36 साल की प्रिया प्राइवेट ऑफिस में सीनियर एग्जीक्यूटिव है. उस का एक प्यारा सा बच्चा भी है. पति मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं. देखने से लगता है कि वह एक पूर्ण और खुशहाल जिंदगी जी रही है. मगर असल में वह बेहद तनाव भरी जिंदगी जी रही है. दिन भर ऑफिस के झमेले और रात में पति से लड़ाई झगड़ा. सुबहशाम बच्चे को संभालने की टेंशन और बाकी समय सास के तानो की चुभन.
दरअसल शादी के बाद से ही प्रिया और उस के हस्बैंड की कभी भी नहीं बनी. दोनों के ख्यालात नहीं मिलते. घर से जुड़े किसी भी फैसले में उन की सहमति नहीं बनती. छोटीछोटी बातों पर उन के बीच ईगो आड़े आ जाता है. दोनों ने अब तक का सफर लड़तेझगड़ते ही पूरा किया है और उस पर बीचबीच में सास के द्वारा आग में घी डालने की आदत रिश्ता बिगाड़ने का ही काम करती है. बकौल प्रिया शादी के बाद उस की जिंदगी नरक बन गई है.
ऐसा नहीं है कि प्रिया के पिता ने शादी से पहले पूरी तफ्तीश नहीं कराई थी. शादी से पहले लड़के और उस के घर की पूरी छानबीन कराई थी. यही नहीं शादी से 2 साल पहले ही उन्होंने ज्योतिषी के आगे अपनी बेटी की कुंडली रख दी थी. कुंडली में गुण न मिलने की वजह से कई लड़कों को नकार भी दिया गया था. मगर उन्हें क्या पता था कि इतनी मेहनत से सेलेक्ट किए गए लड़के के साथ पूरे रीतिरिवाजों के साथ की गई शादी का यह हश्र होगा.
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कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है. प्रिया के पिता लगातार पंडितों द्वारा बताए जा रहे उपायों को आजमा रहे हैं. पढ़ीलिखी प्रिया भी लगातार आँख बंद कर के पिता और पंडितों द्वारा दिए जा निर्देशों का पालन करती आ रही है. मसलन प्रिया रोज सुबहसुबह राम दरबार के आगे घी का दीपक जलाती है. शुक्रवार को मीठी चीजों का दान करती है. चमेली के तेल में सिंदूर मिला कर पेस्ट बनाती है और फिर पान के पत्ते पर सिंदूर से सीताराम लिख कर संध्या काल में मंदिर में रख कर आती है. हर शनिवार को शाम में पीपल के नीचे सरसों के तेल का दिया भी जलाती है.
दरअसल बच्चों के बड़े होते ही माँबाप की पहली चिंता होती है उन के लिए योग्य जीवनसाथी की तलाश और यह तलाश पूरी करने के लिए लोग पहुँच जाते हैं ज्योतिषी या पंडित की शरण में.
ज्योतिषी के आगे बच्चों की जन्मकुंडली रखते हुए घरवालों को अहसास होता है जैसे ज्योतिषी ही उन के सुखद वैवाहिक जिंदगी की गारंटी दे सकता है. ज्योतिषी द्वारा बच्चों की कुंडली मिलाना ही सब कुछ है.
असल में रिश्ते आपसी विश्वास और प्रेम की बुनियाद पर टिके होते हैं न कि बेफालतू के टोनेटोटकों पर. पतिपत्नी के बीच यदि आपसी समझ और त्याग की भावना हो तो किसी भी तरह के घरेलू विवाद उन के बीच तनाव पैदा नहीं कर सकते. मगर हमारे यहां शुरू से ही आपसी तालमेल के बजाय ज्योतिषीय घालमेल पर ज्यादा जोर दिया जाता रहा है.
विवाह पूर्व कुंडली मिलान या गुण मिलान को अष्टकूट मिलान या मेलापक मिलान कहते हैं. इस में लड़के और लड़की के जन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है.ज्योतिषशास्त्र ने मेलापक में अलगअलग आधार पर गुणों की कुल संख्या 36 निर्धारित की है जिस में 18 या उस से अधिक गुणों का मिलान विवाह और दाम्पत्य सुख के लिए अच्छा माना जाता है.
