संघर्ष और संघर्ष करना मेरे जीवन का मुख्य बन गया था, क्योंकि मुझे फिल्मों में काम करने की इच्छा बचपन सेथी, इसलिए मुझे जो भी मौके मिले, अभिनय करती गयी. कुछ लोगों ने मुझे ताने भी मारे, पर मैंने हार नहीं मानी. आज फिल्म भूल भुलैया 2 सफल फिल्म बनी, इसकी वजह मुझे मौका मिलना है, फिर मैं अपनी प्रतिभा को आगे ला पाई. अभी फिल्म जुग – जुग जियों आने वाली है. फिल्म सफल होने के लिए मैं अपनी फिंगर क्रॉस कर रही हूँ, अभी तो काम शुरू हुआ है, आगे बहुत कुछ करना बाकी है, ऐसा लगातार चलता रहे, मेरी यही विश है, हंसती हुई कहती है, अभिनेत्री कियारा अडवानी.

कियारा आडवानी का अब हिंदी सिनेमा जगत में एक जानी-मानी नाम बन चुकी है. उनकी सफल फिल्में कबीर सिंह, गुड न्यूज़, लक्ष्मी, भूल भुलैया 2 आदि है. उन्होंने कैरियर की शुरुआत फिल्म ‘फगली’ से किया था, फिल्म नहीं चली और कियारा को अच्छी भूमिका नहीं मिली. इसके बाद फिल्म ‘कबीर सिंह’ में उनके काम को सभी ने सराहा और उन्हें काम मिलना शुरू हुआ.

कियारा के पिता, जगदीप आडवाणी व्यवसायी है. माँ जेनेविज जाफरी आधी मुस्लिम आधी ब्रिटिश मूल की है. उन्होंने अपनी स्नातक मास कम्युनिकेशन में की है. यहाँ तक पहुँचने में उन्होंने बहुत मेहनत और धीरज धरी है.

सवाल – अभी आपकी फिल्में लगातार सफल हो रही है,इसका श्रेय किसे देना चाहती है?

जवाब – इसका अर्थ ये हुआ कि अच्छी कहानी होने पर फिल्में चलती है, दर्शक देखते है, पिछले दिनों कोविड की वजह से काम ढाई साल से रुका था. सबको लगा था किदर्शकों को  हॉल तक लाना मुश्किल होगा, पर भूलभूलैया 2 में दर्शक आये और उन्हें मेरी फिल्म पसंद भी आई क्योंकि कोविडने व्यक्ति की जो इमोशन को ख़त्म कर दिया था, वह फिर से शुरू हो चुका है.

सवाल – फिल्म की सफलता को कैसे सेलिब्रेट करती है?

जवाब – फिल्म की सफलता के बाद सेलिब्रेट करना रह गया है.मेरे लिए सफलता को सेलिब्रेट करना अच्छा होता है, मैं ग्राउंडेड रहती हूँ. सेलिब्रेशन फिल्म धोनी द अन टोल्ड स्टोरी से शुरू हुई है, इसके बाद कबीर सिंह थी. इसमें मैं परिवार के साथ कही घूमने जाना या समय बिताना पसंद करती हूँ. पहले जब मेरे पास सफल फिल्मे नहीं थी, तो काम भी नहीं था. अभी सफल फिल्में है तो अवसर की कमी हो गयी है. अभी जो फिल्में आ रही है,इन फिल्मों का काम कई साल से चल रहा था, इस बीच सबको कोविड हुआ, काम रुक गयी, ऐसा करते-करते ये फिल्में बनी है. उम्मीद है अगली साल तक मुझे सेलिब्रेशन के लिए एक सप्ताह का मौका मिलेगा और मैं अपने परिवार के साथ कही जा सकूंगी.

सवाल –फिल्मों की सफलता के बाद आप में क्या बदलाव आया है?

