कुछ समय पहले तक शादी की तैयारियां करने के नाम से ही बड़ेबड़ों के माथे पर पसीना आ जाता था. शादी के दिन लड़की और लड़के के घर वाले, खास रिश्तेदार कामकाज में बेहद व्यस्त रहते थे. हैरानपरेशान घर वालों को दूर से ही देख कर पहचान लेना मुश्किल नहीं होता था. लेकिन समय के साथसाथ शादी के मौके पर होने वाली तैयारियों के लिए भी अब काम करने वाले लोग मिलने लगे हैं. ये शादी का इंतजाम करने के एवज में पैसे लेते हैं. अब सहूलियत यह हो गई है कि घर वाले भी नातेरिश्तेदारों की ही तरह सजेधजे नजर आते हैं, शादी का पूरा मजा लेते हैं. शादी में होने वाले सभी कामों का इंतजाम करने वालों का पूरा बाजार बन गया है. दूसरे बाजारों की ही तरह यहां भी हर काम का दाम देना पड़ता है.

एक अनुमान के मुताबिक शादी का यह कारोबार 50 से ले कर 100 हजार करोड़ रुपए तक फैल गया है और हर साल यह कारोबार 25% की दर से बढ़ता जा रहा है. शादी की तैयारियां करने वालों को मैरिज प्लानर के नाम से जाना जाता है. ये लोग शादी का खाना, शादी की जगह, खाने का स्टाल, मंडप, गेट, स्टेज की सजावट, शादी के कार्ड, फोटोग्राफी, विदाई की सजी हुई कार तक का इंतजाम करते हैं. मैरिज प्लानर इन के अलावा गहनों को खरीदने, शादी की थीम बनाने, शादी में पहने जाने वाले कपड़ों की डिजाइनिंग करने का काम भी करते हैं. कई लोग यह चाहते हैं कि उन के यहां होने वाली शादी में कोई बड़ा कलाकार भी शामिल हो, जिस से सोसाइटी में उन का स्टेटस बढ़ जाए. मैरिज प्लानर फिल्म अभिनेता शाहरुख खान से ले कर दूसरे अन्य कलाकारों तक को बुलाने का इंतजाम कर सकते हैं. इन मैरिज प्लानरों के भरोसे आप एमएफ हुसैन जैसे जानेमाने पेंटिंग आर्टिस्ट से शादी का कार्ड भी डिजाइन करा सकते हैं.

शाही अंदाज

शादी के लिए सब से पहले यह तय किया जाता है कि किस जगह पर शादी का आयोजन किया जाए. कुछ समय पहले तक मैरिज गेस्टहाउस ही एकमात्र विकल्प हुआ करते थे. अब गेस्टहाउस के बजाय खुले मैदान में पंडाल लगा कर शादी करने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. इस की सब से बड़ी वजह यह है कि खुले मैदान में सजावट ठीक तरह से हो जाती है. पार्टियों के शौकीन लोगों को खुले में पार्टी का मजा आता है. इस के अलावा बड़ेबड़े होटलों को भी शादी करने के लिए अच्छी जगह माना जाता है. जितना पैसा खर्च करने का मन हो, उसी हिसाब से होटल का इंतजाम किया जाता है. अब शहर के बाहर बने रिसोर्ट में भी शादी करने का रिवाज बढ़ रहा है.

जगह तय हो जाने के बाद बात आती है खरीदारी की. शादी में खरीदारी का सब से बड़ा बजट गहनों की खरीद का होता है. इस के बाद पोशाकों, जूतों और एक्सेसरीज का होता है. अब गहनों का शौक केवल औरतें ही नहीं रखती हैं, आदमी भी चेन, अंगूठी, इयररिंग पहनने लगे हैं. कई लोग तो अपने सूट के बटन में भी सोने अथवा हीरे की मांग करने लगे हैं. मैरिज का मार्केट बढ़ने का ही कारण है कि अब शादी में क्या पहना जाए, इस को ले कर प्रदर्शनियों का आयोजन भी होने लगा है.भारत के बाहर रहने वाले लोग अब अपने ही देश में शादी करने को पहली पसंद बना चुके हैं. वे एक ही जगह पर सारा सामान चाहते हैं. इन की जरूरतों को पूरा करने के लिए वेडिंग मौल तक बन चुके हैं, जहां एक ही छत के नीचे हर काम को पूरा कर दिया जाता है. विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अब अपनी परंपरा के हिसाब से शादी करना चाहते हैं. इसलिए शादी के सामान की खरीदारी वे एक ही जगह कर लेना चाहते हैं. इस के चलते मैरिज प्लानर का कारोबार बहुत तरक्की कर रहा है. दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय गोवा और जयपुर जैसी जगहों पर शादी करना चाहते हैं. साधारण तौर पर शादी का आयोजन करने के लिए मैरिज प्लानर लगभग 1,000 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से पैसा लेते हैं. इस में खाना, सजावट मंडप, स्टेज, फोटोग्राफी और बिदाई का खर्च शामिल होता है. बड़े शहरों में यह खर्च ज्यादा होता है.

