मुकुल ने गर्लफ्रैंड जूही को जन्मदिन पर जो कलाई घड़ी तोहफे में दी थी, वह उसे बहुत ज्यादा पसंद नहीं आई थी. इस के लिए जूही उसे सालभर उलाहना देती रही थी.
मुकुल ने सोच लिया था कि इस बार वह जूही को शानदार तोहफा दे कर उस की बोलती बंद कर देगा. उस ने जूही से बातोंबातों में जान लिया था कि उसे कौन सा और कौन सी कंपनी का मोबाइल पसंद है.
जब मोबाइल शौप पर मुकुल ने उस मोबाइल की कीमत पता की तो वह सोच में पड़ गया. 25 हजार रुपए का मोबाइल, इतना महंगा मोबाइल आखिर वह जूही को कैसे उस के जन्मदिन पर भेंट करेगा? वह निराश हो कर घर की ओर लौट पड़ा.
मुकुल के पापा दीवानचंद्र एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे. मुकुल को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए उन्होंने एक महंगे स्कूल में उस का ऐडमिशन कराया था. महंगी फीस और महंगी पढ़ाई. दीवानचंद्र को इस के लिए ओवरटाइम करना पड़ता था. अकसर वे रात को देर से ही घर लौटते थे.
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मुकुल इस बात का फायदा उठाने लगा था. सीधीसादी मम्मी को तो वह कुछ समझता ही नहीं था. पढ़ाई का कोई भी बहाना बना कर घर से निकल जाता, जूही और दोस्तों के साथ मटरगश्ती करता.
जूही एक बड़े बिजनैसमैन की बेटी थी. उस के पिता को व्यापार के सिलसिले में अकसर शहर से बाहर जाना पड़ता था. जूही इस बात का भरपूर फायदा उठा रही थी. वह भी स्वच्छंद प्रवृत्ति की हो गई थी. बड़े परिवार की बेटी होने के कारण उसे महंगी और अकर्षक चीजें ही पसंद आती थीं.
मुकुल की जान इसी आफत में फंसी थी. जूही को सस्ता उपहार वह भेंट नहीं कर सकता था और महंगा खरीदना उस के बूते की बात नहीं थी. अब वह क्या करे? वह इसी उधेड़बुन में खोया रहता था.
एक दिन मुकुल का साथी राकेश उसे अपने साथ मोबाइल शौप पर ले गया. उस ने वहां से एक महंगा मोबाइल खरीदा जिसकी कीमत 35 हजार रुपए थी.
मुकुल ने जब उस से इस महंगे मोबाइल के बारे में पूछा कि यह उस ने किस के लिए खरीदा है तो वह यह जान कर चौंक गया कि इतना महंगा मोबाइल राकेश ने अपनी गर्लफ्रैंड सारिका के लिए खरीदा था. फिर मुकुल ने अपनी जिज्ञासा समाप्त करने के लिए उस से पूछा, ‘‘राकेश, गर्लफ्रैंड के लिए इतना महंगा गिफ्ट खरीदने की क्या आवश्यकता थी?’’
‘‘अरे यार मुकुल, ये मौडर्न और खूबसूरत लड़कियां महंगी और आकर्षक चीजों पर ही मरती हैं. उन्हें जितने महंगे गिफ्ट दो वे उतनी ही अधिक खुश होती हैं. वे महंगे गिफ्ट से अपना स्टेटस मापती हैं. चमकदमक पर मरती हैं ये लड़कियां, चमकदमक पर.’’
‘‘लेकिन राकेश, तुम्हारे पास इतना महंगा गिफ्ट खरीदने के लिए पैसे कहां से आए? तुम्हारे मम्मीपापा तो इस काम के लिए तुम्हें इतने पैसे देने वाले नहीं?’’
‘‘अरे यार मुकुल, यह सब अंदर की बात है. गर्लफ्रैंड को खुश रखने के लिए बहुतकुछ करना पड़ता है.’’
अब मुकुल इस ‘बहुतकुछ’ में उलझ कर रह गया. उस ने राकेश से इस के बारे में पूछा भी. लेकिन राकेश ने यह कह कर उसे टाल दिया कि इस ‘बहुतकुछ’ का मतलब उसे तभी पता चलेगा जब वह उस की और उस के दोस्तों की संगति करेगा.
