हम सभी जानते हैं कि बीमारियां कोई सूचना देकर नहीं आती हैं, इसलिए समझदार लोग समय पर ही अपने लिए एक अच्छी हेल्थ पौलिसी खरीद लेते हैं. वहीं अगर आप किसी खास बीमारी से ग्रसित हैं तो भी बाजार में आपके लिए तरह तरह की पौलिसियां मौजूद हैं. एक्सपर्ट मानते हैं कि हमें अपने लिए हेल्थ पौलिसी का चुनाव काफी सोच समझकर करना चाहिए. हम अपनी इस खबर में आपको बताने जा रहे हैं कि हेल्थ पौलिसी की खरीद के दौरान आपको किन सावधानियों को बरतना चाहिए.
एक्सपर्ट की राय
जानकारो का मानना है कि एक अच्छी हेल्थ पौलिसी खरीदने से पहले सबसे पहले इसकी कवरेज जान लें. साथ ही यह सुनिश्चित कर लें कि इसके दायरे में कौन-कौन सी बीमारियां और बेनिफिट्स नहीं आते हैं. इसके पैनल में जो भी अस्पताल हैं उनकी टौप लिमिट क्या है, उसमें डौक्टर के विजिट के चार्जेस, आईसीयू में भर्ती होने के घंटों पर कोई लिमिट तो नहीं है. यह भी जांच कर लें कि किन-किन स्थितियों में पौलिसी धारक क्लेम का हकदार नहीं होता है.
पहले से चल रही बीमारियां
इंश्योरर ऐसा मानकर चलते हैं कि अगर कोई बड़ी उम्र में हेल्थ पौलिसी खरीद रहा है तो जरूर कोई बीमारी होगी. अपने जोखिम को कम करने के लिए वे प्री एग्जिंस्टिंग क्लौज में पौलिसी को डाल देते हैं. इसमें आमतौर पर तीन से चार साल तक का वेटिंग पीरियड होता है. इसलिए हमेशा कोशिश करें कि ऐसी पौलिसी का चयन करें जिसमें वेटिंग पीरियड कम हो, फिर चाहे उसके लिए आपको ज्यादा प्रीमियम ही क्यों न देना पड़ें.
आंशिक भुगतान
इसे को-पेमेंट भी कहा जाता है. यह वो राशि होती है जो पौलिसी धारक हौस्पिटालाइजेशन के दौरान अदा करता है, शेष क्लेम की गई राशि इंश्योरर भुगतान करता है. आपको बता दें कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में को-पेमेंट अनिवार्य होती है. हालांकि, कुछ इंश्योरर को-पेमेंट की राशि फिक्स्ड रखते हैं. जबकि कुछ एक रेंज निर्धारित कर देते हैं. यह 10 से 20 फीसद के बीच होती है. ऐसे प्लान को खरीदें जिसमें को-पेमेंट का क्लौज न हो.
अस्पताल के किराये की सीमा
कुछ हेल्थ प्लान में सीमित किराये की कैप लगाई होती है. पौलिसी के तहत अस्पताल के कमरे की निश्चित राशि तय होती है. अगर मरीज इससे ज्यादा का कमरा लेता है तो इंश्योरर मरीज से अस्पताल के कुल बिल इस अतिरिक्त राशि को चार्ज करता है. उदाहरण के तौर पर अगर कमरे का किराया 4000 रुपये प्रतिदिन है और मरीज 5000 रुपये प्रतिदिन का कमरा लेता है. तो रुम के किराये में 20 फीसद का इजाफा हो गया. अब अगर अस्पताल का कुल बिल 50,000 रुपये है तो इंश्योरर यह 20 फीसद का अतिरिक्त चार्ज कुल बिल में लगा देगा. इससे मरीज को 2000 रुपये की जगह 10,000 रुपये देने पड़े जाते हैं. इसलिए ऐसा प्लान खरीदें जिसमें अस्पताल के कमरे के किराये पर कोई सीमा नहीं है.
रेस्टोरेशन बेनिफिट
हर एक हेल्थ प्लान में एक सम एश्योर्ड लिमिट होती है जो कि पौलिसी धारक के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है. इस सम एश्योर्ड की एक साल में क्लेम करने की सीमा होती है. यदि सम एश्योर्ड से ज्यादा का खर्चा आता है तो पौलिसी धारक को खुद देना पड़ता है. लेकिन अगर आपने हेल्थ प्लान रेटोरेशन बेनिफिट के साथ लिया हुआ है तो इंश्योरर सम एश्योर्ड को रीस्टोर करके रख देगा ताकि अगर उसी साल में फिर से पौलिसी धारक बीमार होता है तो सम एश्योर्ड मिल जाए.
जानकारी के लिए बता दें कि रेटोरेशन बेनिफिट केवल उस स्थिति में मिलेगा जब एक ही साल में अलग अलग बीमारी का ट्रीटमेंट हुआ हो. एक साल के भीतर एक ही बीमारी के लिए सम एश्योर्ड नहीं मिलता. उदाहरण के तौर पर आपकी पांच लाख की पौलिसी है. आप बीमार होते हो और दो लाख रुपये का इस्तेमाल कर लेते हो. अब अगर आप उसी साल में फिर से बीमार पड़ते हो तो इंश्योरर वापस सम एश्योर्ड को बढ़ाकर पांच लाख कर देगा.
अस्पतालों का नेटवर्क
हेल्थ पौलिसी डौक्यूमेंट में अस्पतालों के पास उनके कोऔडिनेटर्स की एक लिस्ट होती है. पौलिसीधारक को इस लिस्ट को ध्यान से पढ़ना चाहिए. साथ ही यह देखना चाहिए कि आपके घर के आसपास कौन कौन से अस्पताल हैं. अगर आप ऐसे किसी अस्पताल में भर्ती होते हों जो कि लिस्ट में नहीं है तो मरीज को कैशलैस ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा. अस्पताल का कुल बिल मरीज को अपनी जेब से भरना होगा. उसके बाद उसे यह राशि रींबर्स की जाएगी.