वसा का नाम सुनते ही हम यह सोचते हैं कि ये तो हमारी हैल्थ के लिए अच्छी नहीं होती हैं . क्योंकि हम अब तक यही सुनते आए हैं कि वसा दिल के दौरे, उच्च कोलेस्टरोल और यहां तक की वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती है. लेकिन शोध बताते हैं कि सभी वसा एक जैसी नहीं होती. कुछ वसा ख़राब होती है तो कुछ अच्छी वसा मधुमेह, उच्च कोलेस्टरोल व उच्च रक्तचाप से बचाती है. कह सकते हैं कि स्वस्थ वसा हमें हिरदे रोग और ख़राब आहार और जीवन शैली की आदतों से जुड़ी अन्य स्वास्थ समस्याओं के बढ़ते जोखिम से बचा सकती हैं. आइए जानते हैं इस बारे में न्यूट्रिशनिस्ट प्रीति त्यागी से.
भारत में दिल की बीमारियों के आंकड़े चिंताजनक है. पुरुषों और महिलाएं के साथसाथ अब बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी भी दिल की बीमारियों से पीड़ित हो रही है, जो काफी चिंताजनक है. अधिक से अधिक युवा भारतीय कोरोनरी धमनी की बीमारी से पीड़ित हैं. भारत को पहले से ही दुनिया की मधुमेह राजधानी के रूप में देखा जाता है. हर साल बढ़ते रोगियों के कारण जल्द ही भारत को विश्व की कोरोनरी हिरडीए रोग राजधानी भी कहा जाएगा.
वर्तमान अध्धयन के अनुसार, भारत में जल्द ही दुनिया के मुकाबले में हिरडीए रोगों की संख्या सबसे अधिक होगी. इंडियन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, शहरो में रहने वाली आबादी को गांवों में रहने वाले लोगों की तुलना में दिल के दौरे का खतरा 3 गुना ज्यादा होता है.
ह्रदय रोगों के प्रमुख कारण
युवा भारतीयों में दिल की बीमारियों के बढ़ते प्रसार के पीछे प्रमुख कारण ख़राब जीवन शैली और आहार है. जिसके लिए ये चीज़ें जिम्मेदार हैं.
– जंक और पैकेट खादय पदार्थों की बढ़ती खपत
– हर समय तनाव में रहना
– धूमपान व शराब का सेवन
– फल व सब्ज़ियों को अपने खानपान से गायब कर देना
क्या मूल कारण सूजन है
आपको बता दें कि ये चीज़ें धीरे धीरे आपके शरीर में सूजन की स्तिथि पैदा कर देती है, जो दिल की बीमारी का मुख्य कारण बनता है. पारंपरिक चिकित्सा से हमें ज्ञात होगा कि यह सभी उच्च संतृप्त वसा वाले आहार या अनुवांशिक या दोनों के संयोजन से सम्बंधित हैं . लेकिन इसके आलावा भी बहुत कुछ है. दुर्भाग्य से, बहुत कम डाक्टर ख़राब पाचन के बीच संबंध बताते हैं , जिसे हम सूजन पैदा होने के लिए जिम्मेदार मानते हैं. और यही हिरडीए रोगों के बढ़ने का कारण बनता है. दवाइओं से इसे कंट्रोल करने के साथ साथ हमें भी कुछ प्रयास करने जरूरी हैं, तभी हम इसे कंट्रोल कर पाएंगे.
धूमपान और मोटापे से बचना एक अच्छी शुरूआत है. लेलिन हमारे पेट में रहने वाले अच्छे बैक्टीरिया भी मदद कर सकते हैं. क्योंकि आपकी आंत की मौलिक भूमिका इम्यून प्रणाली पर निर्भर करती है. बता दें कि आपकी प्रतिरक्षा का लगभग 80 परसेंट आपकी आंत में निहित है.
my22bmi के अनुसार, कुछ आसान से उपाय बताए जा रहे है, जो आप अच्छे आंत स्वस्थ को सुनिश्चिंत करने के लिए कर सकते हैं. जो आपके समग्र स्वस्थ में सुधार लाने का काम करेगा.
