बौलीवुड की स्टाइलिश अदाकारा सोनम कपूर के लिए 2018 का वर्ष काफी अहम है. इस वर्ष सबसे पहले प्रदर्शित फिल्म ‘‘पैडमैन’’ में उनके अभिनय को काफी सराहा गया. उसके बाद आठ मई को मुंबई में सिख रीति रिवाज से अपने प्रेमी व उद्योगपति आनंद आहुजा के संग विवाह रचाकर वो सूर्खियों में छाई रहीं. फिर हनीमून मनाने के लिए लंबी छुट्टी पर जाने की बनिस्बत सोनम कपूर अकेले फ्रांस चली गयीं, जहां 14 व 15 मई को ‘‘कान अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह’’ में रेड कार्पेट का हिस्सा बनकर उन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा. ‘कान्स फेस्टिवल’में दूसरे दिन वह ‘औफ शोल्‍डर गाउन’ में नजर आयीं. ‘कान्स’ में ही ‘पौजीटीव प्लेनेट फाउंडेशन’ के गाला लंच में मुख्य अतिथि बनकर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा. इस चैरिटी वाले रात्रिभोज में सोनम कपूर फैशन डिजाइनर डेलपोजो के डिजाइन किए हुए हरे रंग की फ्लोरल इम्ब्रायडरी फ्राक में नजर आयीं. फिर सफेद टौप और डेनिम पहनकर एक विज्ञापन फिल्म की शूटिंग की. उन्होंने सिमोन रोचा टौप पहना, जो कि दिखने मे लड़को की शर्ट लगता है. इसी के साथ अपने पति आनंद आहुजा के ब्रांड भाने लव का डेनिम और सर्जीओ रासी में सजाए गए सैंडल पहने हैं. ज्वेलरी के नाम पर वह नब्बे लाख की कीमती सगाई की अंगूठी के साथ कान में बालियां पहने हुए नजर आयीं.

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कान्स से वापस लौटते ही एक जून को सोनम कपूर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ प्रदर्शित होगी. ज्ञातब्य है कि इस फिल्म के नाम पर विवाद हो गया था. आशु त्रिखा ने ‘वीरे की वेडिंग’नाम से एक फिल्म बनाकर रिलीज की. फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ की निर्माता रिया कपूर व अनिल कपूर ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था. पर कोई फायदा नहीं हुआ था.

प्रस्तुत है सोनम कपूर से हुई एकसक्लूसिव बातचीत के खास अंश..

फिल्म‘‘वीरे दी वेडिंग’’के नाम को लेकर काफी हंगामा हुआ. वीरे की वेडिंगके निर्माता अदालत तक पहुंचे थे. उस वक्त कभी आप लोगों के दिमाग में इसका नाम बदलने का ख्याल नहीं आया?

‘वीरे की वेडिंग’ है क्या? मुझे तो पता ही नहीं..मुझे तो यह भी नहीं पता कि इस तरह की कोई फिल्म आयी भी है. सच कहूं तो यह मसला निर्माता का है, मैं निर्माता की बहन हूं, मेरा काम सिर्फ हीरोईन के रूप में अभिनय करना रहा है. इसके अलावा मैंने किसी बात में कोई रूचि नहीं ली. खैर, आप मेरी बात छोड़ दीजिए, किसी से भी पूछिए कि क्या कोई फिल्म ‘वीरे की वेडिंग’ आयी है? तो लोग कहेंगे नहीं. देखिए, हमने चार साल पहले अपनी फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ घोषित की थी. उसके बाद यदि कोई महज प्रचार पाने के लिए हमारी फिल्म से मिलता जुलता नाम लेकर आ जाए, तो क्या करेंगे? यदि आप किसी ऐसी पोजीशन पर हैं कि लोग आपकी प्रतिष्ठिा को छति पहुंचाने की कोशिश करें या उसका फायदा उठाना चाहें, तो आप क्या करेंगे? उन्होंने महज प्रचार के लिए हमारी फिल्म से मिलता जुलता नाम रखा, वह फिल्म आयी गयी, किसी को पता नहीं चला.

अपनी फिल्म‘‘वीरे दी वेडिंग’’को लेकर क्या कहेंगी?

यह फिल्म चार सहेलियों की कहानी है, जो कि एक बियर्ड पोजीशन पर पहुंचती हैं, जहां उनके अंदर काफी कुछ बदलाव आता है और लोगों को पता चलता है कि वह वास्तव में क्या हैं. हमारी फिल्म की कहानी ‘बियर्ड प्वाइंट’ के बारे में है. फिल्म में एक लड़की की शादी हो रही है. एक लड़की की शादी नहीं हुई है. एक लड़की शादीशुदा है और एक लड़की का तलाक हो रहा है. यह लड़कियां आज की लड़कियां हैं. कहानी शादी के माहौल की है. इस फिल्म में शादी से पहले व शादी के बाद की स्थिति, नारी स्वतंत्रता, नारियों के हक से लेकर उनके शराब व सिगरेट पीने तक हर मुद्दे पर बात की गयी है.

