रेटिंगः डेढ़ स्टार

निर्माताः अप्लॉज इंटरटेनमेंट और रोज ऑडियो वीज्युअल प्रोडक्शन

निर्देशकः रोहण सिप्पी

कलाकारः हुमा कुरेशी,अवंतिका दसानी, परमब्रता चटर्जी,रजित कपूर, समीर सोनी,इंद्रनीलसेन गुप्ता, अवंतिका अके्रकर व अन्य

अवधिः लगभग साढ़े तीन घंटे,30 से 37 मिनट के छह एपीसोड

ओटीटी प्लेटफार्मः जी 5

अंग्रेजी का शब्द है ‘‘प्लेजरिज्म’’ यानी कि साहित्यिक चोरी. साहित्यक चोरी के इल्जाम के साथ शुरू हुई मनोवैज्ञानिक, रोमांचक अपराध कथा वाली वेब सीरीज ‘‘मिथ्या’’ लेकर फिल्मकार रोहण सिप्पी लेकर आए हैं,जो कि 2019 की सफल ब्रिटिश वेब सीरीज ‘‘चीट’’ का स्तरहीन भारतीय करण है.जिसमें साहित्यिक चोरी,झूठ पर टिके रिश्तों, एक लड़की द्वारा अपने पिता से  स्वीकृत होने की लड़ाई के साथ मर्डर मिस्ट्री भी है. यह सीरीज 18 फरवरी से ‘जी 5’ पर स्ट्रीम हो रही है.

कहानीः

कहानी दार्जलिंग के एक कॉलेज से शुरू होती है,जहां जुही अधिकारी ( हुमा कुरेशी )हिंदी साहित्य की प्रोफेसर हैं.वहीं उनके पति नील अधिकारी (परमब्रता चटर्जी   ) भी प्रोफेसर हैं.नील को अपने एक शोध व किताब के लिए ग्रांट की जरुरत है,जो कि कालेज के ट्स्टी व उद्योगपति राजगुरू(समीर सोनी) के हाथों में हैं.जुही अधिकारी अब ‘एचओडी’बनने वाली हैं.पर जुही हमेशा असमंजस में रहती हैं.वह अक्सर अपनी शादी की अंगूठी उतारकर कहीं भी छोड़ देती हैं.यानी कि वह करना कुछ चाहती हैं,पर कर कुछ और ही बैठती हैं.वह अपनी सेक्स संबंधी इच्छाओं को दबाने का प्रयास करती हैं.वह अक्सर एंजायटी की दवा लेती रहती है.गर्भधारण न कर पाने के चलते वह तनाव से गुज रही हैं.तो वहीं उनके कालेज की छात्रा रिया राजगुरू(अवंतिका दसानी   ) के जीवन में भी तमाम त्रासदियां हैं.जुही अधिकारी निबंध लेखन में एक छात्रा रिया राजगुरू को इस आधार पर फेल कर देती हैं कि रिया ने सत्य और तथ्य विषय पर जो निबंध लिखा है,वह मौलिक नही है.जुही ,रिया पर ‘प्लेजरिज्म’ का आरेाप लगाती है.अकादमिक धोखे की यह कहानी नया रूप लेती है.वैसे रिया कह चुकी होती है कि यह निबंध मौलिक है और उसी ने लिखा है.रिया राजगुरू कालेज के एक ट्स्टी राजगुरू की बेटी है.यहीं से कहानी जुही अधिकारी बनाम रिया राजगुरू हो जाती है.अब रिया अपने शातिर दिमाग से जुही को परेशान करने लगती है.जुही की अनुपस्थिति में रिया जुही के घर जाकर नील अधिकारी से मिलती है और पता चलता है कि उनके प्रिय पालतू कुत्ते की हत्या हो गयी है.इसके बाद कई घटनाक्रम घटित होते हैं.हालात ऐसे होते हैं कि हर बात के लिए जुही,रिया को ही दोष देने लगती है.एपीसोड दर एपीसोड कहानी में नए नए मोड़ आते जाते हैं.धीरे धीरे रिया अधिकारी के जीवन का सच भी सामने आने लगता है.

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लेखन व निर्देशनः

यह 2019 की सफल ब्रिटिश वेब सीरीज ‘‘चीट’’ का भारतीयकरण है,जिसे एडॉप्ट करने में लेखक व निर्देशक दोनो बुरी तरह से असफल रहे हैं.वह इसमें न तो सही ढंग से मोरॉलिटी की ही बात कर पाए और  न ही इंसानी मनोविज्ञान को ही ठीक से उठा सके.वेब सीरीज का क्लायमेक्स बहुत घटिया है.वैसे निर्देशक ने इसके दूसरे भाग को लाने का इशारा सीरीज के अंत में जरुर कर दिया है.

लेखक व निर्देशक इस मूल्यवान कथानक के साथ न्याय करने में असफल रहे हैं.सीरीज की शुरूआत में लगा था कि झूठे रिश्तों, मोरॉलिटी के साथ साथ दो विरोधाभासी चरित्रों जुही अधिकारी और रिया राजगुरू को समझने का प्रयास किया जाएगा, मगर लेखक व निर्देशक दोनों ने इन दोनों चरित्रो को एक जैसा ट्ीटमेंट देकर सारा गुड़ गोबर कर दिया.इतना नही मर्डर मिस्ट्ी को भी अनन फानन में इस तरह निपटाया गया कि जो सार लोगों तक पहुॅचना चाहिए,वह नही पहुॅच सका.

मंुबई महानगर में पले बढ़े और महानगरीय जिंदगी का लुत्फ उठा रहे लेखक व निर्देशक को इस बात का भी अहसास नही है कि किसी महिला को महज साड़ी पहना देने से वह कालेज में साहित्य की प्रोफेसर नही हो जाएगी.‘मिथ्या’ में कालेज में साहित्य की प्रोफेसर जुही,जो कि ‘एचओडी’ बनने का सपना देख रही है,उसे लेखक व निर्देशक ने शराब व सिगरेट फूंकने की लत की शिकार से लेकर विवाहेत्तर संबंधों में लिप्त दिखाया,जो कि दर्शक के गले नही उतरता.क्या देश के हर कालेज का प्रोफेसर ऐसा ही है.इतना ही नही पूरी सीरीज के केंद्र में हिंदी भाषा व हिंदी साहित्य है,मगर कक्षा में जिस तरह की बातचीत होती है,उसे देखकर दर्शक अपना माथ पीट लेता है.कहीं भी माहौल व भाषा की रवानी नही है.

एडीटिंग में भी गड़बडी है.

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अभिनयः

जुही जैसे जटिल और मनोवैज्ञानिक रूप से उलझे हुए किरदार के साथ न्याय करने में हुमा कुरेशी असफल रही हैं.हम अब तक हुमा कुरेशी को एक सशक्त अदाकारा  मानते आए हैं,मगर जुही के किरदार में वह निराया करती हैं.अब यह निर्देशक की अक्षमता है या हुमा कुरेशी की गलती,यह तो वही जाने.मैन्यूप्युलेशन करने में माहिर के रिया के किरदार में नवोदित अदाकारा अवंतिका दसानी,जो कि अभिनेत्री भाग्यश्री की बेटी है, बहुत ज्यादा सफल भले न रही हो,मगर उम्मीद जगाती हैं कि अगर वह मेहनत करे और उन्हे बेहतरीन निर्देशकों का साथ मिले,तो उनकी अभिनय प्रतिभा मे निखार आ सकता है.नील अधिकारी के किरदार में परमब्रता चटर्जी  अपने छोटे से किरदार में भी प्रभाव छोड़ जाते हैं.

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