(संगीतकार, गायक, प्रोड्यूसर)

धीरज और लगन ये अगर किसी में हो तो वह व्यक्ति अपनी मंजिल को पा लेता है, ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, म्यूजिक कंपोजर, गायक और प्रोड्यूसर राजीव मित्रा ने, जिन्होंने 20 साल की अथक प्रयास के बाद हिंदी वेब सीरीज7 कदम के लिए संगीत दिया, जिसे श्रेया घोषाल, जावेद अली और शफाकत अमानत अली ने गाया है. वेब सीरीज रिलीज हो चुकी है और राजीव को काफी तारीफे मिल रही है. उत्तरी बंगाल के शहर कूचबिहार के राजीव की  संघर्षपूर्ण जीवन में साथ दिया है, उनकी पत्नी रोनिता मित्रा, बेटा आकाश मित्रा और बेटी मोहना मित्रा ने.

मिली प्रेरणा

संगीत की प्रेरणा के बारें में पूछे जाने पर राजीवकहते है कि मैं नार्थ बंगाल के कूचबिहार का शहर दिनहाटा से हूं. मेरी पढाई कूचबिहार में हुई, लेकिन मुझे शुरू से ही हिंदी गानों और फिल्में देखने का शौक था. हालाँकि बंगाल में हिंदी गाना सुनने पर लोग मुझे बांग्ला संस्कृति की कम जानकार कहकर ताना भी मारते थे,पर मेरे पेरेंट्स ने मुझे हर काम की आज़ादी दी है. कूचबिहार में मैंने लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार, अमित कुमार आदि सभी की लाइव शो देखा है. पहली बार मंच पर भी मैं महेंद्र कपूर का हाथ पकड़कर ही पहुंचा था. कलाकार को सम्मान हर जगह मिलता है और मैं उसे पाने के लिए आर्टिस्ट बनना चाहता था. इसके अलावा मेरे पिता संगीत के शौक़ीन थे और कई जगह गाया भी करते थे.  84 साल की उम्र में आज भी गाते है. वही से मुझे संगीत की प्रेरणा मिली. पहले छोटा मंच और बाद में बड़े मंच पर गाना गाकर मैं पोपुलर हुआ. मैंने अपना म्यूजिक बैण्ड भी बनाया था और जलपाईगुड़ी से गौहाटी तक शो करने लगा. बप्पी लहड़ी के साथ मैंने एक शो किया था और उन्होंने मुझसे मिलकर मुंबई आने की सलाह दी, पर वे मुझे किसी प्रकार सहायता नहीं कर पायेंगे, ये भी साफ़ कर दिया.

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आसान नहीं थे रास्ते

राजीव बंगाल में लाइव शो करते-करते थक चुके थे और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी साख जमाना चाहते थे. वे कहते है कि मैं आज से लगभग 21 साल पहले मैं परिवार के साथ मुंबई आया.यहाँ आने पर संगीत के रास्ते आसान नहीं दिखे. यहाँ मुझे बहुत कुछ सीखना है और उसे सीखकर ही मैं आगे बढ़ सकता हूं. इस दौरान पत्नी का साथ हमेशा रहा.शुरू में मुंबई आकर मैं लाइव शो करना चाहता था, लेकिन यहाँ पार्टीज में ही गानों के शो हुआ करता है, जिसकी जानकारी मुझे नहीं थी. मैं पार्टी में गाना नहीं गा सकता. कुछ क्रिएट करने की इच्छा हुई और मैंने धुन बनाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया और साथ में विज्ञापनों के जिंगल्स किये. कई गानों के रिमिक्स भी गाया. दुर्गा पूजा पर बंगाल जाकर  स्टेज शो कर पैसा लेकर आता था, इससे घर गृहस्थी चलती रही. हर बार मेरा संघर्ष मुंबई आकर फिर से शुरू हो जाता था. मेरी पत्नी ने कोशिश करमुंबई की एक बांग्ला चैनेल में प्रोग्रामिंग हेड का काम शुरू किया. मैंने भी कई सालों तक सीरियल में बैकग्राउंड म्यूजिक दिया, लेकिन इसमें रातभर जागकर काम करना पड़ता था और उस पैसे से परिवार चलता था. इसके अलावा एड फिल्मों के गाने भी तैयार किये. आज से 5 साल पहले मैंने संगीत की धुन बनाना शुरू किया.

आखिर मिला मौका

जहाँ भी राजीव जाते काम नहीं बन पाता था. सीरियल के बैकग्राउंड संगीत देने की वजह से टीवी में अच्छी पहचान हो गयी थी, पर उनका सपना फिल्मों में संगीत देने का रहा. राजीव कहते है कि एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे वेब सीरीज 7 कदम की म्यूजिक देने के लिए फोन किया. मैं उसी रात इरोज के ऑफिस पहुंचा और3 गानों का कॉन्ट्रैक्ट मिला. उसे मैंने अगले दिन ही दे दिया. उनको मेरा काम पसंद आया, क्योंकि इस फिल्म में मैंने स्क्रिप्ट के आधार पर गाने दिए है, जो पहले होता था. मैं हमेशा एक अच्छी धुन बनाने की कोशिश करता हूं.मुझे ख़ुशी है कि 7 कदमवेब सीरीज में संगीत कोसभी ने पसंद किया.

मिला सहयोग परिवार का

राजीव को निराशा तब हुई जब उनकी वेब सीरीज कई वजह से रिलीज नहीं हो पायी. उस समय परिवार का सहयोग ही उनके काम आया. धीरज धरने के बाद आखिरकार वेब सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो गयी.राजीव का बेटा भी उनके साथ संगीत की दुनिया में काम कर रहा है. राजीव हँसते हुए कहते है कि मेरा गाना किसी दिन मैं रास्ते पर जाते हुए रेडियो पर बजता हुआ सुन सकूँ और यह अभी तक नहीं हुआ है. मैं संघर्ष इसके लिए करता रहूंगा, क्योंकि कठिन समय में भी मैंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा, जिसे कूचबिहार से मुंबई ले आया हूं. मुश्किल समय में मैं अपने परिवार का सहयोग लेता हूं.

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रियलिस्टिक फिल्मों का है दौर

राजीव आगे कहते है कि संगीत अस्पताल से लेकर हर जगह पर चाहिए. रियलिस्टिक फिल्मों में भी भाव होते है और उसे दिखाने के लिए संगीत जरुरी होता है.  फिल्म ‘विकी डोनर’ रियलिस्टिक फिल्म होते हुए भी भाव को सजीव करने के लिए संगीत डाले गए.इसके अलावा पहले किसी गाने में 3 से 4 अंतरा होता था, अब एक या दो अंतरे में ही गाना ख़त्म हो जाता है. गानों में पुराना और नया कुछ नहीं होता. लोग अभी भी मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार के गाने सुनते है. हर व्यक्ति अपने हिसाब से गाना सुनता है. कोविड महामारी और लॉकडाउन में मैं परिवार के साथ समय बिता रहा हूं. समय के अभाव में पहले गिटार 2 घंटे बजा रहा था,अब खुद की प्रोग्रेस  के लिए 4 घंटे बजाऊंगा. आज सभी लोग डिप्रेशन में है, कोई खुश नहीं है, सभी डरे हुए है. मैं अब एक अच्छी धुन बना रहा हूं, जिसे सभी घर पर बैठकर सुने और तनावमुक्त हो जाएँ.

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