Payal Kapadia : पायल कपाडि़या का जन्म उस मुंबई में हुआ, जो बांबे हुआ करता था. 1980 के दशक में जन्मी कपाडि़या आर्थिक उदारीकरण के दौर में बड़ी हुईं. यह वह वक्त था जब देश और खुद उन का शहर मुंबई कई परिवर्तनों से गुजर रहे थे. इस के बाद तकनीक का आगाज हुआ और हर चीज पर मानो पंख लग गए. इस के बावजूद कपाडि़या के घर में तेजी से अधिक ठहराव को महत्त्व दिया जाता था और इसी महौल में कपाडि़या के सपनों ने आकार लिया. उन के मातापिता ने उन्हें जिज्ञासा की अहमियत सिखाई, अपने सपनों को साकार करने का हौसला दिया और कला के विभिन्न स्वरूपों को अपनाने की छूट दी. यह सीख उन के व्यक्तित्व में आज भी बारीकी से झलकती है.
‘‘मुझे करैक्टर और स्थानिकता आज भी अपनी ओर खींचते हैं,’’ कपाडि़या ने मुझे बताया. हम दोनों दक्षिण मुंबई के एक ईरानी रैस्टोरैंट कैफे डे ला पैक्स में नाश्ता करते हुए बात कर रहे थे. कपाडि़या का घर वहां से ज्यादा दूर नहीं था.
कपाडि़या की मां नलिनी मालिनी जानीमानी कलाकार हैं, जिन का सिंधी परिवार बंटवारे के वक्त कराची से मुंबई आ कर बसा था. मां मालिनी का प्रभाव कपाडि़या पर बहुत छोटी उम्र से ही पड़ने लगा, ‘‘एक कलाकार मां का होना सौभाग्य है,’’ कपाडि़यां मानती हैं. यहां तक कि कांस फिल्म महोत्सव में ग्रैंड प्रिक्स पुरस्कार से सम्मानित उन की फिल्म ‘आल वी इमेजिन एज लाइट’ उन की मां के सालों पहले के एक प्रयोगात्मक काम से प्रेरित है, जो कश्मीरीअमेरिकी कवि आगा शाहिद अली से प्रभावित था.
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