सीरियल ‘तुझसे है राबता है’ फेम एक्ट्रेस इन दिनों अपने शो के लेकर सुर्खियों में है. वहीं अब उनकी फिल्म ‘गुल मकई’ रिलीज पर है, जिसमें उन्होंने मलाला युसुफजई की भूमिका निभाई है. हाल ही में हमने शांत और विनम्र स्वभाव की रीम से बातचीत की जिसमें उन्होंने कई अहम खुलासे किए…..
सवाल- आपका अभिनय में आना कैसे हुआ? प्रेरणा कैसे मिली?
परिवार की मैं पहली लड़की हूं, जिसने अभिनय को अपना प्रोफेशन बनाया है. मैं मुंबई से हूं और मेरी मां राजस्थान की है, पर उनका पालन पोषण यही हुआ है. बचपन से अभिनय का शौक था और माता-पिता ने सहयोग दिया. इस तरह से मैं आगे बढ़ती गयी.
सवाल- इस फिल्म का मिलना कैसे हुआ और इसके लिए क्या खास तैयारी की?
मैंने फिल्म ‘वजीर’ में अमिताभ बच्चन के साथ एक छोटी सी भूमिका की थी, जिसे इस फिल्म के निर्देशक ने देखा था और मुझे ऑफर मिला. ऑफर मिलने के बाद मैंने मलाला पर काफी रिसर्च की. ये कहानी मुझे बहुत प्रेरणादायक लगी. मुझे पहले से जानकारी मलाला के बारें में थी, जिसने तालिबानियों के विरुद्ध शिक्षा के लिए आवाज उठाई थी. वह नोबेल पीस प्राइज विनर है, जो इतनी कम उम्र में मिलना काबिलेतारीफ है. इसके अलावा मैं इस कहानी में अभिनय के द्वारा काफी लोगों को प्रोत्साहित कर सकती हूं, बहुत सारी बातें सीख सकती हूं. मैं हमेशा से वैसी भूमिका निभाना चाहती हूं, जिसके द्वारा मैं लोगों की सोच को सही दिशा में बदल सकूं. इस फिल्म के ज़रिये मुझे ये मौका मिला और मैं इसे गंवाना नहीं चाहती थी.
सवाल- इस फिल्म के लिए कितना होमवर्क करना पड़ा? क्या चुनौती रही आपके लिए?
प्रोजेक्ट मिलने के बाद काफी होम वर्क किया. उसके कई इंटरव्यू मैंने यू-ट्यूब पर देखे. उनके बात करने का तरीका सीखना पड़ा, क्योंकि वह पाकिस्तानी हैं और पश्तों बोलती हैं, जबकि मैं मुंबई में पली-बढ़ी हूं. मेरी चाल चलन उनसे काफी अलग है. इसके अलावा उनके सारे इंटरव्यू अंग्रेजी में थे जबकि मूवी में संवाद हिंदी में थे. इसलिए थोड़ी समस्या आई पर मैंने कर लिया.
सवाल- ऐसी इमोशनल भूमिका को करने के बाद इस रोल से बाहर निकलना कितना मुश्किल था?
मैं एक्टिंग बहुत सालों से कर रही हूं, इसलिए मुझे इसे करने में अधिक चुनौती नहीं थी. जब कोई काम मैं दिल से करती हूं तो उसमें समस्या नहीं आती. मुझे एक्टिंग हमेशा से पसंद है और मैं इसे करने में एन्जॉय करती हूं. इसलिए इससे निकलना भी मुश्किल नहीं था.
सवाल- क्या आप रीम शेख और मलाला की तुलना होने पर प्रेशर महसूस कर रही हैं?
शुरू शुरू में लगता था कि मलाला और दर्शकों को मेरा काम पसंद आयेगा या नहीं, लेकिन फिल्म को देखते हुए जब मलाला के पिता ने कहा कि वे मलाला को फिल्म में देख रहे है तो मुझे तसल्ली हुई. प्रेशर भी कम हुआ है.