रातभर मुकुल राकेश के बारे में ही सोचता रहा. उसे जूही को खुश करने का एक रास्ता राकेश की संगति करने में नजर आ रहा था. वह जूही को एक महंगा गिफ्ट दे कर उसे हर हाल में खुश करना चाहता था.
आखिरकार, उस ने निर्णय कर ही लिया कि वह राकेश और उस के दोस्तों की संगति में रहेगा और ‘बहुतकुछ’ करेगा.
राकेश ने मुकुल को अपने विश्वास में ले कर चोरी करने के हुनर सिखाए. साइकिल और बाइक चुराना उन के बाएं हाथ का खेल था. कबाड़ी बाजार में किस के पास सामान बेचना है, राकेश अच्छी तरह से ऐसे चोर दुकानदारों से परिचित था. चेन स्नैचिंग का काम भी राकेश का गु्रप बखूबी जानता था. इस काम में भी उन्हें महारत हासिल थी.
मुकुल भी जल्दी ही चोरी, जेब कतरना और चेन पर झपट्टा मारना अच्छी तरह सीख गया. जूही को खुश करने में अब उसे कोई दिक्कत नहीं हुई. इस बार उस ने जूही को महंगा मोबाइल ही गिफ्ट में नहीं दिया, बल्कि पांचसितारा होटल में उसे बर्थडे पार्टी भी दी. जूही मुकुल जैसे बौयफ्रैंड को पा कर निहाल हो गई. मुकुल तो उस के सपनों का राजकुमार बन गया.
एक दिन राकेश ने मुकुल के साथ मिल कर चेन स्नैचिंग की योजना बनाई. राकेश कई दिनों से दिल्ली के मौडल टाउन महल्ले की रेकी कर रहा था. उस ने जान लिया था कि शाम के समय कौनकौन सी महिलाएं प्रतिदिन डेयरी से दूध लाती हैं और कौन सी महिलाएं सब्जी ले कर सब्जीमंडी से लौटती हैं.
उस के लक्ष्य पर कमला देवी थीं जो अकेली ही आतीजाती थीं. उन के गले में सोने की चमचमाती चेन उस के लालच को बढ़ाती थी.
राकेश ने सारी बातें मुकुल को अच्छी तरह से समझा दी थीं. चेन पर झपट्टा मार कर उसे छीनना इतना मुश्किल काम नहीं था, जितना उस के बाद मोटरसाइकिल पर बैठ कर भागना. चेन पर झपट्टा मारने का काम मुकुल को मिला और मोटरसाइकिल की ड्राइविंग करने का काम राकेश ने अपने पास रखा.
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योजना के मुताबिक मुकुल ने बड़ी सफाई से अपने काम को अंजाम दिया. चेन पर झपट्टा मारा, कमला देवी को धक्का दे कर नीचे गिराया जिस से उन्हें उठने में देरी हो जाए और इसी बीच वे निकल भागे.
चेन छीन कर मुकुल पलक झपकते ही राकेश के पीछे मोटरसाइकिल पर आ बैठा. राकेश ने मोटरसाइकिल को तेजी से भगाया लेकिन एक आवारा सूअर उन के सामने आ गया. सूअर तो निकल भागा लेकिन उन की मोटरसाइकिल का संतुलन गड़बड़ा गया और दोनों मोटरसाइकिल सहित नीचे गिर गए.
तब तक कमला देवी के शोर को सुन कर महल्ले के लोग उन के पीछे दौड़ पड़े थे. उन के मोटरसाइकिल से गिरते ही भीड़ ने उन को दबोच लिया. भीड़ ने उन की खूब पिटाई की.
तभी भीड़ में से एक महिला आगे बढ़ी. उन्हें मुकुल का चेहरा कुछ जानापहचाना लगा. उन्होंने मुकुल को ध्यान से देखा और उस से पूछा, ‘‘तुम दीवानचंद्र के बेटे मुकुल हो न?’’
मुकुल ने सुबकते हुए कहा, ‘‘जी, आंटी.’’
