इश्क सुभान अल्लाह फेम अभिनेता अदनान खान दुबई से है,बचपन से ही उन्हें फिल्म देखने का शौक था. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने थोड़े समय के लिए जॉब किया,लेकिन उन्हें ये काम पसंद नही आया और वे अभिनय और डायरेक्शन की ओर मुड़े. शुरुआत में उन्होंने दुबई में शूट कर शॉर्ट फिल्म ’बबल’बनाई, जो इंटरनेशनली फेमस हुई और कई अवॉर्ड्स भी जीती.

इसके बाद उन्होंने मुंबई आने का प्लान बनाया और एक्टिंग में जाने का मन बनाया,इसके लिए उन्होंने अनुपम खेर की एक्टिंग क्लास में दाखिला लिया और कई नाटकों में काम किया, इससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली.

Adnan khan

अभी सोनी टीवी पर उनकी शो कथा अनकही आ रही है, जिसमें उन्होंने वियान की मुख्य भूमिका निभा रहे है. किसी सही शो को चुनना अदनान के लिए आसान नहीं होता,ऐसे में अदनान अपनी भूमिका में कुछ खास बातों को देखते है, वे कहते है कि किसी भूमिका के बारे में मैं अधिक नही सोचता. केवल पिछले शो की भूमिका से अलग चुनने की कोशिश करता हूं. मैं अधिक डार्क या शेकी भूमिका में काम नहीं करना चाहता,जिससे मैं रीलेट न कर सकूं.

चरित्र ने बदला मुझे

इस शो में वियान का चरित्र बहुत सुंदर है, इसमें बचपन से ही वियान की सोच को काफी अलग दिखाया गया है

इसके आगे अदनान कहते है कि वियान का चरित्र बहुत ही आकर्षक और चुनौतीपूर्ण है, इसमें एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका है, जिसके जीवन में बहुत सारी चीज़ें घटती है,लेकिन वह उसे प्रकट नही करता. जब उसके जीवन में एक ऐसे चरित्र का प्रवेश होता है,जिससे उसकी दुनिया बदल जाती है. इस किरदार से मैं खुद को रीलेट कर पाता हूं, क्योंकि मैंने अपने जीवन में ऐसी कई लड़कियों से मिला,जो पैसे को प्यार से अधिक महत्व देती है और उन्हें किसी के जीवन से बीच रास्ते में निकल जाने में समय नहीं लगता. इस चरित्र को करने के बाद से मुझमें अंतर आया है और अब ऐसे कई उदाहरण , मेरे पास है, जिसमें मैंने महिलाओं की कामयाबी और सफ़लता को दिल से माना है. मैं उन सभी को सम्मान भी देता हूं,जिसमें मेरी मां का स्थान सबसे ऊपर है.

मिली प्रेरणा

एक्टिंग का शौक बचपन से अदनान को रहा, उन्हें फिल्में देखने का भी बहुत शौक था. अभिनय की प्रेरणा के बारे में पूछने पर वे कहते है कि मैं दुबई का हूं और बचपन से मुझे कहानियां, कविताएं और कोट्स लिखने का बहुत शौक था. दुबई में एक्टर्स कम होते है, वहां एक्टिंग में जाने की कोई कल्चर नहीं है. मैंने एक एक्टर विल्समिथ की अंग्रेज़ी फिल्म ’सेवन पाउंड्स’ देखा और इस फिल्म ने मेरी जिंदगी बदल दी. उस फिल्म की एक्टिंग मेरे अंदर बस गई.

मिला परिवार का सहयोग

अभिनय में आने के लिए अदनान को न तो किसी ने मना किया और न ही वाहवाही की. उनका कहना है कि सभी ने दिल से कोशिश करने की सलाह दी. मेरी मां को फिल्मों से कोई लगाव नहीं है, लेकिन उन्होंने भी रोका नहीं.

रहा संघर्ष

मुंबई आने के बाद अदनान को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि वे किसी को जानते नही थे, उनके जो दो तीन लोग जानने वाले थे, वे भी हेल्प नही कर पाए. ऐसे में उन्होंने अनुपम खेर की एक्टिंग क्लास में दाखिला लिया और वहां उन्हें कई दोस्त मिले, जो एक्टिंग सीखने आए नए छात्र थे. इसलिए सभी मिलकर सुबह अंधेरी वेस्ट में स्थित ऑडिशन स्टूडियो से निकलते हुए अच्छे कलाकारों को देखकर वहां पहुंचते और दरवाजा खटखटाकर ऑडिशन देते थे,ऐसे करीब एक साल तक चलता रहा. अदनान कहते हैं कि इसे मैं संघर्ष नही मानता,क्योंकि हर काम को खोजना पड़ता है और उसमें कही हां तो कहीं ना का सामना करना पड़ता हैं. यह एक खोज थी. एक्टिंग कोर्स खत्म करने के बाद मुझे एक बड़ी प्रॉडक्शन हाउस में ऑडिशन का ऑफ़र मिला था,लेकिन मैं वहा नही गया,क्योंकि मैं बहुत नर्वस था.

मिला ब्रेक

अदनान आगे कहते है कि मुझे पहला ब्रेक शो ’अर्जुन’से मिला.दो मिनट का ही रोल था, लेकिन मेरे काम को सभी ने पसंद किया,ऐसे मैंने कई सारे छोटी छोटी भूमिकाएं निभाई और आगे बढ़ता गया.जिंदगी बदलने वाली शो ’इश्क सुभान अल्लाह’ थी, जिससे मैं घर घर पहचाना जाने लगा. इसमें मेरी भूमिका भी अच्छी थी.

इसके आगे वे कहते है कि एक्टिंग फ़ील्ड में ग्लैमर अवश्य है, लेकिन एक्टिंग से जो प्यार करते है,वहीं व्यक्ति इस फ़ील्ड में काम कर सकते हैं. रिजेक्शन सभी को सहना पड़ता है,लेकिन मायूस होने के बजाय खुद के क्राफ्ट पर अच्छी तरीके से काम कर आगे बढ़ना पड़ता है. इसके अलावा अपने कॉन्फिडेंस को बनाएं रखें.इस क्षेत्र में सबका स्वागत है. रिजेक्शन होने पर मैं स्वीकार कर लेता हूं, उस बारे में अधिक नही सोचता, खराब लगता है, लेकिन जल्दी काम पर लौटने के बारे में सोचता हूं.

ड्रीम है क्या?

अदनान के पास 10से 12 आइडियाज है, जिन्हें वे शॉर्ट फिल्म में ढालना चाहते है. ये सभी आयडियाज आम जीवन से प्रेरित है. वे इन आइडियाज को शॉर्ट फिल्म में परिवर्तित कर दर्शकों तक पहुंचाना चाहते है. सुपर पॉवर मिलने पर मैं टाइम लाइन में जाकर सालो जिंदा रहना चाहता हूं और पुराने समय में लोग कैसे रहते थे,उसे देखना चाहता हूं. इतिहास उन्होंने लिखी है,जो जीतते आए हैं,हारने वालों ने नही. इसलिए उसका अध्ययन करना मुझे पसंद है.नए साल को में नए रूप में स्वागत करना चाहता हूं, जिसमें खुशियां हो, गम का प्रवेश न हो,किसी से मनमुटाव न हो.

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