आपको बता दें कि स्वस्थ वसा केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि ये शरीर के संपूर्ण विकास में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन हम वजन बढ़ने के डर से सबसे पहले वसा को ही अपनी डाइट से हटाते हैं. जबकि ये सही नहीं है. क्योंकि सभी फैट्स ख़राब नहीं होते। कुछ फैट्स हमारी हेल्थ के लिए फायदेमंद होते हैं ,जिसमें डाइटरी फैट्स मुख्य हैं.
क्या हैं डाइटरी फैट्स
डाइटरी फैट्स हमें पशु व पौधों से प्राप्त होता है. आपको बता दें कि डाइटरी फैट फैटी एसिड से बना है और फैटी एसिड 2 तरह के होते हैं, सैचुरेटेड एंड un सैचुरेटेड. हम unsaturated फैट को हैल्थी मानते हैं.
सैचुरेटेड vs unsaturated फैट
सैचुरेटेड फैट्स –
सैचुरेटेड फैट्स स्वस्था के लिए अच्छे नहीं होते, क्योंकि ये बैड कैलोस्ट्रोल के स्तर को बढ़ाते हैं, जिससे हिर्दय संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है.
unsaturated फैट –
unsaturated फैट आपके शरीर के लिए बेस्ट है. यह कमरे के तापमान पर तरल होते हैं और ज्यादातर सब्ज़ियों व मछली से प्राप्त किया जाता है. इसलिए आपके लिए सही प्रकार के वसा का संतुलन बनाए रखना बहुत जरुरी है.
हैल्दी रहने के लिए इन्हें शामिल करना न भूलें –
-ओमेगा 3 फैटी एसिड एक प्रकार की वसा है. जिसे आप हैल्दी फैट या पोली अन सैचुरेटिड फैट भी कह सकते हैं. जो हारमोन्स का निर्माण करने के साथसाथ शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करती है.इसके लिए आप नट्स, अलसी, सूरजमुखी के बीज, शलगम, सेलमन फिश, सोयाबीन आदि से आप भरपूर्ण मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड ले सकते हैं.
– फलों और सब्ज़ियों से भरपूर्ण आहार लेने से मधुमेह, दिल की बीमारियों व कैंसर का खतरा कम होता है. क्योंकि ये एंटीऑक्सीडेंट्स और फॉयतोकेमिकल का अच्छा स्रोत होते है. जो शरीर में सूजन को भी कम करने का काम करते हैं.
– एक ही तरह का आटा खाने से बचें. क्योकि ये पेट में सूजन पैदा करने का काम करता है. इसलिए हैल्थी रहने के लिए 2 – 3 तरह के आटे को जैसे रागी, जवार, बाजरा आदि को मिलाकर आटा तैयार करें।
– शरीर में विटामिन बी 12 की कमी को पूरा करने के लिए डाइट लेने के साथ साथ सुप्प्लिमेंट भी लें. क्योंकि इसकी कमी से ऊर्जा का स्तर धीमा होने के साथ चयापचय को भी धीमा कर देता है, और इससे शरीर में वसा के संचयों बढ़ावा मिलता है. इसके लिए आप फिश, अंडा, सब्ज़ियों व दूध व दूध से बनी चीज़ों को अपनी डाइट में शामिल करें.
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– विटामिन डी युक्त फ़ूड भी भरपूर्ण मात्रा में लें. क्योंकि इसकी कमी मोटापे को बढ़ावा देने का काम करती है.
– नट्स में भरपूर्ण मात्रा में प्रोटीन और वसा होता है, जो स्वास्थय के लिए काफी फायदेमंद होता है. साथ ही इससे हिरडीए से जुडी समस्याओं का भी खतरा कम होता है. क्योंकि यह ब्लडप्रेसर और कोलेस्ट्रोल को कम करने का काम करता है. इसलिए अपनी डाइट में गुड फैट्स को जरूर शामिल करें.