आज की फास्ट लाइफ स्टाइल में डिप्रेशन एक कौमन प्रौब्लम बन चुकी है. आम से लेकर खास हर कोई कभी ना कभी इस प्रौब्लम से गुजर चुका है. फिर चाहे वो फिल्म और टीवी इंडस्ट्री के कुछ नामी सितारें ही क्यूं ना हो. जिन्होंने न सिर्फ डिप्रेशन से जूझने में बल्कि इससे निपटने के बारे में खुलकर बात भी की है. जहां कुछ सेलेब्स ने डिप्रेशन की जंग जीत गए तो कुछ ने जिंदगी की जंग हार दी. आइए जानते हैं कि आखिर डिप्रेशन क्यूं होता है? इसके कारण, लक्षण क्या हैं? इससे कैसे दूर रह सकते हैं और कौनकौन से सेलिब्रिटी इसकी चपेट में आ चुके थे.
डिप्रेशन के शिकार रह चुके हैं ये सेलिब्रिटीज
सबसे पहले बात करते हैं मिस्टर पेरफेकेशनिस्ट आमिर खान की, जिन्होंने हाल ही में एक कौमेडी शो के दौरान बताया कि वो पिछले दो ढाई साल डिप्रेशन में थे. वहीं बौलीवुड के किंग खान भी इस खतरनाक बीमारी से सामना कर चुके हैं. जब उन्हें कंधे की चोट के दर्द की वजह से डिप्रेशन हुआ था. सुशांत सिंह राजपूत क्रिनिकल डिप्रेशन से गुजर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने सुसाइड कर लिया था. इसके अलावा निर्माता करण जौहर भी डिप्रेशन से डेढ़ साल का संघर्ष करते रहें. सिर्फ इतना ही नहीं बौलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण,अनुष्का शर्मा, दंगल गर्ल एक्ट्रेस जायरा वसीम, फेमस एक्ट्रेस आलिया भट्ट की बहन शाहीन भट्ट, सिंगर नेहा कक्कड़ , छोटे पर्दे की एक्ट्रेस और मौडल शमा सिकंदर, रश्मि देसाई डिप्रेशन का दर्द झेल चुकी हैं.
किसी को भी हो सकता है डिप्रेशन
डिप्रेशन के बारे में मैरिंगो एशिया हौस्पिटल्स फरीदाबाद की एचओडी-साइकोलौजी डा. जया सुकुल का कहना है कि डिप्रेशन या कोई भी मानसिक दिक्कत आपके पैसे या जेब को देखकर नहीं आती है. ये किसी को भी हो सकता है. यह बात अलग है कि हर वर्ग के इंसान को डिप्रेशन अलग तरीके से परेशान करता है. अमीर आदमी का ज्यादा पता चलता है क्योंकि वह डिप्रेशन के चलते काम से छुट्टी ले सकता है. मगर गरीब आदमी के पास कोई चाइस नहीं होती है, उसे अपना काम पूरा करना पड़ता है. गरीब आदमी के पास कोई बहुत ज्यादा इकोनोमिक या सोशल सपोर्ट नहीं होता है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उन्हें डिप्रेशन नहीं होता है. बस उनका दिखने में अलग होता है जैसे बिना किसी कारण बीमारियां होना, बारबार बीमार पड़ना और इम्यून सिस्टम खराब होना-उनकी फिजिकल हेल्थ बहुत ज्यादा बिगड़ जाती है.
डिप्रेशन के कारण
डा. जया सुकुल कहती हैं कि डिप्रेशन में जाने के कई कारण हो सकते हैं. ऐसा भी हो सकता है दो लोग जिनकी समान हिस्ट्री, समान एक्सपीरियंस रहे हों, उनमें से एक को डिप्रेशन हो जाए दूसरे को नहीं. आपके जेनेटिक्स, आपके स्वभाव, आपके आसपास का वातावरण, आपकी मौजूदा स्थिति आपकी सिचुएशन को कैसे प्रभावित करती हैं, ये सब अलग-अलग कारण हैं.
डिप्रेशन के लक्षण और प्रकार
डिप्रेशन मुख्यत: दो तरह से देखा जा सकता है- फंक्शनल और क्लीनिकल डिप्रेशन. जिन लोगों की मानसिक स्थिति डिप्रेशन की वजह से बहुत ज्यादा खराब हो जाती है उनको डिप्रेशन और मेंटल हेल्थ इशू की वजह से शारीरिक दिक्कत आनी शुरू हो जाती हैं.
एंग्जाइटी और डिप्रेशन में फर्क
एंग्जायटी और डिप्रेशन दो बहुत अलग बीमारी हैं और उनके इलाज भी बहुत अलग दवाओं से किए जाते हैं. एंग्जायटी एक तरह की बेसब्रता या घबराहट होती है. डिप्रेशन उदासी का एक क्लीनिकल वर्जन होता है, जहाँ पर आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों खराब होती हैं. कई बार लोगों को एंग्जायटी और डिप्रेशन साथ में हो जाता है मगर वे समान बीमारी नहीं होती.
ठीक होने में कितना समय
डिप्रेशन से परेशान व्यक्ति कब तक ठीक हो सकता है ये इस बात पर निर्भर करता है कि डिप्रेशन उसके अंदर कितना गहरा बैठा हुआ है. कुछ लोगों को 14-15 हफ्ते लगते हैं. कुछ लोगों को कई बार साल भी लग जाते हैं.
डिप्रेशन में क्या करें
डौक्टर का कहना है कि ठीक होने का समय जो काम आप करते हैं उससे भी जुड़ा होता है. अगर आप ठीक से इलाज करा रहे हैं, सही डौक्टर से मिल रहे हैं, जो आपको डौक्टर बता रहे हैं-उसे ठीक से कर रहे हैं, डौक्टर द्वारा बताई दवा ठीक समय पर नियमित रूप से ले रहे हैं. तो जल्दी ठीक हो जाते हैं. डौक्टर की बात मानना, डौक्टर को दिखाना, शर्म न करना, सोशल सपोर्ट इकट्ठा करना कुछ ऐसी चीजें हैं जो आप खुद से कर सकते हैं. लाइफस्टाइल को हेल्दी रखना भी बहुत जरूरी है.
डिप्रेशन बारबार होता है-
अधिकतर मामलों में अगर डिप्रेशन का ठीक से इलाज किया जाए, मरीज सारी ही चीजों में साइकोलॉजिस्ट और साइकेट्रिस्ट दोनों को फौलो करे. अगर उसकी लाइफ में वो हालात दोबारा से पैदा न हों तो डिप्रेशन नहीं होता. कई बार लोग उसी हालात को अच्छे ट्रीटमेंट के बाद ठीक से संभाल पाते हैं. 90 प्रतिशत जनता को लाइफ में एक बार डिप्रेशन जरूर होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें बार-बार होगा.
किस उम्र में डिप्रेशन के चांस ज्यादा-
डिप्रेशन की समस्या उम्र देखकर नहीं आती है. यह 11-14 वर्ष और 23-27 की उम्र के ग्रुप के लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है.