Sangram Singh : कौमनवेल्थ गेमों में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन करने वाले संग्राम सिंह का कैरियर अभिनेता के रूप में भी शानदार रहा है. अभिनय करने के साथ ही वे रियलिटी शोज में भी भाग ले चुके हैं. उन्होंने ऐक्ट्रैस पायल रोहतगी के साथ शादी की है.
21 जुलाई, 1985 को रोहतक के छोटे से गांव मदीना में जन्मे संग्राम सिंह को इस मुकाम पर आने के लिए बेहद ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को ही ताकत बनाया. संग्राम सिंह के पिता उमैद सिंह सेना में जवान रहे हैं, जो अब रिटायर्ड हैं. मां रमादेवी गृहिणी हैं.
मंजिल आसान नहीं
अभिनेता संग्राम सिंह रेसलर होने के साथ ही अभिनय में भी खूब पसंद किए गए हैं. आज भी अकसर वे मिट्टी के अखाड़े मे दांवपेंच लगाते नजर आते हैं.
हालांकि एक समय ऐसा भी आया था, जब संग्राम को पूरी तरह से 8 सालों के लिए व्हीलचेयर पर रहना पड़ा था, जिस में उन की मां ने हार नहीं मानी और उन का इलाज कर पैरों पर खड़ा किया. असल में अभिनेता संग्राम सिंह को 3 साल की उम्र में रूमेटाइड अर्थराइटिस हो गया था, जिस की वजह से उन्हें 8
साल तक व्हीलचेयर पर रहना पड़ा था, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें कुश्ती के क्षेत्र में आगे बढ़ने और फिट रहने के लिए प्रेरित किया.
व्हीलचेयर से उठ कर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले वे पहलवान बन गए. उन की इस प्रेरणादायक
कहानी को एक चैनल पर भी दिखाया गया था. उन्होंने दिल्ली पुलिस में भी कुछ समय तक काम किया है. संग्राम सिंह ने साल 2015 में आई फिल्म ‘उवा’ से अपनी शुरुआत की थी और इस के बाद वे ‘सर्वाइवर इंडिया’, ‘द अल्टीमेट बैटल,’ ‘नच बलिए 7,’ ‘बिग बौस’ जैसे रियलिटी शोज में भी दिखाई दिए.
रेसलर संग्राम सिंह और पायल रोहतगी की लवस्टोरी भी बेहद दिलचस्प रही है. संग्राम सोशल मीडिया पर काफी ऐक्टिव हैं और फिटनैस के कई टिप्स देते रहते हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर उन के 10 मिलियन फौलोवर्स हैं.
दिलचस्प लवस्टोरी
पायल और संग्राम की पहली मुलाकात आगरा मथुरा हाइवे पर हुई थी, जहां पायल की कार खराब हो गई थी। अचानक वहीं से संग्राम सिंह गुजर रहे थे और उन्होंने दिल्ली तक पायल को लिफ्ट दी थी. इस के बाद दोनों फिलिंपिंस के एक शो में मिले और मुलाकातों का सिलसिला आगे बढ़ा। लगभग 12 सालों तक
एकदूसरे को डेट करने के बाद दोनों ने 9 अप्रैल, 2022 को शादी कर ली.
बायोपिक पर किया काम
संग्राम कहते हैं कि अभी मैं एक ओलिंपिक मैडेलिस्ट रेसलर की बायोपिक में अभिनय कर रहा हूं, जो एक बहुत ही अलग तरीके की फिल्म है. मेरे लिए यह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका है, क्योंकि यह भूमिका एक रेसलर की है. इस की शूटिंग पूरी हो चुकी है. 5 से 10 दिन तक मैं ने इस भूमिका की तैयारी की है और कोई फिल्म हो या बायोपिक हर में मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि बायोपिक में मैडल जीतने, रहनसहन, बोलचाल, हावभाव सबकुछ उस व्यक्ति के जैसे होने चाहिए, ताकि फिल्म सजीव लगे.
संघर्ष
संग्राम आगे कहते हैं कि मैं यहां तक ठोकर खाखा कर ही पहुंचा हूं, क्योंकि कल जो था, आज वह नहीं है, आज जो है, वह आगे नहीं मिलेगा, इसलिए संघर्ष का दौर हमेशा चलता रहता है. हर इंसान गलतियां कर के ही कुछ सीखता है. कभी ऐसा समय था, जब मुझे टीवी या फिल्म के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी, लेकिन अब मुझे इस में काम करने का भी मौका मिला है, जो मेरे लिए बड़ी बात है. कभी ऐसा समय था कि मैं चल नहीं पाता था और अब रेसलर, एंकर और अभिनेता भी बन चुका हूं.
रेसलिंग से फिल्मों का सफर
रेसलिंग से फिल्मों में आने की वजह के बारे में पूछने पर संग्राम कहते हैं कि मैंने देश के लिए रेसलर इसलिए बना, ताकि एक अच्छी नौकरी मिल जाए, क्योंकि मैं एक गरीब परिवार से था। नौकरी मिलेगी तो अच्छी बात होगी. अगर आप इंडिया के लिए खेल रहे हैं, तो आप को टीशर्ट और प्रोत्साहन मिल जाया करती थी, बाकी कुछ नहीं मिलता था.
