मौडलिंग से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री कैटरीना कैफ ने फिल्म ‘बूम’ से हिंदी फिल्मों में अभिनय शुरू किया. उनका शुरुआती दौर अधिक सफल नहीं था. उन्होंने रोमांटिक कौमेडी फिल्म ‘मैंने प्यार क्यों किया’ और ‘नमस्ते लन्दन’ में अच्छा अभिनय किया, जिसकी आलोचकों ने तारीफ की और उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम कर अपना नाम नामचीन अभिनेत्रियों की सूची में शामिल कर लिया. कैटरीना के संघर्ष के समय में अभिनेता सलमान ने उनकी सहायता की, उन दोनों की दोस्ती हुई और उन्हें फिल्म ‘मैंने प्यार क्यों किया’ मिली. इसके बाद उन्होंने पार्टनर, वेलकम, सिंह इज किंग, अजब प्रेम की गजब कहानी, दे दना दन, राजनीति आदि कई सफल फिल्मों में काम किया. शांत और स्पष्टभाषी कैटरीना को हमेशा नयी कहानियां उत्साहित करती हैं. अभी उनकी फिल्म ‘जीरो’ रिलीज पर है, उनसे मिलकर बात करना रोचक था पेश है अंश.
बहुत दिनों बाद फिर से फिल्मों में आ रही हैं, देरी की वजह क्या है?
ये सही है कि मैं करीब 6 साल बाद इस फिल्म में आ रही हूं. इसकी वजह सही कहानी का न मिलना है. इस कहानी में मुझे अलग अभिनय का मौका मिला, जो मुझे अच्छा लगा. देर भले ही हो पर मैं एक अच्छी कहानी पर काम करना पसंद करती हूं.
इसमें आपकी भूमिका क्या है?
इसमें मैंने बबिता की भूमिका निभाई है. आनंद एल राय ने आज से दो साल पहले इस फिल्म की कहानी सुनाई थी, जो मुझे अच्छी लगी थी. मैंने उनकी सारी फिल्में देखी है. मुझे उनकी फिल्म में काम करने की इच्छा थी. वे अभिनेत्री की मजबूत भूमिका फिल्म में रखते हैं. जिससे उन्हें अपना अभिनय सजीव करने के कई लेयर मिलते है. वे काम करते समय कलाकारों को बहुत आजादी देते हैं, जिससे काम करने में अच्छा लगता है.
इतने सालों में इंडस्ट्री में क्या परिवर्तन देखती हैं?
पहले भी मैंने शाहरुख खान के साथ काम किया है. तब सोशल मीडिया इतना स्ट्रोंग नहीं था. लोग आपके बारें में अधिक नहीं जान पाते थे. अब हर दिन कुछ नया होता है. कल मीडिया में क्या आयेगा आपको पता नहीं होता. पहले आजादी थी, आपको थोड़ा सुकून मिलता था. आज मैं जब मन चाहे, कहीं भी जा नहीं सकती, क्योंकि आपको हमेशा सचेत रहना पड़ता है. वह कभी-कभी खराब लगता है.
क्या आप शारीरिक रूप से चैलेंज्ड व्यक्ति से मिली हैं? उनके लिये क्या मेसेज देना चाहती हैं?
ऐसी शारीरिक कमजोरी कुछ व्यक्तियों को मिलती है, इसकी वजह पता करना मुश्किल है. मेरे परिवार में मेरी एक बहन है, जो शारीरिक रूप से अपंग है. कई बार मैं ये सोचने पर मजबूर होती हूं कि इसके साथ आखिर ऐसा क्यों हुआ? अब मैं इसे सबसे स्पेशल चाइल्ड और गिफ्ट मानती हूं, क्योंकि उनकी अपनी एक अलग दुनिया होती है, जिसमें वे जीते हैं. इस फिल्म में ऐसी ही शारीरिक रूप से कमी को दिखाया है, लेकिन इसके बावजूद भी वे खुश हैं. ये सही है कि हर व्यक्ति पूरा होना चाहता है. फिर चाहे वह पैसा, कैरियर, या रिश्ता हो, वे सब कुछ पा लेने के बाद भी कुछ और पाने की इच्छा में लगा रहता है.
इस फिल्म में आपको सबसे मुश्किल क्या लगा?
ये फिल्म थोड़ी कठिन है, इसमें इमोशन को दिखाना कठिन ही नहीं, मुश्किल भी था. शूटिंग के बीच-बीच में जब ब्रेक मिलता था, तो मैं रिलैक्स हो जाती थी. कई बार वैसी इमोशनल सीन्स को मैं अवायड भी करना चाहती थी, लेकिन वह एक अच्छा अनुभव था.
आज हर कोई तनाव भरे माहौल में जी रहा है, खासकर बच्चे, ऐसे में आप उन्हें किस तरह की सलाह देना चाहती हैं?
ये बहुत मुश्किल विषय है, जिस पर बात करनी चाहिए, क्योंकि आज के बच्चे डिजिटल इंडिया में फंस चुके हैं. उनके अंदर इमोशन बहुत कम रह गया है. अगर उनके साथ कोई समस्या आती है तो वे समझ नहीं पाते कि क्या करना है और वे तनावग्रस्त हो जाते हैं. हमारे जीवन में कई चीजे आती और जाती है. उसके लिए अधिक उत्तेजित होने की जरुरत नहीं होती. असल में वे बच्चे वह पाना चाहते है, जो उनके पास नहीं है या उनको मिलना मुश्किल है. इस समस्या का समाधान वे सोशल मीडिया के द्वारा खोजते हैं, जो गलत है. समझदारी जब तक आपकी खुद की नहीं होगी, आप की समस्या का समाधान आपको नहीं मिल पाता. आज मैं भी कही जाने या आने में सहज महसूस नहीं करती, क्योंकि मुझे डर रहता है कि मेरी खराब तस्वीर ट्रोल होगी. ये मैं नहीं चाहती. मैं सभी बच्चों और टीनेजर्स को सलाह देती हूं कि आप अपने आस-पास को देखें. मोबाइल और इन्टरनेट पर अधिक समय न बिताएं. मोबाइल को अपने से दूर रखने की कोशिश करें. अपने ‘गोल’ पर ध्यान केन्द्रित करें. सफलता के लिए मोबाइल की आपको जरुरत नहीं. मेरी इच्छा है कि मैं अपने बच्चों को रियल फ्रेंडशिप और वर्ल्ड को दिखाऊं, जिसमें मोबाइल की भागीदारी न हो.