भारत इस साल 75 वें स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, आजादी के 7 दशक बाद भी क्या देश के नागरिकों को कुछ कहने की आजादी है या नहीं ? वे मानते है कि आज़ादी के इतने साल बाद भी हम पूरी तरह विकसित और आज़ाद नहीं है, इसकी वजह हमारी माइंडसेट है,जिसे पढ़े-लिखे लोग भी नहीं बदल पाते, इसे बदलना बहुत जरुरी है, आइये जाने क्या कहना चाहते है सेलेब्स ?

अली गोनी

aly-goni

अभिनेता अली गोनी कहते है कि देश की आज़ादी बिना किसी से पूछे अपने हिसाब से चल रही है. मेरा मनपसंद फ्रीडम फाइटर भगत सिंह है, उन्होंने देश के आज़ादी की खातिर बहुत कम उम्र में खुद को बलिदान दिया है, जिसे हमें हमेशा याद रखने की जरुरत है. फिल्म ‘वीर ज़ारा’ का गाना ‘ऐसा देश है मेरा….’मेरा पसंदीदा देशभक्ति सॉंग है.

मृणाल जैन

mrinal

बंदिनी फेम अभिनेता मृणाल जैनका कहना है कि आजादी मेरे लिए एक भारतीय होना है. इसमें मुझे किसी को ये नहीं पूछना चाहिए कि मैं मारवाड़ी, पंजाबी, मराठी या मद्रासी हूँ. मेरा पसंदीदा फ्रीडम फाइटर महात्मा गाँधी और भगत सिंह है. उन्होंने देश के लिए खुद को कुर्बान किया है और उनकी इस बलिदान को देश के हर नागरिक को याद रखना है. मेरा मनपसंद देशभक्त गीत फिल्म ‘कर्मा’ का गीत ‘मेरा कर्मा तू….’ है.

कुलविंदर बक्शीश

kulwin

अभिनेता कुलदीप बख्शीश कहते है कि आज़ादी का ये पर्व उन सभी लोगों की मुझे याद दिलाता है, जिन्होंने इसे पाने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया है. मैं ऐसे फ्रीडम फाइटर को सैल्यूट करता हूँ. आज़ादी मेरे लिए अपने हिसाब से देश में बिना किसी डर के रहना और स्वतंत्र रूप से श्वास लेना है. ये सभी के लिए लागू होना चाहिए. मेरा पसंदीदा फ्रीडम फाइटर सुभाषचंद्र बोस है.

निवेदिता बासु

nivedita

निवेदिता बासु कहती है कि हजारों की संख्या में लोगों ने अपने जान की आहुति इस आजादी के लिए दिया है. उसे कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए. ‘आई लव माय इंडिया…..’फिल्म ‘परदेस’ का गीत मुझे बहुत पसंद है. इस गाने को सुनते ही मुझे बहुत अच्छा अनुभव होता है. हम सभी देशवासियों को ये शपथ लेना है कि देश की किसी समस्या को मिलकर सामना करें और देश में शांति और सद्भावना को बनाए रखने में सहयोग दें.

विजयेन्द्र कुमेरिया

vijendra

अभिनेता विजयेन्द्र कुमेरिया कहते है कि हम सभी आज़ादी के 75 साल मना रहे है, लेकिन अभी भी विकास के क्षेत्र में काम बहुत कम है, मसलन स्वास्थ्य के देखभाल की अच्छी व्यवस्था, गरीबी कम होना, गांव की आर्थिक व्यवस्था, साफ-सफाई आदि पर बहुत अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है. जब हम स्पीच की आज़ादी को देखते है, तो कभी हम अपनी बात रख सकते है तो कभी नहीं. इसमें सोशल मीडिया ही है, जिसमे किसी बात की सच्चाई जाने बिना लोग अपनी विचारों को रखते है और यहाँ किसी को भी ट्रोल भी किया जा सकता है. फ्रीडम ऑफ़ स्पीच का अर्थ ये नहीं कि आप किसी को भी कुछ कह सकते है.

मोहित मल्होत्रा

mohit

स्पिटविला 2 फेम मोहित मल्होत्रा कहते है कि 7 दशक बीतने के बाद भी हम सभी को उतनी आज़ादी नहीं है, जो हमें मिलनी चाहिए थी. राजनीतिक दबाव और मीडिया की वजह से फ्रीडम ऑफ़ स्पीच नहीं है. समाज के रूप में हमें अधिक खुले विचार रखने की आवश्यकता है, जजमेंटल होना नहीं. मेरा विश्वास है कि हम सभी को चाहे वह कलाकार, लेखक, सिंगर्स आदि जो भी हो उन्हें खुद की बात कहते रहना चाहिए.

अविनाश मुख़र्जी

avinash

7 दशकों के बाद क्या देश के नागरिक आजाद हो चुके है? पूछते है बालिका वधु फेम जग्या यानि अविनाश मुखर्जी. बोलने की आज़ादी के अलावा हमारे कई फंडामेंटल राईट भी है, जो हम सभी को अपने अनुसार जीने की आज़ादी देता है. कई ऐसे क्षेत्र है जहाँ हमें विकास की जरुरत है. मेरे हिसाब से भारत आजाद है, लेकिन यहाँ के नागरिक नहीं, क्योंकि इसके उदाहरण कई है, जैसे लिंगवाद, जातिवाद, लैंगिक असमानता आदि में सुधार होना जरुरी है. जब तक ये नहीं होगा, तब तक देश पूरी तरह से आज़ाद नहीं कहलायेगा. लोगों को खुद बदलने की चाह न हो, तो सिस्टम में कुछ भी बदलाव करना संभव नहीं.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...