अपनेपन से पनपने वाले रिश्ते यों तो अनमोल होते हैं लेकिन अगर यही रिश्ते कुछ कीमत में या किराए पर मिल जाएं तो? यह सवाल इसलिए है कि अब तकनीक के दौर में रिश्ते औनलाइन शौपिंग वैबसाइटों पर प्यार की गारंटी के साथ तय समय के लिए भी मिलने लगे हैं. पत्नी के प्यार के साथ, मातापिता ममता के दिखावे के साथ तो बच्चे फैमिली पैकेज के तौर पर डिस्काउंट के साथ उपलब्ध हैं, वह भी एक फोन कौल पर. अभी तक ये हालात जापान और चीन जैसे देशों में थे, लेकिन कोई आश्चर्य की बात नहीं कि जल्दी ही भारत में भी इन की शुरुआत हो जाए.
ऐसा अंदेशा उन घटनाओं से जन्म ले रहा है जो बीते कुछ समय में सामने आई हैं जिन में पत्नी की बोली पति ने औनलाइन लगा दी तो सास से त्रस्त बहू ने सास को ही बेचने का विज्ञापन औनलाइन चस्पां कर दिया. पत्नी ने पति को कम कीमत में बेचने का विज्ञापन दे डाला.
उन लोगों के लिए यह सुनना अजीब हो सकता है जिन्होंने रिश्तों की बुनियाद को प्रेम से सींचते देखा है, लेकिन रिश्तों की अहमियत से बेफिक्र और ब्रेकअप, बौयफ्रैंड जैसी पश्चिमी संस्कृति में रंगे एक खास तबके के लिए यह एक सहूलियत और अवसर है. यही वजह है कि अब रिश्ते औनलाइन दुकानों पर बिक रहे हैं. साथ ही, ब्रेकअप कराने वाली वैबसाइट्स भी वजूद में आ गई हैं जो ब्रेकअप को ज्यादा रोचक व आसान बना रही हैं.
भारत जैसे देश में इस तरह की घटनाएं इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचती हैं क्योंकि यहां रिश्तों की मर्यादा जिंदगी से भी बड़ी मानी जाती है. इस के बावजूद इसी देश में औनलाइन दुकानों पर किफायती कीमत पर रिश्तों का कारोबार जन्म ले रहा है.
हालांकि ऐसी घटनाएं भी सामने आती रही हैं जब जिगर के टुकड़े चंद रुपयों में बेच दिए गए तो बेटियों, पत्नियों के भी खरीदनेबेचने के मामले सुने गए, जो कभी पेट की खातिर तो कभी परंपरा के नाम पर अंजाम दिए गए. मगर ये चंद ही घटनाएं है जो अज्ञानता और भुखमरी की तसवीरें बयां करती हैं, लेकिन तकनीक से कदम मिला कर चलते उन लोगों की सोच पर कौन लगाम लगाए जो रिश्तों की बोली भी लगा रहे हैं और इन की खरीदफरोख्त भी कर रहे हैं.
औनलाइन संस्कृति
अपनी आदर्श संस्कृति के लिए मशहूर देश भारत में कोई भी धर्ममजहब हो, दासप्रथा जैसी बुराइयों से सभी त्रस्त रहे. नए हिंदुस्तान में इस बुराई को कानून बना कर दूर करने की कोशिश की गई. इस से काफी रोक भी लगी. इस के बावजूद महाराष्ट्र के नांदेड़ के वैधु समाज जैसे कुछ समुदायों में परंपराओं के नाम पर चोरीछिपे बेटियों को बेचने का चलन आज भी जारी है. लेकिन, यहां सवाल उस नई प्रथा की शुरुआत का है जिसे आज की औनलाइन संस्कृति जन्म दे रही है.