जवाब – फिल्मों की सफलता से मुझमे किसी प्रकार का बदलाव नहीं आया है. मैं पहले की तरह अभी भी मॉल में जाती हूँ, वहां अगर कोई मुझसे सेल्फी मांगता है तो मैं उसे मना नहीं करती, क्योंकि उनकी वजह से आज मैं यहाँ तक पहुंची हूँ, अगर वे आयेंगे नहीं तो मुझे कौन पहचानेगा? उनके लिए मेरी ये छोटी सी सेल्फी अगर उनका दिन बना देती है तो मुझे देने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. ये ही मेरे प्रसंशक है जो सालों तक मेरी इस सेल्फी को सम्हाल कर रखने वाले है.

सवकल – आप मेहनत के बलबूते पर यहाँ पहुंची है, अभी फिल्म इंडस्ट्री के निर्माता, निर्देशकों के वर्ताव में कितना बदलाव देख रही है?

जवाब –  ये सही है कि मैंने कई फिल्मों में काम करने के बाद भी असफलता ही हाथ लगी, इससे मैं बैक फुट पर चली गयी,फिर उससे निकलना मुश्किल था. मुझे समझना पड़ा कि ये  मेरे कैरियर का अंत नहीं है. पहली फिल्म की असफलता के बाद लगा कि अब सब खत्म हो चुका है. तब मैंने अपने दिल को समझाया कि हर शुक्रवार को हर फिल्म सफल नहीं हो सकती और इस दौरान मैंने अपने अंदर अधिक सुधार की कोशिश की. इससे मुझे अच्छा करने की प्रेरणा मिली.

सवाल –कोविड के बाद सभी ने परिवार के महत्व को समझा, जो पहले किसी के पास परिवार को समझने का समय नहीं था, आप में क्या बदलाव आया?

जवाब – मैंने हमेशा से परिवार को ही अधिक महत्व दिया है, लेकिन कोविड के समय सभी ने बहुत सारा वक्त परिवार के साथ बिताया है. तब उन्हें परिवार के मूल्य को सभी ने समझा. समय ऐसा था, जब सभी ने अपने किसी प्रियजनको कोविड से खोया है. पैसे से वे अपनों को बचा नहीं पाए. इससे परिवार को अब सभी आगे रखकर काम कर रहे है. भाग-दौड़ की जिंदगी से खुद को अलग रख रहे है. इस फिल्म में भी रिश्तों के बीच समझौता, टकरार को बखूबी दिखाने की कोशिश की गयी है. रिश्तों में अनबन होती है, लेकिन इसे नर्चर करते रहना पड़ता है. कोविड की वजह से लोगों के जीवन में बहुत मायूसी रही है और ऐसे अब लोग मनोरंजक फिल्में देखना और हँसना पसंद कर रहे है. मैं वैसी ही फिल्में करना चाहती हूँ.

सवाल –जेंडर डिस्क्रिमिनेशन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बहुत है, क्या आपने इसे महसूस किया?

जवाब – महसूस किया है, लेकिन मेरे हिसाब से केवल हीरो ही नहीं पूरी टीम एक फिल्म की सफलता के लिए जिम्मेदार होती है. समाज, परिवार और धर्म में भी जेंडर डिस्क्रिमिनेशन का सामना करना पड़ता है. मुझे तो ख़ुशी तब होती है जब दर्शक मेरे अभिनय को फिल्म में पसंद करते है. कई बार भूमिका छोटी होने पर भी उसका महत्व अधिक होता, ऐसी भूमिका करने में मुझे कोई समस्या नहीं.

सवाल – शादी कब कर रही है?

जवाब – शादी अभी करने के बारें में नहीं सोचा है, लेकिन शादी तब करुँगी, जब मुझे लगेगा कि शादी से मेरे कैरियर पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा. मैंने परिवार में अच्छी, सफल शादियाँ देखी है और मुझे वैसी ही परिवार और पार्टनर चाहिए, जहाँ सास और बहू में अच्छी तालमेल हो.

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