नेहा सरगम एक भारतीय टेलीविज़न अभिनेत्री हैं, जो मूल रूप से पटना बिहार की रहने वाली हैं. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक गायिका के रूप में इंडियन आइडल 4 से की थी,जिसके बाद वह टेलीविज़न सीरियल “चाँद छिपा बादल में” से टेलीविज़न में डेब्यू किया.नेहा सरगम ने अपने करियर की शुरुआत सिंगिंग कम्पटीशन शो “इंडियन आइडियल” से की थी. उन्होंने कुल दो बार इस शो में भाग लिया, लेकिन सिंगिंग में कैरियर तलाशते हुए सोनाली बेंद्रे की नजर उन पर पड़ गई. सोनाली ने उन्हें एक्टिंग में अपना कैरियर बनाने की सलाह दी. जिसके बाद उन्हें घर बैठे ही ‘चांद छिपा बादल में’ में निवेदिता की भूमिका के लिए ऑफर आया. जिसके बाद वह टेलीविज़न शो जैसे “हार-जीत”, “सावधान इंडिया”, “ये है आशिकी”, “रामायण”, “ये रिश्ता क्या कहलाता है” आदि में नजर आई है. खूबसूरत, शांत और हंसमुख नेहा की शो ‘जशोमती मैया के नंदलाला’ सोनी टीवी पर प्रसारित की जा रही है, जिसमे उन्होंने यशोदा माँ की भूमिका निभाई है, जिसे दर्शकों का बहुत प्यार मिल रहा है. नेहा ने पहले छोटे नंदलाला की माँ और अब बड़े कृष्ण की माँ बनी है, जिससे उन्हें पता चल रहा है कि एक माँ अपने बच्चे को बड़ा करने में कितना समय और धैर्य रखती है. दर्शकों को भी उनका काम नैचुरल लग रहा है. उन्होंने अपने इस अनुभव को गृहशोभा से शेयर किया है, पेश है खास अंश.

सवाल – एक्टिंग के क्षेत्र में कैसे आना हुआ?

जवाब – प्लान कोई नहीं था, मैं पूरी तरह से पढ़ाई और गाने पर फोकस्ड थी, क्योंकि मैं क्लासिकल सिंगर भी हूं. मेरी डेब्यू भी सोनी टीवी की इंडियन आइडल से ही हुआ था. मेरे लिए कॉमबैक है. मेरे ऑडिशन से निर्माता, निर्देशक को लगा कि मैं एक्टिंग भी अच्छा कर लुंगी और मैंने काम शुरू किया. मैंने हमेशा परिवार के साथ रहकर काम किया है. उन्हें भी साथ ले आई. मेरे पहले निर्माता ने बहुत प्यार से पेरेंट्स को समझा दिया था कि कोई एक मेरे साथ आयें, ताकि दिन के अंत में मुझे परिवार का सहयोग मिल सकें. मेरी माँ मेरे साथ आई थी, धीरे-धीरे मेरी पूरी फॅमिली यहाँ आ गयी है.

सवाल – पहला ब्रेक कब मिला ?

जवाब – इंडियन आइडल की ऑडिशन देने के बाद ही पहला ब्रेक टीवी पर मिला था. इसके बाद निर्माता, निर्देशक के ऑफर आने लगे थे, क्योंकि मेरा चेहरा उन्हें एक्टिंग के लिए भी ठीक लग रहा था. इसके बाद शो ‘चाँद छुपा बदल में’ से मैं घर-घर जानी गयी.

सवाल –इस शो में माँ की भूमिका के लिए कितनी तैयारी करनी पड़ी? पहले छोटे बच्चे और अब बड़े बच्चे के साथ एक्टिंग करने में कितना अंतर महसूस कर रही है?

जवाब –मेरे हिसाब से माँ बनने के लिए किसी भी महिला को कोई तैयारी नहीं करनी पड़ती, क्योंकि ये उनमे अपने आप ही रहता है, जो बच्चे को देखने के बाद सब समझती है. मैंने अपनी माँ, दादी, नानीके व्यवहार को भी देखा है और मैंने पूरे देश की माँ से इसे उधार मांगी है. इसके अलावा मैंने ब्रज की भाषा को हिंदी में मिलाकर प्रयोग किया है, ताकि दर्शकों को प्रमाणिकता के साथ समझने में आसानी हो, क्योंकि ये पैन – इण्डिया शो है.