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कुछ लड़कियां अपने करियर को संवारने के लिए शादी नहीं करती हैं. यह मुद्दा भी है?

सर जी, वर्तमान समय की लड़कियों को लेकर जिस तरह के सवाल उठते हैं, उनसे जुड़े जितने भी मुद्दे हो सकते हैं, वह सभी हमारी फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ का हिस्सा हैं. बहुत मजेदार फिल्म है. हमारी इस फिल्म में लड़कियों से जुड़ा कोई मुद्दा छोड़ा नहीं गया है. पूरी फिल्म फनी व इंटरटेनिंग है. हर कलाकार ने बहुत मेहनत से बेहतर परफार्मेस दी है. मजेदार बात यह है कि इस फिल्म में जो चार महिला कलाकार हैं, वह सभी निजी जीवन में अच्छे दोस्त हैं. तो हमारी जुगल बंदी भी परदे पर नजर आएगी. और फिर जब आप किसी अच्छे कलाकार के साथ काम करते हैं, तो आपकी अभिनय प्रतिभा में भी निखार आता ही है.

20 से 30 साल की उम्र के लड़के व लड़की कई तरह के काम करते रहते हैं. कुछ कर्म लड़कों के लिए सही माने जाते है, पर वही लड़कियों के लिए सही नहीं माने जाते. मसलन, दारू पीना, सिगरेट पीना वगैरह ..वगैरह..इस पर आपकी फिल्म‘‘वीरे दी वेडिंग’’क्या कहती है?

देखिए, मौर्डन भारत में मौर्डन लड़कियां जो भी काम कर रही हैं, वह सब कुछ हमारी इस फिल्म का हिस्सा है. मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि इस तरह की फिल्म अब तक बनी नहीं है. चार स्वतंत्र लड़कियां, आपस में सहेलियां हैं, हर काम करती हैं, आपस में हर तरह की बातें करती हैं.

हर अभिनेत्री एकल नायिका वाली फिल्म ही करती है. पर आपने तो चार नायिकाओं वाली फिल्म‘‘वीरे दी वेडिंग’’कर ली?

क्योंकि मेरी बहन रिया कपूर ने चार लड़कियों को लेकर फिल्म बनाने का साहस दिखाया, तो मेरे साथ ही करीना कपूर व स्वरा भास्कर जैसी मेरी सहेलियों ने भी इसमें काम करने का साहस दिखा दिया. कोई भी भारतीय फिल्म निर्माता निर्देशक लड़कियों पर पैसा डालना मुनासिब नहीं समझता.

फिल्म निर्माता लड़कियों/हीरोइनों पर पैसा क्यों नही लगाना चाहते?

मुझे क्या पता, आप उनसे पूछिए. देखिए, यह मेरी या सिर्फ किसी एक निर्माता की सोच नहीं है. यह तो हमारे समाज की सोच है. हमारा समाज लड़कियों को महत्व देता ही नहीं है. मेरी राय में इस तरह के समाज को बदलने की बहुत ज्यादा जरुरत है. यह काम मीडिया ही कर सकता है. वैसे लड़कियों को लेकर समाज की सोच को बदलने के लिए हम जितना कर सकते हैं, कर रहे हैं. हम फिल्में बना रहे हैं. लड़कियों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात कर रहे हैं. मैंने तो कुछ लेख भी लिखे हैं, जो कि छपे हैं. पर इसे आगे ले जाने का काम तो मीडिया का ही है. मैं मानती हूं कि समाज को बदलना मेरे हाथ में नहीं, बल्कि मीडिया के हाथ में हैं. आप तो बहुत कुछ इस बारे में लिखते रहते हैं, मैंने पढ़ा भी है. पर तमाम मीडिया वाले इस मुद्दे पर कुछ लिखते ही नही है. हमारे समाज को समझना पड़ेगा कि लड़कियां बहुत ताकतवर होती हैं. लड़कियां बहुत समझदार होती हैं.

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कहा जा रहा है कि आपने भी बिपाशा बसु सहित कई दूसरी अभिनेत्रियों की नकल करते हुए क्लाथिंग लाइन शुरू की है?

देखिए, जिसे जो कहना है, कहने दीजिए. सच यह है कि हमने अपना ब्रांड पांच साल पहले ही रजिस्टर करवा लिया था. तब से हम इस योजना पर काम करते आए हैं. उस वक्त किसी भी अदाकारा ने इस बारे में सोचा नहीं था. लेकिन हम दोनों बहनों ने तय किया था कि हम ब्रांड अम्बेसेडर नहीं बनेंगे और किसी के भी साथ टाई अप भी नही करेंगे. यह हमारा अपना खुद का काम है. हमारा पैसा लगा है. हमारी मेहनत है. हमारी दिमागी सोच है. हां! शापर्स स्टाप इसका वितरण जरूर करता है. हम खुद मैन्यूफैक्चर करते हैं, जिसमें हमारे 1-2 पार्टनर हैं. बाकी सारे सेलीब्रिटीज ने दूसरों के साथ टाई अप किया हुआ है. हमने ऐसा कुछ नहीं किया है. यह हमारा अपना इंवेंस्टमेंट है. यह हमारा अपना बिजनेस है. हम किसी दूसरे पर निर्भर नहीं है और ना ही मैं ब्रांड अम्बेसेडर हूं. हम अपनी खुद की डिजाइन तैयार करते हैं और उसे मैन्यूफैक्चर करवाते है.