रिश्तों के कारोबार के चलन से यह आशंका भी जोर पकड़ रही है कि कहीं यह चलन समाज को खींच कर फिर उसी कबीलाई दौर की तरफ न ले जाए जहां इंसान बेचेखरीदे जाते थे. दासप्रथा में तो फिर भी दूसरे समुदाय के बंदी बनाए गए लोगों को बेचा जाता था लेकिन इस नए समाज में तकनीक घर बैठे सास, पत्नी और पति को बेचने की सहूलियतें भी मुहैया करा रही है, जो समाज के लिए कहीं ज्यादा खतरनाक है.
ऐसी ही एक घटना ने रिश्तों को शर्मसार कर दिया जब पति ने ही पत्नी की औनलाइन बोली लगा दी. हरियाणा के पटियाकार गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को पौर्न फिल्ममेकर को बेच दिया क्योंकि पत्नी दहेज नहीं लाई थी और उसे दहेज की कीमत वसूल करनी थी.
मार्च 2016 में मिनी मुंबई के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश के इंदौर में दिलीप माली ने अपनी पत्नी और बेटी की बोली सोशल साइट पर लगा दी. इस के लिए उस ने सोशल साइट पर पत्नी और बेटी की फोटो अपलोड की और लिखा, ‘‘मैं कर्ज के बोझ तले दबा हूं, मुझे किसी को पैसे लौटाने हैं, इसलिए मुझे रुपयों की जरूरत है. जो मेरी बीवी, बच्ची को खरीदना चाहे, मुझ से संपर्क करे.’’
उस ने पत्नी की कीमत भी तय कर दी 1 लाख रुपए. साथ ही, अपना मोबाइल नंबर भी दर्ज कर दिया ताकि लोग आसानी से उस से संपर्क कर सकें.
अपना प्राइस टैग
वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो रातोंरात अमीर बनने के ख्वाब देखते हैं और इस सपने को साकार करने की कोशिश में वे अपनी ही बोली लगा देते हैं. आईआईटी खड़गपुर के एक छात्र आकाश नीरज मित्तल ने खुद को फ्लिपकार्ट पर बेचने की कोशिश की. इस के लिए उस ने फ्लिपकार्ट की वैबसाइट पर खुद ही एक विज्ञापन भी चस्पां कर डाला. साथ ही, छात्र ने विज्ञापन में अपनी कीमत 27,60,200 रुपए भी लिखी और फ्री डिलीवरी का विकल्प भी दिया. उच्च शिक्षित युवा की ऐसी सोच किस तरह के समाज को गढ़ रही है, समझा जा सकता है.
वर्ष 2015 में औनलाइन खरीदफरोख्त का ऐसा एक मामला सामने आया जिस ने सोचने पर मजबूर कर दिया था. सासबहू सीरियल बुद्धूबक्से पर महिलाओं के मनोरंजन का खास जरिया बनते रहे हैं. इन में खासकर सासबहू के रिश्तों की जो कड़वाहट परोसी जाती है उस ने भी महिलाओं की सोच को काफी हद तक प्रभावित किया है, इस से इनकार नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि नफरत की आग में जल रही एक बहू ने शौपिंग साइट पर अपनी सास की तसवीर को न सिर्फ अपलोड किया बल्कि उस ने शब्दों में भी अपनी नफरत उजागर की.
कंपनी की साइट पर विज्ञापन में उस ने लिखा, ‘‘मदर इन-ला, गुड कंडीशन, सास की उम्र 60 के करीब है, लेकिन कंडीशन फंक्शनल है, आवाज इतनी मीठी कि आसपास वालों की भी जान ले ले. खाने की शानदार आलोचक. आप कितना ही अच्छा खाना बना लें, वे खामी निकाल ही देंगी. बेहतरीन सलाहकार भी हैं. कीमत कुछ भी नहीं, बदले में चाहिए दिमाग को शांति देने वाली किताबें.’’
कीमत के स्थान को खाली छोड़ दिया गया. इस तरह का विज्ञापन देख वैबसाइट ने कुछ ही देर में विज्ञापन हटा दिया. बहू की इस हरकत को आईटी कानून के तहत अपराध माना गया और उस के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हुई.
