आज युवाओं में फास्टफूड की आदत तेजी से पनप रही है. इस से उन की सेहत को कितना नुकसान हो रहा है, इस बात का अंदाजा उन्हें तब लगता है जब उन का शरीर इस छोटी सी आयु में ही रोगग्रस्त होने लगता है. संतुलित भोजन के अभाव में शरीर कईर् तरह की बीमारियों से घिरने लगता है. इन बीमारियों में मुख्यरूप से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप असमय आंखों में चश्मा लगना और बालों का सफेद होना शमिल है :
कैसे जिएं स्वस्थ जीवन
युवाओं को चाहिए कि वे युवावस्था से ही ताउम्र स्वस्थ जीवन जीने के लिए अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें.
– सुबह साढ़े 5 से 6 बजे के बीच नियमित उठने की आदत डालें.
– उठते ही रोज 2-3 गिलास कुनकुना पानी पिएं. इस से पेट साफ रहेगा और पूरे दिन शरीर में ताजगी बनी रहेगी.
– नियमित रूप से दांत साफ करें और चेहरा अच्छी तरह धोएं. इस से रात को चेहरे पर आई मृत चमड़ी के साफ होने से चेहरे के रोमकूप खुल जाते हैं और चेहरा चमकने लगता है.
– हर रोज सुबह व्यायाम करें.
– व्यायाम के बाद थोड़ा आराम कर स्नान अवश्य करें, इस से शरीर के रोमकूप साफ हो कर खुलते हैं और दिनभर पसीने के रूप में शरीर की गंदगी के लिए बाहर निकलने का रास्ता बनता है. इस तरह त्वचा में ताजगी बनी रहती है.
– जब भी समय मिले, 1-2 घंटे मैदान में जा कर खूब खेलें और पसीना बहाएं.
– हमेशा संतुलित भोजन ही करें.
भोजन हमें स्वाद के लिए नहीं करना चाहिए बल्कि स्वस्थ रहने के लिए करना चाहिए, इसलिए बिना भूख के खाना न खाएं. मनुष्य यह आदत जानवरों से भी सीख सकता है. जानवरों का पेट भरा होने के बाद आप चाहे उन के सामने कितना ही अच्छा चारा क्यों न डालें, वे नहीं खाते. यही कारण है कि जानवर कभी मोटापे का शिकार नहीं होते.
भोजन के समय को हम 3 भागों में बांट सकते हैं:
- सुबह का नाश्ता, 2. दोपहर का भोजन, 3. रात्रि का भोजन.
नाश्ता : नाश्ते में दूध, अंडा, मक्खन, पनीर, अंकुरित अनाज, कच्चा सलाद, दलिया, उपमा, चपाती, हरी सब्जियां, सूखे मेवे, फल इत्यादि हर रोज अपनी इच्छानुसार बदलबदल कर ले सकते हैं. इन में से मनपसंद चीजें रोटी में डाल कर रोल बना कर खाया जा सकता है. इस तरह का पौष्टिक नाश्ता शरीर को स्वस्थ और तरोताजा रखता है.
कुछ लोग नाश्ता करना आवश्यक नहीं समझते जोकि सरासर गलत है. चूंकि हम रातभर लंबे समय तक बिना कुछ खाए रहते हैं इसलिए अगले दिन शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति बनाए रखने के लिए सुबह का नाश्ता अनिवार्य है. यदि हम अधिक शारीरिक परिश्रम करते हैं और भूख लगती है तो दोपहर के भोजन से 2 घंटे पहले और शाम को जूस या अन्य हलका भोजन भी ले सकते हैं.
दोपहर का भोजन : दोपहर का भोजन आवश्यकतानुसार भरपेट खाएं. इस समय हमारा भोजन कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण विटामिनयुक्त संतुलित भोजन होना चाहिए.
रात्रि भोजन : रात्रि का भोजन सोने से 2-3 घंटे पहले अवश्य कर लेना चाहिए. भोजन करने के तुरंत बाद सोने से भोजन ठीक से पचता नहीं है. रात्रि का भोजन संतुलित होने के साथसाथ दोपहर के भोजन से हलका और सुपाच्य होना चाहिए, क्योंकि इस समय हमारे शरीर को केवल आराम ही करना होता है.
संतुलित भोजन के स्रोत
कार्बोहाइड्रेट्स : यह शरीर को शक्ति देता है. शारीरिक परिश्रम करने वालों को इस की अधिक आवश्यकता होती है. यह हमें स्टार्च वाले खा- पदार्थों जैसे चावल, आटा, मैदा, आलू विभिन्न प्रकार के अनाजों, दालों आदि से प्राप्त होता है. यह मीठे फलों खजूर, गन्ना, शलजम, चुकंदर, मेवा, चीनी, गुड़, शक्कर, शहद इत्यादि से प्राप्त होता है. इस की कमी से शरीर में निर्बलता आती है और भोजन भी ठीक से पचता नहीं है.
प्रोटीन : शारीरिक शक्ति प्रदान करने, कोशिकाओं की टूटफूट में सुधार करने, नई कोशिकाएं बनाने, मानसिक शक्ति बढ़ाने, रोग निवारणशक्ति उत्पन्न करने और शारीरिक वृद्धि के लिए भोजन में प्रोटीन का सेवन बहुत आवश्यक है. प्रोटीन में नाइट्रोजन की मात्रा बहुत अधिक होती है जो शारीरिक वृद्धि के लिए बहुत जरूरी है. नाइट्रोजन प्रतिदिन मूत्र के साथ काफी मात्रा में हमारे शरीर से बाहर निकलता रहता है. इसलिए इस कमी को पूरा करने के लिए हमें प्रतिदिन प्रोटीन का सेवन अवश्य करना चाहिए.
