Manoj Kumar : लीजेंड एक्टर मनोज कुमार आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके चाहने वालों के दिलो में 87 वर्षीय मनोज कुमार हमेशा जिंदा रहेंगे. क्योंकि मनोज कुमार सिर्फ अच्छे एक्टर ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन फिल्म मेकर भी थे , मनोज कुमार द्वारा निर्देशित फिल्में उपकार, शोर , रोटी कपड़ा और मकान, क्रांति आदि फिल्मे आज भी याद की जाती है.
फिल्मों में अपना सशक्त योगदान देकर फिल्म इतिहास के पन्नों में मनोज कुमार ने अपना नाम सुनहरे अक्षरों से लिख लिया है यही वजह है कि उनके अनगिनत प्रशंसक हैं जिसमें से एक बौलीवुड के प्रसिद्ध डायरेक्टर अनिल शर्मा है. जो मनोज कुमार को अपना गुरु मानते हैं, अनिल शर्मा के अनुसार बचपन से वह मनोज कुमार की फिल्में देखकर ही बड़े हुए हैं.
अनिल शर्मा मनोज कुमार को लेकर अपनी बचपन की यादें ताजा करते हुए बताते हैं जब मैं छोटा था और मथुरा में रहता था तो वहां पर शहीद फिल्म रिलीज हुई थी वह फिल्म अपने दोस्तों के साथ मैने देखी . उस फिल्म का प्रभाव हम पर इतना ज्यादा पड़ा कि हम बच्चों ने शहिद नाटक करने के बारे में सोचा और इसके लिए हम फांसी पर लटकाने को भी तैयार हो गए और जब हम सच में फांसी पर लटकने के लिए फंदा बनाकर नाटक के समय सही में लटकने वाले ही थे तो हमें कुछ लोगों ने पकड़ लिया और बहुत डाटा. क्योंकि हम जोश जोश में सही में फंदा गले में डालकर फांसी लगाने वाले थे.
बचपन में सिर्फ जोश ही होता है अकल थोड़ी कम होती है. लेकिन फिल्म शहिद का प्रभाव इतना था कि हम कुछ भी करने को तैयार थे. अपने गुरु मनोज साहब की फिल्म देखने के बाद ही मैं मुंबई आया और फिल्म निर्माण करने के बारे में संघर्ष करना शुरू किया. मैं आज जो भी कुछ हूं अपने गुरु मनोज कुमार की वजह से ही हूं मैने उनकी सारी फिल्में देखी हैं . लेकिन उपकार और पूरब पश्चिम ने मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित किया इस फिल्म के गाने, जीरो दिया मेरे भारत ने… है प्रीत जहां की रीत सदा,एक एक गाने और एक एक सीन मेरे दिमाग में बैठा हुआ है. आज भले ही वह हमें छोड़ कर चले गए, लेकिन मेरे दिल में वह हमेशा जिंदा रहेंगे.