रेटिंग: 4 स्टार

निर्माता: अरुणाभ कुमार, टीवीएफ क्रिएशंस

निर्देशक: पलाश वासवानी

कलाकार: जमील खान, गीतांजलि कुलकर्णी, हर्ष मयार, वैभव राज गुप्ता,साद बिलग्रामी, दीपक कुमार मिश्रा, अभिषेक झा, कीर्ति सिंहा, शिवांगी भदोरिया, शिवांगी जय पवार, संघ रत्ना , सुनीता राजभर व अन्य

अवधि: 30 से 42 मिनट के 5 एपिसोड

ओटीटी प्लेटफॉर्म: सोनी लिव

मध्यम वर्गीय परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी में तमाम छोटे-मोटे वाकिया ऐसे होते हैं , जिन्हें देखकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. तो वहीं यह कहीं ना कहीं मध्यम वर्गीय परिवारों की पीड़ा को भी चित्रित करते हैं. ऐसी ही एक वेब सीरीज निर्देशक पलाश वासवानी लेकर आए हैं जिसका नाम है “गुल्लक सीजन 2.”

यह सीरीज मिश्रा परिवार के अपूर्ण रिश्तों और आकांक्षाओं की पड़ताल करती है. फिल्मकार ने कथाकथन के लिए अपरंपरागत शैली में उनके जीवन के किस्सों का उपयोग किया है.

कहानी:

कहानी है बिजली विभाग में कार्यरत संतोष मिश्रा( जमील खान)के परिवार की. संतोष मिश्रा के परिवार में उनकी पत्नी (गीतांजलि कुलकर्णी) के अलावा बड़ा बेटा अनु मिश्रा(वैभव राजपुरोहित) और छोटा बेटा अमन मिश्रा(हर्ष मयार) है .अनु मिश्रा पढ़ाई में फिसड्डी हैं और शादी की उम्र हो जाने पर भी बेरोजगार हैं .जबकि अमन मिश्रा हाई स्कूल की परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं. हर एपिसोड में अलग-अलग घटनाक्रम हैं. मसलन, पहले एपिसोड में परिवार की जरूरतों को देखते हुए अनु मिश्रा की सलाह पर उनके पिता संतोष मिश्रा सुविधा शुल्क यानी की घूस लेने का निर्णय लेते हैं, मगर फिर विचार बदल जाता है. दूसरे एपिसोड में किटी पार्टी का मसला है, कैसे किटी पार्टी के समय परिवार के सभी पुरुष शांति मिश्रा की मदद करते हैं. एपिसोड 3 में शादी के निमंत्रण पत्र के इर्द गिर्द कहानी घूमती है. चौथे एपिसोड में अमन की परीक्षा है और तो दूसरी तरफ क्रिकेट मैच. अमन क्रिकेट के शौकीन है. पांचवा एपिसोड बहुत ही ज्यादा इमोशनल है. इसमें अनु मिश्रा को उम्मीद होती है कि वह गैस एजेंसी पा जाएगा, पर ऐसा नहीं हो पाता है और उम्मीद के विपरीत अमन मिश्रा अच्छे नंबरों से हाई स्कूल की परीक्षा में पास होता है.स्कूल की तरफ से उसकी तस्वीरें खींच कर पोस्टर बनाए जाते हैं. और तब जिस तरह से अनु और अमन के बीच एकजुट होने की बात नजर आती है और कैसे पूरा परिवार एकजुट होता है कमाल की कहानी है.

लेखन व निर्देशन:

यह मध्यम वर्गीय परिवार अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करते हुए एकजुट रहता है है .इसमें गुदगुदी भी हैं. चीखना चिल्लाना भी है. पर दिन की समाप्ति तक एक दूसरे के साथ हो जाते हैं. मां का प्यार भी व्यंग में डूबा हुआ है, लोग समझते हैं कि मां की झुनझुनाहट में भी बेपनाह मोहब्बत मिलती है . सीरीज में जीवन मूल्य भी हैं. तो वहीं नए मोबाइल फोन और डियो परफ्यूम की चाहत भी है. प्यार ,भावनाएं पुरानी यादें सब कुछ बहुत ही अच्छी तरीके से निर्देशक ने पिरोया है .कहीं कोई बनावट नहीं है. वेब सीरीज देखते हुए लगता है कि जैसे कि यह हमारे अपने घर की कहानी है.

निर्देशक पलाश वासवानी बधाई के पात्र हैं .उन्होंने भावनाओं को खुलकर उभरने का मौका दिया है, तो वहीं इस बात का भी ध्यान रखा है कि नाटकीयता जरूरत से ज्यादा ना हो ने पाए. हर एपिसोड के कुछ पल दर्शकों के साथ रह जाते हैं.

अभिनय

परिवार के सभी कलाकारों के बीच अभिनय की जुगलबंदी कमाल की है .पत्नी वह मां के रूप में गीतांजलि कुलकर्णी अद्भुत धूरी बनाती है. वह पति व बच्चों को समान ऊर्जा प्रदान करती हैं, ताकि अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें .उन्हें पर्दे पर देखकर दर्शकों को भी लगता है कि एक पत्नी और एक मां ऐसी ही होनी चाहिए. पापा के किरदार में जमील खान ने भी कमाल का अभिनय किया है. वहीं वैभव राज गुप्ता भावनाओं की रेंज को उकेरने में सक्षम रहे हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग भी कमाल की है. हर्ष मयार का सपाट चेहरा अमन के किरदार को उकेरने में हथियार के रूप में काम करता है. सभी कलाकारों ने अपने अपने किरदारों को बाखूबी जिया है. वहीं गुदगुदी लाने के लिए सुनीता राजभर ने कमाल का अभिनय किया है.

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