पिछले दिनों एक खबर आई थी कि केरल के तिरुवनंतपुरम में एक तेइस वर्षीय लड़की ने एक कथित धार्मिक गुरू का प्राइवेट पार्ट काट डाला. लड़की का आरोप था कि वह ढोंगी उसका रेप करने की कोशिश कर रहा था और ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. पिछले छह सालों से वह लड़की का यौन शोषण करता आ रहा था पर अब जब बात बरदाश्त की हद से आगे बढ़ गई, तो लड़की ने हिम्मत दिखाई . कहा तो यह भी जा रहा है कि उस ढोंगी ने लड़की की मां का भी शोषण किया था. अब सवाल है कि ऐसे ढोंगी को घर में घुसने किसने दिया और क्यों. मामले की तह तक पहुंचने पर पता चला कि लड़की के लकवाग्रस्त पिता एक लंबे अर्से से बिस्तर पर पड़े थे और उनके इलाज के बहाने इस ढोंगी ने घर में प्रवेश पा लिया. पिता तो ठीक नहीं हुए लेकिन धर्म के नाम पर बच्ची का पिछले छह सालों से लगातार यौन शोषण कर रहा था जो अब उससे और नहीं सहा गया.

ये तो एक किस्सा है जो लड़की की हिम्मत से सामने आ गया पर कितने ऐसे किस्से और भी होंगे जो बंद कमरों में ही घुट कर रह जाते होंगे. कभी धर्म के नाम पर तो कभी पैसे के बल पर और अगर फिर भी न दबे तो डरा-धमका कर. ऐसे ही एक नामी धर्मगुरू आसाराम बापू और उनका बेटा यौन उत्पीड़न के मामले में जेल की हवा खा रहे हैं. उन पर अपने आश्रम के अनुयायी की नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का आरोप लगा है. यौन शोषण का मामला चल तो काफी समय से रहा था पर एक परिवार के हिम्मत दिखाने के बाद बाकि लोग भी खुलकर सामने आए.

इससे यह पता चलता है कि ऐसा नहीं है कि ऐसे किस्से केवल छोटे शहरों या कम नामचीन ढोंगी गुरू ही करते हैं, बड़े-बड़े नाम वाले भी पीछे नहीं हैं. इन पाखंडियों का चेहरा सामने आने से एक बहस उठ खड़ी हुई है कि आखिरकार महिलाएं ही क्यों बनती हैं इनका शिकार? शायद जहां पुरुषों से ये तथाकथित धर्मगुरू धन ही उगाहते होंगे वहां महिलाओं का आर्थिक के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक, सामाजिक यानी हर तरह से शोषण करते हैं.

कारणों की जांच-पड़ताल करें तो कहा जा सकता है सबसे बड़ा कारण है इन पीड़ित महिलाओं का कम पढ़ा-लिखा होना. इनके आश्रमों या डेरों में ऐसी महिलाओं की भरमार होती है जो देहात से आती हैं, अपने पति और बच्चों  के साथ सिर पर गठरी थामे. दिल्ली के बाहरी रिंग रोड़ पर खास दिनों में भयंकर ट्रैफिक जाम होता है, क्योंकि इन दिनों दूर-दूर से भक्त अपने गुरु परिवार के दर्शनों के लिए आते हैं और उनमें भी बड़ी संख्या महिलाओं की होती है. शायद इन्हें लगता है कि इनकी हर समस्या का इलाज बाबा के पास है, चाहे वो घर गृहस्थी की हो या पप्पू के पास होने की. गंडे-ताबीज से लैस ये बाबा भी हर समस्या निदान अपनी झोली में रखते हैं.

पर सब कम पढ़ी-लिखी हैं, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता, हाल ही में दिवंगत हुए चंद्रा स्वामी पर तो पूर्व मिस इंडिया पामेला बोर्डेस ने सेक्स फेवर्स के लिए भेजने का खुला आरोप लगाया था. राजनीतिक हलकों में अपनी नज़दीकियों के लिए जाने जानेवाले चंद्रास्वामी के विरूद्ध पामेला के बयान ने सबको सकते में डाल दिया था. किंतु ये हाई क्लास बाबाओं की पोल खोलता है. हालांकि पामेला जैसी लड़कियां मानसिक शांति की खोज में इन गुरुओं के पास जाती हैं, पर धीरे-धीरे इनके चंगुल और विश्वास में ऐसी फंस जाती हैं कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. क्या ये देहात से हैं? नहीं पर यहां कह सकते हैं कि धर्म की लुभावनी फिरकी के आगे इनका आत्मबल कमज़ोर पड़ जाता है और ये महज़ कठपुतली रह जाती हैं.

ओशो का नाम किसने नहीं सुना? जाने-माने नेता, अभिनेता इस आदमी के चेले रह चुके हैं .क्या देश और क्या विदेश हर जगह से बड़ी संख्या में लोगों ने आकर पुणे के आश्रम में डेरा जमाया हुआ था. पर अगर अंदर की तस्वीरों पर विश्वास करें तो किसी फाइव स्टार से कम नहीं था ये आश्रम, जिसमें आधुनिक कैफे से लेकर स्वीमिंग पूल तक हर सुख उपलब्ध था और साथ में फ्री सेक्स अलग से. कितने दशकों तक ओशो का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता रहा और आज भी बोल रहा है. भगवान को पाने का ये मार्ग तो निराला ही था जहां लोगों को बांधने में महिला भक्तों की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता.

आजकल एक राधे मां जगह-जगह भक्तों की गोदी में चढ़ी दिखाई देती हैं और उनके पीछे-पीछे महिलाओं का हुजूम. उन्हें देखकर कतई नहीं लगता होगा कि इन्हें धर्म के बारे में कुछ ज्ञान भी होगा. पड़ताल करने पर पता चला कि पति फोरमैन था, एक दिन बीवी-बच्चों को छोड़कर विदेश चला गया. पहले तो पत्नी ने सिलाई करके बच्चे पालने की कोशिश की पर जब बात नहीं बनी तो एक बाबा की शरण में चली गई, जिन्होंने आश्रम में विशेष स्थान देकर नया नामकरण कर दिया और आज राधे मां के नाम से लोगों को बेवकूफ बना रही हैं. पिछले दिनों दिल्ली के एक बड़े पार्क में इनका धार्मिक आयोजन हुआ, जहां राधे मां भक्तों की गोद में चढ़ने पर शगुन के लिफाफे बटोर कर जहां डाल रही थी, आप समझ जाइए. यह देखकर पढ़े-लिखे लोगों को शर्म आ रही थी जो उत्सुकतावश वहां पहुंचे हुए थे.

हर जगह धर्म के नाम पर महिलाएं ही सबसे ज्यादा बेवकूफ बनाई जाती हैं. आखिर क्यों? दरअसल जब तक वे अपने पर भरोसा नहीं करेंगी और परेशानियों का हल हालात का मुकाबला करने में नहीं खोजेंगी, तब तक वे ढोंगी बाबाओं के हाथ की कठपुतली ही बनी रहेंगी. ये बाबा बड़े कैलकुलेटेड तरीके से अपने भक्तों का दिमाग पढ़ते हैं और एक बार इनके हाथ में नब्ज आ गई, फिर मनचाहे तरीके से अपनी अंगुलियों पर नचाते हैं. जब तक महिलाएं स्वंय जागरूक नहीं होंगी धर्म यूं ही बिकता रहेगा और वे नाचती रहेंगी और बच्चियां ढोंगी बाबाओं की हवस का शिकार बनती रहेंगी.

– विम्मी करण सूद

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