यह हमें 2 प्रकार से प्राप्त होता है :
- वनस्पति प्रोटीन, 2. पशु प्रोटीन.
वनस्पति प्रोटीन हमें मटर, मूंग, अरहर, चना, अंकुरित अनाजों और हरी सब्जियों से प्राप्त होता है जबकि पशु प्रोटीन हमें दूध, मक्खन, पनीर, मांस, अंडे, मछली आदि से प्राप्त होता है जो उच्चकोटि का प्रोटीन माना जाता है.
इस की कमी से शारीरिक विकास रुक जाता है, त्वचा पर झाइयां पड़ जाती हैं, बाल झड़ जाते हैं, लिवर बढ़ जाता है. और बच्चों को सूखा रोग हो जाता है. इस की अधिकता से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता.
वसा : भोजन में पोषक तत्त्वों में वसा का महत्त्वपूर्ण स्थान है. इस के प्रयोग से शरीर में गरमी और शक्ति उत्पन्न होती है. यह शरीर के ऊतकों की क्षय हुई चरबी को पूरा करती है, त्वचा में चमक बनी रहती है और कार्बोहाइड्रेट्स को पचाने में सहायता मिलती है.
यह हमें 2 प्रकार से प्राप्त होती है :
- वनस्पति वसा, 2. प्राणीजन्य वसा.
वनस्पति वसा हमें विभिन्न प्रकार के खा- तेलों, बादाम, अखरोट, सोयाबीन, नारियल, काजू, पिस्ता, मूंगफली इत्यादि से प्राप्त होती है जबकि प्राणीजन्य वसा हमें घी, दूध, मक्खन, क्रीम, मछली के तेल आदि से प्राप्त होती है.
इस की कमी से त्वचा शुष्क हो जाती है और अधिकता से शरीर मोटा होने लगता है, पाचनक्रिया ठीक नहीं रहती, शरीर में बहुत अधिक मात्रा में वसा के एकत्रित होने से पित्ताशय में पथरी का डर रहता है.
खनिज लवण : हमारे शरीर में कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, मैगनीशियम, फास्फोरस, लोहा, आयोडीन, क्लोरीन, सिलोकौन, सल्फर आदि अनेक क्षारीय पदार्थ पाए जाते हैं जो शरीर को रोग और निर्बलता से बचाते हैं. ये हमें विभिन्न प्रकार के खा- पदार्थों, हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक, चौलाई, सरसों का साग, मूली के पत्ते आदि से प्राप्त होता है. दूध से हमें कैल्शियम और फास्फोरस नामक खनिज लवण मिलते हैं.
कैल्शियम तथा फास्फोरस हड्डियों और दांतों का निर्माण व उन्हें मजबूत बनाते हैं. सोडियम, पोटैशियम, क्लोरीन और फास्फोरस घुलनशील लवण हैं जो शरीर को तरल द्रव पहुंचाते हैं.
इन की कमी से स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता. कैल्शियम की कमी से दांत और हड्डियां कमजोर होती हैं. बच्चों की वृद्धि रुक जाती है. लोहे की कमी से शरीर पीला पड़ जाता है जबकि आयोडीन की कमी से गलगंड नामक रोग हो जाता है. फास्फोरस की कमी से हड्डियों में विकार आ जाता है और मांसपेशियां दिखाई देने लगती हैं. पोटैशियम की कमी से हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और घबराहट होने लगती है.
विटामिन : फल, दूध, कच्चे अंडे और हरी सब्जियों में अधिकता से पाए जाते हैं. ये ताप सहन नहीं कर सकते, इसलिए खा- पदार्थों को उबालने, तलने, गलने और सूखने से विटामिन नष्ट हो जाते हैं. विटामिन कई प्रकार के होते हैं :
विटामिन ‘ए’ : यह ताजा घी, मांसाहारी पदार्थों, बंदगोभी, गाजर, मेथी के साग आदि में पाया जाता है. इस की कमी से रात को कम दिखाई देता है, लिवर में पथरी बनने लगती है, शरीर दुर्बल हो जाता है, दांतों में पायरिया नामक रोग हो जाता है.
विटामिन ‘बी’ : यह ताजे फलों, सब्जियों, दूध, अनाज के ऊपरी छिलकों में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. इस की कमी से बेरीबेरी नामक रोग होता है जबकि विटामिन ’बी 12‘ की कमी से एनीमिया हो जाता है.
विटामिन ‘सी’ : यह आंवला, नीबू, संतरे, मौसमी, टमाटर, अंकुरित अनाज आदि में पाया जाता है. इस की कमी से स्कर्बी नामक रोग होता है.
विटामिन ‘डी’ : यह सूर्य के प्रकाश से मानव शरीर में बनता है. इस के अतिरिक्त यह दूध, अंडे, मक्खन, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियों, मछली के तेल आदि में भी मिलता है. इस की कमी से रिकेट्स नामक रोग होता है जिस में हड्डियां विकृत और कमजोर हो जाती हैं.