नवजातों के लिए गर्मी का मौसम बेहद असहनशील होता है, क्योंकि पहली बार वे ऐसे माहौल से रूबरू होते हैं. तेज आवाज में और लगातार रोने, खूब पसीना निकलने, बाल गीले होने, लाल गाल और तेज सांस लेने जैसे लक्षण इस बात के संकेत हैं कि बच्चा अत्यधिक गर्मी से परेशान हो रहा है. ओवर हीटिंग गर्मी में डायरिया का प्रत्यक्ष कारण होता है, जो कई नवजातों के लिए घातक भी हो सकता है.

  1. धूप से बचाएं

गर्मी के मौसम में नवजातों को धूप की सीधी किरणों से दूर रखें. 6 माह से कम उम्र के नवजातों की त्वचा में सूर्य की नुकसानदेह किरणों से सुरक्षा के लिए बहुत कम मैलानिन होता है. मैलानिन ऐसा पिगमैंट होता है, जो त्वचा, आंखों और बालों को रंगत प्रदान करता है. लिहाजा, मैलानिन के अभाव में सूर्य की किरणें त्वचा की कोशिकाओं को स्थाई रूप से भी क्षतिग्रस्त कर सकती हैं.

2. तेल मालिश करें

शरीर की मालिश बच्चे के विकास में मददगार होती है. उचित मालिश से बच्चे के टिशू और मांसपेशियां खुलती हैं और इस से उस का सही विकास होता है. बच्चे की नाजुक त्वचा को सब से अच्छी तरह सूट करने वाले तेल का चयन जहां अनिवार्य है, वहीं यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस से चिपचिपाहट न हो. तेल की जगह मसाजिंग लोशन और क्रीम भी इस्तेमाल की जा सकती है. नहलाते समय इस की पूरी मात्रा बच्चे के शरीर से धुल जाए, क्योंकि तेल बच्चे की स्वेदग्रंथि को अवरुद्ध कर सकता है.

3. टब में स्नान कराएं

गर्मी से छुटकारा पाने का सर्वोत्तम उपाय है स्नान कराना. वैसे हर बार स्नान कराने से बेहतर होता है कि बच्चे को गीले कपड़े से पोंछती रहें. लेकिन जब बच्चा तेज गर्मी के कारण व्याकुल हो रहा हो, तो उसे भरे टब में स्नान कराएं. इस में पानी का तापमान कुनकुना रहना चाहिए.

4. टैल्कम पाउडर

टब में नहलाने के बाद बच्चे के शरीर पर टैल्कम पाउडर लगाना अच्छा माना जाता है. जहां कुछ बच्चों को हीट रैश कम करने में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल उपयोगी होता है, वहीं कुछ में इस से स्थिति और बिगड़ जाती है. अत: अपनी हथेली पर थोड़ाथोड़ा पाउडर ले कर उस की त्वचा पर लगाएं, उस पर बुरकें नहीं.

5. नियंत्रित तापमान

बच्चे को 16 से 20 डिग्री तापमान के अंदर ही रखें. उस के कमरे को दिन में ठंडा रखने के लिए परदे लगा कर कमरे में अंधेरा करें. पंखा औन रखें. बच्चे को एअरकंडीशनर के सीधे संपर्क में कभी न रखें, क्योंकि इस से उसे जुकाम भी हो सकता है.

6. उपयुक्त पोशाक

मां अकसर दुविधा में रहती हैं कि बच्चे को कैसी पोशाक पहनाई जाए. मिथक के अनुसार नवजातों को खूब सारे गरम कपड़ों में रखना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि गर्भ से बाहर का तापमान अंदर के तापमान से ठंडा रहता है. लेकिन गर्मी के मौसम में उन के कपड़ों की परत कम करते हुए उन्हें हलके कपड़ों में रख सकती हैं. उन्हें ढीलेढाले सूती वस्त्र पहनाएं ताकि उन की त्वचा में हवा का प्रवाह बना रहे और वे आराम महसूस कर सकें. सूती वस्त्र बच्चों के लिए लाभकारी होते हैं, क्योंकि इन में हवा भी अच्छी तरह प्रवेश हो जाती है और ये पसीना भी सोखने की क्षमता रखते हैं. बच्चे को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए धूप में बाहर ले जाते समय उसे हैट जरूर पहनाएं.

– डा. कृष्ण यादव, पारस ब्लिस हौस्पिटल, पंचकूला 

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