एक महिला ने क्विकर के पैट्स सैगमैंट में अपने पति की फोटो डाल कर लिखा था, ‘हसबैंड फौर सेल’ और पति की कीमत मात्र 3,500 रुपए. उस ने पैट टाइप में लिखा था, ‘‘हसबैंड, कीमत 3,500 रुपए.’’ वहीं, इसी साइट पर एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को मात्र 100 रुपए में बेचने का विज्ञापन इन शब्दों के साथ दिया, ‘‘यह आदर्श पत्नी है, घर का काम बहुत अच्छे से करती है पर बोलती बहुत है, इसलिए इतने कम दाम में बेच रहा हूं.’’
कुछ भी बेचने की संस्कृति
रिश्तों की यह कौन सी परिभाषा है जो नएपन के इस दौर में लोेगों में अपनेआप ही पनपने लगी है. कुछ भी बेच दो की संस्कृति कम से कम भारतीय समाज के स्वभाव से तो मेल नहीं खाती. हालांकि इसी समाज में कुछ लोग अपने बच्चों का सौदा करते रहे हैं. बिहार राज्य के गरीबी से त्रस्त लोग बेटियों को बेचने के लिए बदनाम हैं ही. वहीं, हरियाणा में बेटियों को पेट में ही मारने के चलन के साथ महिलाओं को खरीद कर उन से विवाह करने के मामले सामने आना नई बात नहीं है.
गरीबी और प्राकृतिक आपदाओं से तबाह हुए लोगों के बारे में भी सामने आता रहा है कि वे कुछ वक्त की रोटी के लिए अपने बच्चों को बेचने पर मजबूर हो जाते हैं. बीते साल पटना के नंदनगर में पति की प्रताड़ना और आर्थिक तंगी से मजबूर एक महिला ने अपनी दुधमुंही बच्ची को महज 10 हजार रुपयों के लिए बेच दिया.
जुलाई 2015 में रांची के करमटोली की गायत्री ने भुखमरी से तंग आ कर अपनी 8 माह की बेटी को 14 हजार रुपए में बेचा. इसी साल मध्य प्रदेश के मोहनपुर गांव के एक किसान लाल सिंह ने 1 साल के लिए अपने 2 बेटों को 35,000 रुपयों में बेच दिया. वजह थी तबाह हुई फसल और कर्ज.
उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक महिला का बयान रिश्तों के खोखलेपन को उजागर कर गया जब उस ने अपने पति पर अपने ही 5 बच्चों को बेचने का आरोप लगाया. वहीं बुंदेलखंड के सहरिया आदिवासी लोगों द्वारा कर्र्ज की वजह से अपने बच्चों को बेचने की घटनाएं देश की बदहाली की दास्तां पेश करती रही हैं.
भारत और इंडिया दोनों में ही इंसानों को बेचने का चलन जारी है, फिर वजह चाहे खुशी से किसी को खरीदने की हो या बदहाली में बेचने की. हर हाल में यहां इंसान बिक रहे हैं. ऐसे में भला भविष्य में संबंधों के प्रति सम्मान की संस्कृति बने रहने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
नया समाज, कुरीतियां पुरानी
यह कैसा नया समाज है जहां पुराने समाज की कुरीतियां आधुनिकता के नाम पर अपनाई जा रही हैं. जापान में तो ‘रैंट ए वाइफ औटटावा डौट कौम’ नाम की वैबसाइट बनी हुई है जिस पर मांबाप, पत्नी और पति किसी भी रिश्ते को किराए पर लेने की सुविधा दी जा रही है. वहीं, चीन जैसे तेजी से विकसित हो रहे देश में भी बेच दो संस्कृति पैर पसारे हुए है. वहां के फुजियान प्रांत में एक दंपती ने अपनी 18 माह की बच्ची को महज 3,530 डौलर यानी 2.37 लाख रुपए में सिर्फ इसलिए औनलाइन बेचने का विज्ञापन पोस्ट किया क्योंकि उन्हें आईफोन खरीदना था. एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में हर साल
2 लाख बच्चों का अपहरण कर उन्हें औनलाइन बेचा जाता है.
