कितनी अजीब बात है कि हमारे पास जो नहीं होता है. हम उसी के लिए वियोगी हरि बने बैठे रहते हैं. अभी तक कल तक कि बात थी कि रिया मसरूफियत की नयी दास्तां लिख रही थी. मार्च का महीना मतलब कालेज में परीक्षा, रिजल्ट, नया साल और न जाने क्या क्या अपने बाल गोपाल के इम्तिहान का टेंशन और मार्च क्लोजिंग के नाम का पति वक्त बेवक्त घर आना रिया के लिए परेशानी का सबब बन गया था. रोज की भागा दौड़ी और समय पर कालेज पहुँच ने की हड़बड़ी से आजिज आ गयी थी और आज हाउस अरेस्ट के दस ही दिन में दिमाग का बावरा पन बाहर आ गया था.
बारहवीं की परीक्षा की कापियों के मूल्यांकन के आखिरी दिन जब रात के आठ बजे गए तो रिया ने प्रभु से करबद्ध प्रार्थना की” हे भगवान कुछ दिनों की छुट्टियां दिला दो, ऐसी छुट्टी दिलाना की घर से दो कदम भी बाहर नहीं निकलना पड़े,या सारे काम घर बैठे बैठे ही हो जाए.”
थोड़े आराम के लालच में आ कर जो दुआ रिया ने की थी. उसको भगवान इतनी जल्दी अंगिकृत कर देंगे इसका रिया को जरा सा भी इल्म न था. वरना वो यदि जानती कि भगवान इंस्टेंट 24 घंटे के अंदर वरदान देने के लिए बैठे हुए हैं तो वो अपने लिए बंगला, मोटर कार और थोड़ा आराम भी माँग लेती.
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खैर अगले दिन रात को आठ बजे टेलीविजन की स्क्रीन पर अरबों देशवासियों के भाग्य विधाता प्रकट हुए और उन्होंने घोषणा कर दी कि आज रात 12 बजे से सारे भारत वर्ष का चक्का जाम रहेगा. लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने की मनाही है. पहले तो रिया को लगा कि चलो भगवान ने उसके मन की मुराद को पूरा कर दिया है.पर जब प्रधान ने काम वलियों, धोबिन, माली जैसे तमाम लोगों की पगार न काटने की अपील की, तब समझ में आया कि भगवान ने होलसेल में सबों की मुराद को सीरयसली लेकर तथास्तु का वरदान दिया है.
रिया अभी भगवान, कुदरत और हुक्मरान की मंशा को समझने की कोशिश ही कर रही थी कि विश्वविद्यालय से सूचना आ गयी कि सभी शिक्षकों को घर से ही छात्रों को इन्टरनेट के द्वारा पढ़ाना है. मतलब रिया को अब वर्क इन होम से लेकर वर्क फर्म होम के बीच सामंजस्य स्थापित करना था. अब एक तरफ तो घर के सारे काम रिया के मत्थे आ गए थे, वहीं दूसरी ओर घर से ही शिक्षण सामग्री तैयार कर महाविद्यालय के वेबसाइट पर डालना भी अपने आप में एक चुनौती थी. क्योंकि जब भी वो घर का सारा काम निपटा कर किताबों से रुबरु होने बैठती, किसी न किसी को कोई बहुत जरूरी काम याद आ जाता.
बच्चे अपनी भोली शक्ल के साथ हर कुछ मिनटों के बाद खाने की फरमाइश के साथ प्रस्तुत हो जाते. उसमें भी मम्मी की घर में मौजूदगी मतलब अच्छा खाना और नहीं बनाने पर बच्चों का इमोशनल ड्रामा अलग. हर दिन फरमाइशों की लम्बी फेहरिस्त और साथ में हिदायतों का लम्बा ताना बाना.घर में बाकी सबों के लिए भले यह वक्त काटे नहीं कट रहा हो.पर रिया को ऐसा लगता मानों उसकी घड़ी की सुइयाँ उससे नाफरमानी कर रही है. घर से काम और घर के काम में उलझी रिया ने अपने आप से ये वादा कर लिया है कि अब वो भगवान से ऐसी कोई दुआ नहीं मांगेगी.