सवाल- आप इस चरित्र से खुद को कितना जोड़ पाती हैं?
मैं अपने आपको इस चरित्र से जोड़ नहीं पाती ,क्योंकि मैं मुंबई में पली-बड़ी हुई हूं और यहां हर किसी को अपनी बात रखने का हक है. इसके अलावा मेरा पूरा परिवार आत्मनिर्भरता पर विश्वास करता है मेरी मां भी आत्मनिर्भर है. मैं मलाला से रिलेट नहीं करती पर प्रेरित जरूर हूं.
सवाल- क्या आप असल जिंदगी में मलाला से मिली हैं?
मिल तो नहीं पायी, लेकिन इस फिल्म की स्क्रीनिंग लन्दन में हुई थी. मूवी ख़त्म होने के बाद मलाला के पिता ने उसका एक दुपट्टा मुझे गिफ्ट के तौर पर दिया, जिससे मुझे बहुत ख़ुशी मिली और मैंने उसे सम्हाल कर रखा है.
सवाल- फिल्मों में इंटिमेट सींस करने में कितनी सहज हैं?
मैं अपने पैशन की वजह से अभिनय क्षेत्र से जुड़ी हूं और ये मेरा करियर है. मुझे या मेरे माता-पिता को जिस हद तक मुझे अभिनय करने में कोई समस्या नहीं है, मैं कर सकती हूं. उन्होंने हमेशा मुझे सहयोग दिया है. उन्हें मेरे किसी दृश्य से अगर कोई एतराज है, तो मैं उसे नहीं करुंगी.
सवाल- टीवी की जर्नी को आप कैसे देखती हैं?
मेरे अभिनय की शुरुआत टीवी से हुई हैं. उसी से मुझे पहचान मिली. अभी भी मैं टीवी शो ‘तुझसे है राब्ता’ कर रही हूं जिसमें कल्याणी के किरदार को बहुत प्यार मिला है. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मुझे लोग रीम नहीं कल्याणी या मलाला कहकर बुलाते है. बहुत संतुष्टि मिलती है. मेरे बहुत दोस्त इंडस्ट्री में है. बड़े-बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौका भी मुझे मिला है.
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सवाल- टीवी और फिल्मों में अंतर क्या पाती हैं?
टीवी और फिल्म में कोई अंतर नहीं होता, केवल चरित्र में अंतर होता है. इसके अलावा आज कई प्लेटफार्म कलाकारों को मिलने लगा है.
सवाल- मलाला ने अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई थी, क्या आप किसी अन्याय के विरुद्ध कदम उठा सकती हैं?
मैंने बचपन से यही सीखा है कि जो बात आपको सही नहीं लगता उसके विरुद्ध कहने की जरुरत है. कभी मेरे साथ अगर ऐसा हुआ तो मैं अवश्य अपनी आवाज उठाऊंगी. इसके लिए मुझे मजबूत होने की जरुरत है.
सवाल- आप कितनी फैशनेबल और फूडी हैं?
मैं किसी खास अवसर पर फैशन करना पसंद करती हूं, वरना मैं साधारण रहती हूं. मेरी मां मारवाड़ी और मेरे पिता मुस्लिम हैं. हम सब यहां अपने हिसाब से त्यौहार मनाते हैं.
वैसे तो मैं हर तरह का खाना खाती हूं लेकिन मां के हाथ का बना हुआ मसाले वाला तड़का चावल मुझे बहुत पसंद है और दादी के हाथ की बनी बिरयानी भी मुझे बहुत अच्छी लगती है.
सवाल- आपके सपनो का राजकुमार कैसा होगा?
जो मेरी, मेरे परिवार और काम की रेस्पेक्ट करें, वही मेरा जीवनसाथी बन सकता है.
सवाल- तनाव होने पर उसे कैसे दूर करती हैं?
मैं अपनी मां के बहुत करीब हूं और उनसे सारी बातें शेयर करती हूं इसके अलावा मैं थोड़ा बहुत लिखती भी हूं.