व्यक्तिगत ट्रिप की तुलना में पैकेज्ड टूर कई मामलों में काफी सुविधाजनक होता है. पैकेज्ड टूर में सबकुछ टूर औपरेटर द्वारा मैनेज कर देने और गाइड उपलब्ध करवा देने से आसानी होती है और व्यक्तिगत ट्रैवल की तुलना में यह सस्ता भी पड़ता है. लेकिन किसी टूर औपरेटर के जरिए पर्यटन पर जाने से पहले कुछ बातें जान लें तो आप यात्रा में होने वाले कड़वे अनुभवों, कुढ़न या तनाव से बच जाएंगे और टूर का मजा किरकिरा नहीं होगा.
भ्रामक धारणा-1 : मैं ने ट्रैवल इंश्योरैंस ले लिया, मेरे सभी बैगेज की सुरक्षा की पूरी टैंशन खत्म.
असलियत : किसी अच्छी ट्रैवल इंश्योरैंस पौलिसी में मैडिकल, ऐक्सिडैंट कवर के अलावा ट्रिप की रद्दगी, फ्लाइट की देरी और बैगेज लौस कवर रहता है, लेकिन सारा बैगेज नहीं. इस में एयरलाइन चैक्डइन बैगेज का ही लौस कवर होता है, एयरपोर्ट से बाहर का नहीं यानी होटल या टूर बस से बैगेज खो जाने पर आप को यह कवरेज नहीं मिलेगा. हां, आप टूर औपरेटर की मदद से स्थानीय पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं. एयरपोर्ट पर सामान खोने की सूचना भी संबंधित एयरलाइंस को तुरंत देनी होगी और इस का लिखित प्रमाण आप को रखना होगा. इस विषय में अपने इंश्योरैंस एजेंट से जानकारी लेनी लाभकारी साबित हो सकती है.
भ्रामक धारण-2 : भ्रमण संबंधी जो शैड्यूल ब्रोशर में है, वही फाइनल है.
असलियत : ज्यादातर टूर औपरेटर नियम और शर्तों के तहत लिख देते हैं कि उन के नियंत्रण से बाहर ट्रैफिक समस्या, मौसम की गड़बड़ी, स्थानीय त्योहार, स्पोर्ट्स, हड़ताल, होटल बंद होना, होटल में या फ्लाइट में ओवरबुकिंग होना, ट्रेन या विमान का मार्ग बदलना आदि व अन्य कारणों से तय कार्यक्रम में कोई भी तबदीली संभव है. इसलिए टूर औपरेटर द्वारा हमेशा टूर पैकेज, ट्रैवल प्लान, साइटसीइंग आदि में अचानक या शौर्ट नोटिस पर बदलाव संभव है. इसलिए पेमैंट देने और औफर डौक्यूमैंट पर दस्तखत करने से पहले सबकुछ अच्छी तरह पढ़ लें और छोटेमोटे बदलावों के लिए तैयार रहें.
भ्रामक धारणा-3 : ट्रिप खत्म होने दो, तब इस की कम्प्लेन कर के सबक सिखाएंगे.
असलियत : आप ने आनंदपूर्वक छुट्टी बिताने के लिए मुंहमांगी कीमत दी है, फिर सेवा में कमी की कोई शिकायत टूर खत्म होने के बाद क्यों करेंगे. बीत गई, सो बात गई. टूर खत्म होने पर शिकायत करने से भी क्या फायदा? आप टूर के किसी भी चरण में अगर दिक्कत महसूस करते हैं, तो उसी वक्त टूर कंपनी को शिकायत करें क्योंकि वे स्थानीय होटल वालों और स्थानीय वैंडर्स के भरोसे टूर आयोजित करते हैं. आप की पुख्ता शिकायत मिलने पर वे उसी वक्त उन्हें टाइट कर के आप को बेहतर सेवाएं दिलवाएंगे. हां, मौखिक शिकायत के साथसाथ लिखित शिकायत भी जरूर दें. अपनी शिकायत स्पष्ट, सटीक और सही शब्दों में लिखें, गोलमोल नहीं.
भ्रामक धारणा-4 : 10-15 मिनट इधरउधर तो चलता है, यार.
असलियत : हम भारतीय 10-15 मिनट की कोई कीमत नहीं समझते. टूर में भी हम यही मान कर चलते हैं कि बरात की बस की तरह यहां भी हमारे आए बिना बस नहीं चलेगी. लेकिन यकीन मानिए, आप को यहां काफी मुसीबतें झेलनी पड़ सकती हैं. किसी भी गु्रप टूर में समय की पाबंदी होती है और यहां देरी करने की कोई गुंजाइश नहीं. अगर आप एकदो मिनट से ज्यादा की देरी करते हैं और तय समय पर किसी पर्यटन स्थल, होटल या शौपिंग मौल से अपनी बस तक नहीं पहुंचते हैं, तो गाड़ी छूट जाएगी. फिर अनजानी जगह आप को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है.
भ्रामक धारणा-5 : मैं ने फीस दे दी, अब वीजा का पेपरवर्क करने का जिम्मा टूर औपरेटर का है.
असलियत : टूर औपरेटर वीजा आवेदन शुल्क के साथसाथ खुद की सर्विस फीस भी लेते हैं. वे आप के लिए आवेदन जरूर करते हैं, लेकिन इस पर उन का कोई बस नहीं चलता कि आप को वीजा समय पर मिल ही जाए. अगर आप का आवेदन रद्द हो जाता है, तो आप की फीस जब्त कर ली जाएगी. टूर औपरेटर से इस की वापसी की उम्मीद करना बेकार है.