रहा.’’
आदित्य अपने अनुभव के आधार पर कहता है कि अगर आप को लोगों के सवालों से बचना है तो आप को अपने काम में औसत नहीं रहना होगा बल्कि आप को अपने काम में बैस्ट बनना होगा. आप को अपने काम में एक्स्ट्रा देना होगा. तभी आप को पहचान मिलेगी, तभी आप लोगों को मुंहतोड़ जवाब दे पाएंगे.