अष्टकूट मिलान में वर्ण, वश्य, तारा, योनि, राशीश (ग्रह मैत्री), गण, भटूक और नाड़ी का मिलान किया जाता है. अष्टकूट मिलान ही काफी नहीं है. कुंडली में मंगल दोष भी देखा जाता है, फिर सप्तम भाव, सप्तमेश, सप्तम भाव में बैठे ग्रह, सप्तम और सप्तमेश को देख रहे ग्रह और सप्तमेश की युति आदि भी देखी जाती है.
ज्योतिषियों और पंडितों द्वारा लोगों के दिमाग में यह बात पूरी तरह भर दी गई है कि पतिपत्नी के बीच ग्रहों की मित्रता आपसी तालमेल निर्धारित करती है. दोनों के ग्रह ही पतिपत्नी के संबंध को अच्छा बनाते हैं. पति के लिए अच्छा वैवाहिक जीवन शुक्र से आता है. पत्नी के लिए यह काम बृहस्पति करता है. पतिपत्नी का आपसी सम्बन्ध और तालमेल कुल मिला कर बृहस्पति और शुक्र पर निर्भर करता है. जब शुक्र या बृहस्पति कमजोर हों तो वैवाहिक जीवन में काफी समस्याएं आती हैं. ये समस्यायें शनि , मंगल , सूर्य , राहु और केतु से काफी बढ़ जाती हैं और चन्द्र , बुध और बृहस्पति इन समस्याओं को कम करते हैं.
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इतना सब करने के बाद भी यदि रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच जाए तो जो उपाय बताए जाते हैं वे बेसिरपैर के होते हैं.
पते की बात यह है कि ज्योतिष के चक्कर में पड़ने से कुछ नहीं होता. शादी से पहले एकदूसरे को समझना और परखना जरूरी होता है. जीवनसाथी से आप के गुण नहीं बल्कि ख्यालात और सोच मिलनी चाहिए. मानसिक स्तर समान हो तो रिश्ते अधिक टिकते हैं. इसलिए शादी तभी करें जब आप को मनपसंद जीवनसाथी मिले.
सिर्फ रस्म निभाने या लोगों का मुंह बंद करने के लिए शादी करना उचित नहीं है. कई लड़कियाँ अपने भविष्य की चिंता में कैसे भी लड़के से इसलिए शादी कर लेती हैं क्यों कि उन के रिश्तेदार और पड़ोसी हर मोड़ पर उन्हें भय दिखाते हैं कि समय पर शादी न हुई तो उन का भविष्य खराब हो जाएगा.
पर जरा इस बात पर गौर जरूर करें कि यदि सही लड़के से शादी नहीं की गई तो क्या भविष्य के साथसाथ वर्तमान भी खराब नहीं हो जाएगा? लड़तेझगड़ते, एकदूसरे के खिलाफ जहर उगलते और तानों के बाण चलाते हुए जीने से बेहतर है कि थोड़ा धैर्य रखें और जिस के लिए दिल स्वीकृति दे उसी से शादी करें. ताकि बाद में अपने ही फैसले पर आप को पछताना न पड़े.
यदि लाख कोशिशों के बावजूद आप दोनों अपने रिश्ते को संभाल नहीं पा रहे हैं तो भी लड़तेझगड़ते रिश्ते निभाते जाने से बेहतर है कि आप एकदूसरे से अलग हो जाए. ऐसा न करने का मतलब है खुद को और अपने बच्चों को मेंटली टॉर्चर करना. छोटे बच्चों पर मांबाप की लड़ाई का बहुत बुरा मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है. इस सन्दर्भ में सिंबा गर्ल सारा अली खान का यह वक्तव्य काफी मायने रखता है जब वह एक इंटरव्यू के दौरान कहती हैं ,” ऐसे घर में रहना कभी अच्छा नहीं होता है जहां लोग खुश न रहें. मेरे माता-पिता दोनों खुश, बिंदास और कूल हैं. यदि वे एक साथ होते तो शायद ऐसे नहीं होते.
” मुझे लगता है कि उन्हें भी यह महसूस हो चुका है. शुक्र है कि अब मेरे पास एक के बजाय 2 खुशहाल और सिक्यॉर घर हैं.”
सच है कि उम्र भर एकदूसरे को झेलते रहने से लाख गुना अच्छा है अलग हो जाना और दोस्तों की तरह अलग रह कर भी साथ निभाना. टूटे हुए रिश्ते से अलग हो कर आप चाहें तो नए रिश्ते में बध जाएँ या फिर सुकून के साथ अकेले रहे. दोनों ही मामलों में आप बेहतर जिंदगी का अहसास कर पाएंगे.