फिल्मों का असर

आजकल की शादियों पर फिल्म और टीवी का असर बढ़ता जा रहा है. जिस तरह की पोशाक फिल्मों और टीवी सीरियलों में कलाकार पहनते हैं वैसी ही पोशाकें सभी लोग पहनना चाहते हैं. अपने को दूसरों से अलग रखने के लिए ये लोग पत्रिकाएं पढ़ते हैं. शादी में किस तरह के गहने और कपड़े पहनने चाहिए, किस तरह का मेकअप करना चाहिए, इस बात की जानकारी पत्रिकाओं से मिलती है. शादी के कार्यक्रम कईकई दिनों तक चलते हैं. इस में शामिल होने वाला हर आदमी रोजरोज नए डिजाइन के कपड़े पहनना चाहता है. शादी के इन कार्यक्रमों पर अपनी छाप छोड़ने के लिए महीनों पहले से लोग तैयारी करते हैं. इन के लिए हेयरस्टाइल, मेकअप और एक्सरसाइज पर ध्यान देते हैं. रिवैंप ब्यूटीपार्लर की ब्यूटी एक्सपर्ट रजनी सिंह कहती हैं कि दुलहन को शादी के लिए तैयार करने की महीनों पहले शुरुआत हो जाती है. इस से लड़की की त्वचा में चमक आती है. शादी के दिन मेकअप मौसम के हिसाब से करना चाहिए.

सालसा डांस की टे्रनिंग देने वाली नंदिता बाहरी का कहना है कि लेडीज संगीत के दौरान गाने और डांस करने का रिवाज बढ़ रहा है. इसलिए जिन घरों में शादी होती है, उन घरों के लड़केलड़कियां डांस और गाना सीखने की टे्रनिंग लेने जाते हैं. इस की खास वजह यह होती है कि अब शादी में केवल फोटो ही नहीं खींचे जाते बल्कि वीडियो फिल्म भी बनती है. इस में सुंदर दिखने के लिए फिल्मी कलाकारों की तरह बनावशृंगार भी किया जाता है.

थीम वेडिंग का चलन

शादी का आयोजन अब स्टेटस सिंबल बन गया है. हर आदमी यह चाहता है कि उस के यहां होने वाली शादी का आयोजन यादगार बन जाए. इस के लिए शादी की पार्टी की एक थीम तैयार की जाती है. यह थीम कई तरह की होती है. थीम तैयार करते समय इस बात की कोशिश की जाती है कि थीम पूरी तरह से नई हो. इस तरह की थीम पार्टी में खेल का मैदान, अरेबियन नाइट, राजस्थानी गांव और पानी के अंदर का माहौल तैयार किया जाता है. थीम पार्टी में सबकुछ थीम के हिसाब से ही बनाया जाता है. इस तरह की पार्टी का आयोजन करने वाले मोक्ष इवेंट के संजय निगम कहते हैं कि अगर पार्टी की थीम राजस्थानी रखी जाती है तो शादी वाली जगह को पूरी तरह राजस्थानी बनाया जाता है. मैदान में रेत डाल कर उसे रेतीला बनाया जाता है. दूल्हादुलहन को भी राजस्थानी लिबास पहनाया जाता है. कोशिश यह भी की जाती है कि आने वाले मेहमान भी उसी तरह की पोशाकों में हों.

सस्ते पड़ते हैं मैरिजहाल

खुले मैदान में शादी करने के मुकाबले मैरिजहालों में शादी करना कम खर्चीला होता है. यहां पर पंडाल लगाने का खर्च बच जाता है. लाइट का खर्च भी कम ही आता है. मैरिजहाल में शादी करते समय थोड़ा होशियार रहने की जरूरत होती है. अकसर मैरिजहाल चलाने वाले कैटरिंग, सजावट, मंडप, बाजा, गेट, स्टेज और फूलमाला जैसे दूसरे काम भी करते हैं. खाना किस तरह का होता है, इस को परखने के लिए वहां पर होने वाली किसी शादी में आयोजक की अनुमति ले कर देखा जा सकता है. मैरिजहाल का चयन अपनी जरूरत के हिसाब से ही करें. अगर मेहमान ज्यादा हों तो बड़ा हाल और कम हों तो छोटा हाल ही चयन करें. शादी में अपनी हैसियत के हिसाब से ही खर्च करें. आजकल दिन में शादी का प्रचलन भी शुरू हो रहा है. इस के जरिए कई तरह के खर्चें कम किए जा सकते हैं. 

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