आजकल मेट्रो सिटीज में वेडिंग इंश्योरेंस के प्रति लोगों की रुचि अच्छीखासी बढ़ रही है. शादियों में लोग अच्छाखासा पैसा खर्च कर रहे हैं. लेकिन आजकल जितनी सुविधाएं हैं उतना ही जोखिम भी है. यदि कोई दुर्घटना हो जाए तो शादी वालों की स्थिति डांवांडोल हो जाती है. ऐसी स्थिति में वेडिंग इंश्योरेंस मददगार साबित होता है. जहां हम लाखों रुपए खर्च करते हैं वहां चंद और रुपए खर्च कर के जोखिम भरी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है.

क्या है वेडिंग इंश्योरेंस

इसे इवेंट इंश्योरेंस भी कहते हैं. यह शादी में होने वाली दुर्घटना और जानमाल की हानि से बचने के लिए कराया जाता है. इस में 6 भाग होते हैं :

प्रिंटेड तिथि : इस में शादी की तिथि के 7 दिन पहले यदि शादी वेन्यू में कोई आगजनी, कोई दुर्घटना या दंगाफसाद हो तो वह इस भाग के तहत कवर होता है.

पर्सनल दुर्घटना : इस भाग में सगे परिवार के किसी सदस्य जैसे – दूल्हे के मातापिता, भाईबहन या फिर परिवार के किसी अन्य सदस्य के साथ कोई दुर्घटना होती है तो ये सब इस पालिसी के अंतर्गत आते हैं. शर्त यह होती है कि इन का नाम पालिसी में लिखा होना चाहिए. जैसेजैसे लोग बढ़ते जाते हैं वैसेवैसे पालिसी का प्रीमियम भी बढ़ता जाता है.

संपत्ति को नुकसान : इस में संपत्ति को शामिल किया जाता है, जिस में शादी की जगह तथा घर की डेकोरेटिंग में आग से नुकसान शामिल होता है.

मनी मैटर : इस भाग के अंतर्गत आप के रुपयों का रिस्क कम हो जाता है. आप ने जो मनी सेव की है उस की सुरक्षा रहती है.

चोरी : यदि शादी के समय घर में चोरी आदि हो जाए तब आप को इस पालिसी के अंतर्गत कवरेज मिल सकता है.

पब्लिक लिबेरेलाइजेशन : किसी कारण से शादी में आए मेहमानों के साथ कोई अनहोनी घट जाए तो वह भी कवर हो जाता है.

बीमे की राशि

इस में 20 हजार से 70 लाख रुपए का बीमा होता है. इस के प्रीमियम की राशि 3 हजार रुपए से शुरू होती है और जोखिम के साथसाथ प्रीमियम की राशि भी बढ़ती जाती है, जो 15 हजार रुपए तक भी हो सकती है.

कब होगा कवर

शादी की जगह या दूल्हेदुलहन के घर की सजावट में आगजनी होने पर.

कीमती सामान की चोरी होने पर.

फूड प्वाइजनिंग होने पर.

शादी के इंतजाम में जिन चीजों की अग्रिम राशि दी जा चुकी है जैसे- मैरिज हाल, कैटरिंग, डेकोरेर्ट्स, कमरे आदि की व्यवस्था, उन की कवरेज.

कब नहीं होगा कवर

बालविवाह के अंतर्गत नहीं आएगा.

जानबूझ कर सारी व्यवस्था करने के बाद शादी रुकने या रोकने पर.

यदि दूल्हादुलहन या उन के मातापिता ने कोई अपराध किया हो.

दोनों पक्षों में झगड़ा होने पर शादी स्थगित होने पर.

कैसे कराएं बीमा

सर्वप्रथम जिस कंपनी से आप बीमा करा रहे हैं उस का फार्म भरना पड़ता है, जिस के अंतर्गत नाम, पता, शादी की जगह सहित फोन नंबर भी भरना होता है.

फार्म में लिखित सारी सूचनाएं भरनी पड़ती हैं.

शादी का कार्ड जमा कराना पड़ता है.

ज्वेलरी की रसीदों की फोटोकापी नत्थी करनी पड़ती है.

मैरिज हाल, कैटरिंग, डेकोरेशन वाले को दिए रुपयों की रसीदें सब की कार्बन कापी जमा करानी पड़ती है.

बीमा कराते समय जिनजिन व्यक्तियों को इस के अंतर्गत शामिल किया जाना है उन के नाम व पता लिखना पड़ता है

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