बढ़ती उम्र का त्वचा पर प्रभाव पड़ना आम बात है. पर कहते हैं न कि जैसा मन वैसा तन. यानी जब कोई यह ठान ले कि उसे चिर युवा बने रहना है तो उस का हावभाव, सोचविचार, चालचलन भी वैसा ही हो जाता है. इस के साथसाथ आज की नवीन तकनीकें और नित नए ऐंटीएजिंग उत्पाद भी इस प्रक्रिया को धीमी करने में सफल हो रहे हैं. आज हर व्यक्ति अपनी बढ़ती उम्र में भी खुद को फिट और जवां रखने की कोशिश करता है.

मुंबई की आईएमसी की महिला शाखा में आयोजित ‘फौरएवर यंग’ सेमिनार में स्किन ऐक्सपर्ट डा. जमुना पाई ने बताया कि जन्म के बाद से ही त्वचा की उम्र बढ़ने लगती है. ऐसे में त्वचा की उम्र को कम करने के लिए आहार, जीवनशैली और सोच में परिवर्तन करना बेहद जरूरी है.

जैसेजैसे उम्र बढ़ती जाती है बाल सफेद होने लगते हैं, चेहरे पर झुर्रियां आने लगती हैं. नजर भी कमजोर होने लगती है. इस के अलावा उम्र बढ़ने पर त्वचा के नीचे का फैट भी कम होने लगता है. जिस से त्वचा पतली हो जाती है और झुर्रियां दिखनी शुरू हो जाती हैं. इन्हें आजकल कौस्मैटोलौजिस्ट ट्रीटमैंट के द्वारा ठीक किया जा रहा है, जिस में फिलर्स और बोटोक्स ज्यादा किया जाता है. त्वचा की उम्र कम करने के लिए निम्न बातों पर ध्यान अवश्य दें:

– अपनी दिनचर्या को नियमित रखें. हर काम समय पर पूरा करने की कोशिश करें. पूरी नींद लें. अधिक सोना और कम सोना दोनों ही स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. 6-7 घंटे की नींद जरूर लें.

– नियमित व्यायाम करें.

– अपने तनाव को कम करें. किसी कठिनाई के आने पर सकारात्मक सोच रखें.

– आत्मविश्वास से भरपूर रहें.

– हंसना एक अच्छा व्यायाम है. इस में कंजूसी न करें. ठहाके लगा कर हंसें.

– रचनात्मक काम में रुचि बढ़ाएं.

– फास्ट फूड और जंक फूड के बजाय सादा और प्राकृतिक भोजन लें.

– खाने में अलगअलग रंग की सब्जियां और फल अवश्य लें. पानी अधिक पीएं.

– कभी दूसरे की तरह दिखने की कोशिश न करें. अपनी पहचान अलग बनाएं.

– अपनी जीवनशैली, फिटनैस पर हमेशा ध्यान दें.

– बाहर निकलने से पहले सनप्रोटैक्शन क्रीम अवश्य लगाएं.

– अकेलेपन से बचें. सामाजिक गतिविधियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लें.

– हमेशा अनुभवी डाक्टरों के संपर्क में रहें ताकि कोई भी कौस्मैटिक इलाज आप के लिए समस्या न बने.

बढ़ती उम्र को कम दर्शाने में मानसिक स्थिति भी मददगार होती है. मनोरोग चिकित्सक डा. विहांग वाहिया कहते हैं कि क्रीम या डाइट बढ़ती उम्र को रोकने में अधिक कारगर नहीं होती. इसलिए व्यक्ति का मानसिक दशा को सकारात्मक रखना जरूरी है. कई बार व्यक्ति किसी समस्या को ले कर अत्यधिक चिंतित हो जाता है. उसे किसी को न बता कर वह खुद सुलझाने की कोशिश करता है, जो गलत है. किसी भी समस्या या कठिनाई को हमेशा अपने परिवार या डाक्टर को बता कर सुलझाएं. इस से डिप्रैशन कम होगा. मेनोपोज के बाद अधिकतर महिलाएं यह सोचने लगती हैं कि उन का आकर्षण कम हो गया है, जबकि ऐसा नहीं होता. हर किसी की शारीरिक और मानसिक बनावट अलगअलग होती है.

उम्र को मन की शक्ति द्वारा रोकना संभव है लेकिन जो मन से उम्रदराज हो जाए उस का कोई उपचार नहीं होता. अत: आप की सोच का सकारात्मक होना ही आप की उम्र को कम कर सकता है और आप हमेशा जवांजवां महसूस कर सकती हैं.

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