खुद का व्यापार शुरू करने में कितनी समस्या आयी?

समस्याएं तो बहुत आयीं. जिस तरह से हम फिल्म बनाते हैं, वहां समस्या आती है, वैसे ही यहां आयी. पर मेरे लिए यह पारिवारिक व्यपार है. मेरे दादाजी फिल्में बनाया करता थे. पापा अभिनय करने के साथ फिल्में बनाते हैं. बहन फिल्म बनाती है. मैं अभिनय करती हूं. उसी तरह से अब हमारा क्लाथिंग लाइन का बिजनेस है.

किसी भी पोषाक को डिजाइन करने में आपका अपना योगदान क्या होता है?

बहुत बहुत बहुत योगदान होता है. मैं और रिया बैठकर पोषाक डिजाइन करते हैं. फिर उसे हम मैन्यूफैक्चर करते हैं. हर जगह अपना दिमाग और समय लगाते हैं.

स्वरा भास्कर से तो आपकी बड़ी खास दोस्ती है?

जी हां!! हम बहुत अच्छे दोस्त हैं. वहीं करीना कपूर से मेरी बचपन से दोस्ती है. इसके अलावा शिखा के पिता और मेरे पिता ने एक साथ काफी काम किया है. तो शिखा से भी थोड़ा बहुत परिचित थी. अब फिल्म में एक साथ काम करते हुए एक दूसरे से हम बहुत अच्छे से परिचित हो गए. अब तो हम चारों बहुत अच्छे दोस्त बन गए हैं.

स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म‘‘पद्मावत’’को लेकर कुछ कमेंट किया. जिस पर आधी फिल्म इंडस्ट्री उनके खिलाफ हो गयी. पर आपने पूरे मसले पर चुप्पी साध रखी है?

देखिए, स्वरा भास्कर मेरी खास दोस्त हैं. इसमें कोई दो राय नहीं. हमारी दोस्ती कभी टूट नहीं सकती. मैं संजय लीला भंसाली के भी काफी करीब हूं. मगर मैंने फिल्म ‘पद्मावत’ देखी नहीं है, इसलिए मैं स्वरा की बातों पर कोई कमेंट नहीं कर सकती. मेरी राय में हर इंसान को अपनी राय व्यक्त करने का हक है. संजय लीला भंसाली का हक है कि वह फिल्म बनाएं, पर यदि वह फिल्म बना रहें हैं, तो उन्हें इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि उनकी फिल्म पर दूसरे लोग अपनी राय/प्रतिक्रिया देंगे. हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है. यदि फिल्म देखकर स्वरा भास्कर ने कोई प्रतिक्रिया दी है, तो यह भी उसका हक है. अब उस पर यदि दूसरे लोग रिएक्ट कर रहे हैं, तो गलत हैं. इस ढंग से रिएक्ट करने पर समाज कहां से कहां चला जाएगा.

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इस मसले पर स्वरा से आपकी निजी स्तर पर कोई बात हुई?

हमारे बीच हर दिन बातचीत होती रहती है. मैं स्वरा को पिछले 10 साल से समझती हूं. लेकिन जब तक मैं फिल्म ना देखूं, मैं क्या कहूं. मैं अपनी चार फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त थी, फिल्म देखने का समय नहीं मिला. इसके अलावा फिल्म इतनी लंबी हैं कि उसके लिए समय निकालना हो नहीं रहा है. स्वरा मुझसे कई बार कहती हैं कि कुछ तो कहो. मैं उससे हर बार यही कहती हूं कि बिना फिल्म देखें क्या कहूं? एक दिन मैंने स्वरा से कह दिया कि इस फिल्म को लेकर मैंने इतना सुन लिया है कि अब मैं फिल्म देखूंगी भी नहीं. साढ़े तीन घंटे लंबी फिल्म कौन देखेगा? मैं बिना फिल्म देखे थोड़े कुछ कह सकती हूं. स्वरा सही कह रही है या नहीं, यह तो फिल्म देखने के बाद ही कह सकती हूं. सच तो यह है कि मैंने अब तक अपनी फिल्म ‘पैडमैन’ भी नहीं देखी, समय ही नही मिल रहा है.

आने वाली दूसरी फिल्में?

2018 का वर्ष तो मेरा ही है. इस साल चार फिल्में प्रदर्शित होंगी. ‘पैडमैन’प्रदर्शित हो चुकी है. एक जून को ‘‘वीरे डी वेडिंग’’आएगी. इसके बाद 29 जून को संजय दत्त की बायोपिक फिल्म ‘संजू’आएगी. फिर ‘एक लड़की को देखा’’आएगी, जिसमें पिता पुत्री की कहानी है, इसमे मेरे पिता अनिल कपूर मेरे साथ हैं. फिर ‘जोया फैक्टर’आएगी. ‘जोया फैक्टर’की शूटिंग होना बाकी है.

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