वहीं, अमेरिका में एक आदमी ने अपनी बाइक के साथ अपनी पत्नी की फोटो भी औनलाइन सेल के लिए डाल दी और लिखा, ‘‘मेरी बाइक 2006 की मौडल है और मेरी पत्नी 1959 मौडल है जो दिखने में बहुत ही खूबसूरत है.’’
ब्राजील में 2013 में एक व्यक्ति का अपने बच्चे को बेचने का औनलाइन विज्ञापन चर्चा का विषय बना था, क्योंकि वह बच्चे के रोने के शोर से बचने के लिए उसे बेचना चाहता था. देशदुनिया में इंसान नहीं बिक रहे, बल्कि औनलाइन पशुओं को बेचने की भी शुरुआत हो गई है और इंसानों की कीमत से कहीं ज्यादा में पशु बिक रहे हैं. साथ ही, उन के गोबर की भी बिक्री हो रही है. दिसंबर 2014 में अमेरिका में औनलाइन कंपनी ‘कार्ड्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी’ ने 30 हजार लोगों को महज 30 मिनट में गोबर तक बेच दिया. लोगों ने गोबर क्यों खरीदा, यह जिज्ञासा का विषय हो सकता है.
मनपसंद डेटिंग पार्टनर
आखिर औनलाइन खरीदारी की तरफ लोगों का अंधझुकाव क्यों है? इस की वजह शायद आकर्षक औफर और घरबैठे खरीदारी की सहूलियत है. एसोचैम और प्राइसवाटर हाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) ने अपने अनुमान में कहा है कि बाजार में सुस्ती के बावजूद 2017 में औनलाइन शौपिंग में 78 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना है. 2015 में यह 66 फीसदी थी. लोगों के इसी रुझान को देख कर वे लोग भी लाभ उठाने को तैयार बैठे हैं जो औनलाइन इंसानी रिश्तों को बेचने के मौके तलाश रहे हैं. तकनीक ने ऐसे लोगों के हाथ में औनलाइन खरीदारी के तौर पर एक नया विकल्प दे दिया है.
इतना ही नहीं, रिश्तों के साथ ही किसी महिला या पुरुष के साथ वक्त गुजारने का जरिया भी कुछ वैबसाइट दे रही हैं. हाल में महिलाओं के लिए डेटिंग औनलाइन शौपिंग वैबसाइट्स लोगों की तवज्जुह अपनी तरफ खींच रही है. इस पर महिलाएं अपनी पसंद का पुरुष चुनने, उन के साथ डेटिंग करने की सहूलियत पा सकती हैं.
अमेरिकी समाचारपत्र ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इंटरनैट डेटिंग का ट्रैंड तो बढ़ ही रहा है, साथ ही अपराध भी पनप रहा है. वहीं कुछ साइट्स समलैंगिकों के लिए भी जारी हैं. चूंकि भारत में इस तरह के रिश्ते अपराध माने जाते हैं, ऐसे में समलैंगिक औनलाइन डेटिंग के जरिए अपना पार्टनर तलाश कर रहे हैं.
इस के लिए कई साइट्स औनलाइन डेटिंग ऐप, ग्रिडर, एलएलसी, प्लैनेट रोमियो बीवी ऐप्स उपलब्ध करा रही हैं. भारत में ये ऐप्स काफी लोकप्रिय हो रहे हैं.
इंटरनैट, औनलाइन खरीदारी जैसी सहूलियतें जीवन को आसान बनाने के लिए हैं, मगर इन्हीं पर रिश्तों का मजाक बन रहा है. प्राइस टैग के साथ औनलाइन रिश्तों की बिक्री समाज में किस तरह का बदलाव लाएगी, समझने की जरूरत है.
VIDEO : जियोमेट्रिक स्ट्राइप्स नेल आर्ट
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