एक बार अखाड़े में मैं, सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त प्रैक्टिस कर रहे थे. किसी ने रेसलिंग पर शो बनाने की बात कही, तो सभी हंस पड़े, क्योंकि उस में नकली रेसलिंग होगा. उन सभी में मैं थोड़ा देखने में ठीकठाक था और बातचीत भी अच्छी कर लेता था, ऐसे में एक बार एक कंपनी ने ऐसे ही रेसलिंग की एक शो पर बुलाया. वहां कोई नहीं गया. बाद में सुशील कुमार ने रविवार को वहां जाने का प्लान बनाया. उस दिन भी मेरे अलावा वहां कोई नहीं गया। वहां जा कर मैं ने देखा कि सारे बड़ेबड़े विदेशी रेसलर मौजूद थे और नकली पंच एकदूसरे को मार रहे थे और उसे फिल्माया जा रहा था. मैं ताज्जुब हुआ, उन लोगों ने मुझे
कहा कि अगर मैं इस में भाग लूंगा, तो वे मुझे ₹5 हजार देंगे, जो मेरे लिए उस समय एक बड़ी रकम थी. मैं राजी हो गया और वे लोग मुझे अखाड़े से मुंबई ले कर आए और फिर साउथ अफ्रीका ले कर गए और ट्रैनिंग करवाई.
मैं ने पहला शो WWF का किया और उस शो का हीरो बन गया. फिर मैं ने एक कंपनी के साथ टाईअप कर लिया, जिस में उन्हें कुछ पैसे हर शो के कमाए पैसे से देने पड़ते थे. इस के बाद से मैं ने प्रोफैशनल कुश्ती लड़ना शुरू कर दिया और वर्ल्ड वाइड कुश्ती लड़ने का शो करता रहा. इस की पौपुलरिटी से मैं ‘बिग बौस’ में भी गया. उस दौरान मैं ने अच्छी तरह से हिंदी भाषा बोलना सीखा, फिर मेरा कैरियर फिल्मों में भी शुरू हो गया. मैं कोई निगेटिव या छोटा रोल नहीं करता. इस तरह से जो बच्चा बचपन में खड़ा नहीं हो सकता था, आज सब का प्रिय बन चुका है. मेरे कई लाख फैन फौलोवर्स हैं, ऐसे में मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उन चीजों को एंडोर्स करूं, जो यूथ को प्रेरित करें. मैं किसी प्रकार का नशा नहीं करता हूं और मैं गुटखा, सुपारी या ड्रिंक किसी को प्रमोट नहीं करता. मैं साधारण घर का भोजन खाता हूं. यही वजह है कि क्रिकेटर को छोड़ कर सोशल मीडिया पर भारत में मैं सब से अधिक लोकप्रिय सैलिब्रिटी एथलीट हूं.
चुनौतियों से हार नहीं मानता
संग्राम कहते हैं कि मैं ने अपने जीवन में फिजिकली, मैंटली, फाइनैंसियली हर तरीके की चुनौती का सामना किया है, लेकिन मैं ने कभी हार नहीं मानी. खुद पर विश्वास हमेशा रखा है.
शुरू में मेरे परिवार वालों ने सपोर्ट नहीं किया। मेरे पिता के हिसाब से यह अच्छी फील्ड नहीं है और वे मानते थे कि यह सब काम गांव में आ कर करतब दिखाने जैसा है। लेकिन जब मेरा नाम होने लगा, लोग मेरे काम की तारीफ करने लगे तब उन्होंने सहयोग दिया. मेरे बड़े भाई कुश्ती करते थे, पर प्रोफैशनल नहीं थे.
पायल बनी जीवनसाथी
संग्राम खुद रियलिटी और फिक्शन शो बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अलग तरीके की फिल्मों से दर्शक परिचित हो सकें. अभिनेत्री पायल रोहतगी से मिलने को ले कर संग्राम कहते हैं कि पायल से मैं एक बार आगरा मथुरा हाइवे पर मिला था, जहां उन की गाड़ी खराब हो गई थी। इस के बाद मैं सर्वाइवर रिएलिटी शो में मिला. उन की स्पष्टभाषी होना ही मुझे पसंद आया और हम ने शादी कर ली.
फालतू फिल्मों का दौर
आज की फिल्मों में हिंसा को अधिक दिखाया जा रहा है, इसे कैसे देखते हैं? इस पर संग्राम बताते हैं कि सभी फिल्मों को हिंसक बनाना ठीक नहीं. ’12वीं फेल’ और ‘लापता लेडीज’ आई थी, जो बहुत ही अच्छी फिल्म थी. जबरदस्ती मारपीट और ऐक्शन को फिल्मों में थोपना ठीक नहीं। जो परोसा जाता है, उसे ही दर्शक देखते हैं. मेरा मानना है कि एक अच्छी कहानी, जिस में इमोशन, रोमांस, थोड़ी ऐक्शन हो तो सभी को आकर्षित करती है। ऐसी फिल्में मनोरंजन के साथ एक मैसेज भी दे जाती है. पहले फिल्में बनती थी, सिनेमाघरों और दर्शकों के लिए, आज फिल्ममेकर पैसा कमाने के लिए फिल्में बनाते हैं. इसलिए हिंदी फिल्मों का कारोबार भी खतरे में पड़ा हुआ है.
दिल से किया हुआ कोई भी काम हमेशा सफल होता है. मुझे कोई भी फिल्म जो प्रेरित करती हो, पसंद है. मैं ने कई अच्छी फिल्में देखी है. फिल्म ‘दंगल’, ‘स्वदेश,’ ‘चकदे,’ ‘शोले’ आदि फिल्मों को मैं ने कई बार देखी है. असल में हर दौर में कुछ अच्छी और कुछ फालतू फिल्में
बनी हैं.
सुपर पावर मिलने पर
संग्राम कहते हैं कि खेल में राजनीति कभी अच्छी नहीं होती, साथ ही गांव में ऐसी कई अच्छे खिलाड़ी हैं, जो शहर तक पहुंचने के पहले ही दम तोड़ देते है, क्योंकि उन की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती। मैं सुपर पावर मिलने पर उन्हें आगे लाने की कोशिश करूंगा ताकि देश को अधिक से अधिक मैडल मिल सकें.