उस महिला ने मुकुल के गाल पर एक जोरदार तमाचा रसीद करते हुए कहा, ‘‘छी, तुम्हें शर्म नहीं आती इतने मेहनती और इज्जतदार बाप के बेटे हो कर इतना नीच काम करते हुए.’’
मुकुल की आंखों से अविरल आंसू बहने लगे.
वह महिला कोई और नहीं, मुकुल के पापा के साथ उसी प्राइवेट कंपनी में कार्यरत सहायक प्रबंधक सुशीला देवी थीं जो मुकुल के पापा दीवानचंद्र को भलीभांति जानती थीं. वे यह भी जानती थीं कि मुकुल की पढ़ाई के लिए मुकुल के पापा दिनरात कैसे एक किए रहते हैं.
सुशीला देवी ने मुकुल के पापा को फोन किया और महल्ले के लोगों को सारी बातों से अवगत कराते हुए मामले को थाने जाने से रोका. जब महल्ले के लोगों को सारी जानकारी हुई तो वे भी भौचक्के रह गए कि कैसे एक प्रतिष्ठित विद्यालय के छात्र अपनीअपनी गर्लफ्रैंड्स को खुश करने के लिए चोरी और चेन स्नैचिंग के काम में लगे हुए हैं.
जल्दी ही मुकुल और राकेश के मम्मीपापा घटनास्थल पर पहुंच गए. उन की आंखें शर्म से नीचे गड़ी हुई थीं. मुकुल और राकेश तो अपने मम्मीपापा से नजरें भी नहीं मिला पा रहे थे. मुकुल ने अपने मम्मीपापा के पैरों में गिरते हुए कहा, ‘‘पापा…मम्मी…मुझे माफ कर दो, ऐसी गलती अब कभी नहीं करूंगा.’’
‘‘मुकुल, मुझे तुम पर कितना नाज था. लेकिन तुम नहीं जानते तुम ने क्या किया? तुम ने मेरी जिंदगीभर की कमाई हुई इज्जत और मानसम्मान एक क्षण में धूल में मिला दिया जो अब कभी वापस नहीं आ सकते,’’ मुकुल के पापा ने कहा.
यह सुन कर सब की आंखें नम हो गईं. सब प्रत्यक्ष देख रहे थे कि औलाद की एक हरकत किस प्रकार से मांबाप का मुंह नीचा करा देती है.
सुशीला देवी मामले को संभालते हुए भीड़ में से उन्हें अपने घर ले गईं. कमला देवी को भी उन्होंने अपने ही घर बुला लिया.
मुकुल और राकेश ने कमला देवी से भी माफी मांगी और भविष्य में कभी ऐसी हरकत न करने का वादा किया. उस के बाद सब अपनेअपने घर चले गए.
मुकुल और उस के मम्मीपापा को उस रात नींद नहीं आई. मुकुल ने प्रायश्चित्त करते हुए अपने मम्मीपापा को सारी बातें सचसच बता दीं. तब उस के पापा ने कहा, ‘‘बेटा, तुम उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हो, जहां तुम अब मेरे बेटे ही नहीं, बल्कि दोस्त समान हो. तुम मेहनत करो, तुम्हें जूही क्या, उस से भी अच्छी जीवनसाथी मिल जाएगी. लेकिन पहले पढ़ाई कर के इस लायक बनो तो सही. चोर बन कर तो तुम जूही को भी नहीं पा सकोगे.’’
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पापा की बात सही निकली. जब जूही को मुकुल की हरकत का पता चला तो उस ने मुकुल को ‘चोर’ कह कर उस से सारे नाते तोड़ लिए. उस के दिए गिफ्ट भी उस को वापस कर दिए. मुकुल जरा सा मुंह ले कर रह गया था.
अब मुकुल को सही सबक मिल गया था. उसे अब अपने मम्मीपापा ही सच्चे मित्र नजर आ रहे थे. वह अब समझ गया था कि भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए सही मार्गदर्शक कौन हो सकते हैं. वह अब पढ़ाई करने में जीजान से जुट गया. उसे दिखाना था कि वह चोर नहीं, अपने मांबाप का लायक बेटा है.