हर मुमकिन तरीके से लोगों को कोरोना वाइरस के विषय में जानकारी दी जा रही है लेकिन जनसंख्या का एक हिस्सा उन लोगों का भी है जो विकलांग हैं और उन तक इस जानलेवा वाइरस की जानकारी साधारण तरीकों से हट कर पहुंचाने की जरूरत है. विकलांगता दो प्रकार की होती है, शारीरिक और मानसिक. दोनों ही रूपों में यह व्यक्ति को सामान्य लोगों से किसी न किसी तरह से अलग बनाती है जिस के कारण उन्हें इस महामारी में अत्यधिक सावधानी बरतनी की आवश्यकता है. उन्हें विभिन्न तरीकों से समझाया जा सकता है कि हाथ धोना, खुद को सब से अलग रखना, मास्क पहनना और वाइरस की चपेट में आने से बचने के लिए क्याक्या किया जा सकता है.
विकलांग व्यक्तियों को कोरोना वाइरस की जानकारी निम्न तरीकों से दी जा सकती है:
जो व्यक्ति देखने में असमर्थ हों उन्हें कोरोना के बारे में औडियो अवेयरनेस प्रोग्राम सुना कर सतर्क किया जा सकता है या ब्रेल लिपि द्वारा समझाया जा सकता है.
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वे व्यक्ति जो सुन नहीं सकते उन्हें पोस्टर्स और हाथों के मूवमेंट्स द्वारा कोरोना की जानकारी देनी चाहिए.
मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए कोविड-19 को समझना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में पारिवारिक सहयोग की बेहद आवश्यकता होती है. परिवार के लोग उन्हें वाइरस के बारे में बताएं, वे न भी समझें तो बारबार हाथ धोने के लिए कहें और बाहर निकलने से रोकें.
उन्हें बताएं कि उन्हें किसी से भी खाना या बर्तन शेयर नहीं करने हैं. किसी से कम से कम 3 फुट की दूरी पर खड़े हो कर बात करनी है.
अगर ग्लव्स नहीं पहनें हैं तो हाथ से दरवाजा या दरवाजे के बाहर की किसी चीज को नहीं छूना है बल्कि कोहनी से छूने की कोशिश करना है.
अपने फोन और किसी भी डिजिटल यूज के उपकरण को सेनीटाइज करते रहना है.
यदि मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति को हाथ धोने की समयसीमा बतानी है तो उसे 20 सेकंड का कोई गाना या हैप्पी बर्थडे दो बार गाने को कहें और बताएं कि उन्हें इतनी ही देर हाथ धोने हैं.
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यदि अतिआवश्यक न हो तो डाक्टर के पास रूटीन चेकअप के लिए जाना स्किप करें.
विकलांग व्यक्तियों के लिए यह समय मुश्किल हो सकता है क्योंकि बिना किसी के संपर्क में आए ऐसे बहुत से काम है जो उन के लिए करने मुमकिन नहीं हैं. इस स्थिति में बेहद जरूरी है कि वे घर में ही रहें और अपने परिवार के सदस्यों से ही मदद लें. खुद को ज्यादा से ज्यादा स्वच्छ रखें और वाइरस की चपेट में आने से बचे रहें.