बच्चा छोटा होने पर उसके हिसाब से पेरेंट्स अधिकतर चलते है, लेकिन बड़े होने पर पेरेंट्स को बच्चे की बात मनवानी पड़ती है और अगर बच्चे को समझ न आये, तो उसे बैठकर समझाना पड़ता है. ये एक ड्रामा सीरीज है, जिसे सभी पसंद कर रहे है. इसमें मैं बेटे को हर तरह से स्ट्रोंग बना रही हूं. जिसमे मैं दयालू, धीरज, लालच आदि के बारें उदाहरण देकर समझा रही हूं. मुझे छोटे बच्चे के साथ खेलने और बात करने का अनुभव है, क्योंकि कॉलेज के समय में मैंने किंडरगार्डन में कुछ दिनों तक पॉकेट मनी के लिए काम भी किया था. इससे मुझे बच्चों के बारें में थोड़ी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा मैं एक कलाकार हूं, मुझे हर तरह की एक्टिंग करनी पड़ती है.

सवाल – माँ की भूमिका एक बच्चे के जीवन में कितनी होती है?

जवाब – माँ एक बच्चे के जीवन की अमूल्य निधि है, जिसके द्वारा उसने इस खूबसूरत संसार को देखा है.शारीरिक रूप से भी एक बच्चा माँ की गर्भनाल से जुडा होता है, ऐसे में बच्चे की किसी परेशानी को माँ अच्छी तरह से समझती है. इसलिए माँ को सम्मान, प्यार और आदर हमेशा देनी चाहिए. बड़ों को भी अपने बच्चों का सम्मान करनी चाहिए.

सवाल – पूरे दिन माँ की भूमिका निभाते-निभाते उससे निकल कर बेटी बनना कितना मुश्किल होता है?

जवाब – कुछ मुश्किल नहीं होता, क्योंकि मेरी माँ आसपास में सबकी माँ है और मुझे बेटी बनना ही पड़ता है.

सवाल – माँ के साथ बिताया कोई पल, जिसे आप याद करती है?

जवाब – माँ की प्यार और ममता अलग होती है, जिसे महसूस हर पल करती हूं. माँ गलती करने पर डांटे, तो समझ लेना पड़ता है कि कुछ गलती हुई है. मैंने माँ के साथ काफी समय बिताया है और वह मेरे लिए अनमोल है. मेरी माँ ने प्यार और अनुसाशन दोनों ही किये है, जिसकी वजह से मैं यहाँ तक पहुँच पाई. मेरी भूमिका इस शो में भी वैसी ही माँ की है, जो लोगों के सामने बच्चे की गलती को नजरअंदाज करती है, पर बाद में डांटती है.

सवाल – सिंगिंग को क्या आप मिस नहीं करती?

जवाब – मैं सिंगिंग मिस नहीं करती. मैं नाटक ‘मुगले आजम’ सिंगिंग शो करती हूं, जिसमे मैं अनारकली की भूमिका के साथ सिंगिंग भी करती हूं. सारे लाइव गाने मैं गाती हूं.

सवाल – यहाँ तक पहुँचने में कितना संघर्ष रहा? परिवार ने कितना सहयोग दिया?

जवाब – संघर्ष तो हर काम में कम या अधिक रहता है. कई बार जब काम होते-होते रुक जाता है तो समझ लेना चाहिए कि इस काम के लिए मैं नहीं बनी हूं. संघर्ष केवल कोविड 19 के समय हुआ था. वह जीवन भी कट गयी, पर जल्दी से सब ठीक हो गया और मुझे काम भी मिला.

परिवार के सहयोग की वजह से ही यहाँ तक पहुंची हूं. सभीने मेरा बहुत सपोर्ट दिया है, हर दिन हर पल उनका साथ मिला. जिससे किसी चैलेंजेस को लेना आसान रहा. मेरी माँ संगीता दूबे एक सिंगर है, पिता रमेश दूबे जॉब औरबहन बैंकर है.

सवाल – कोई सन्देश जो आप देना चाहे?

जवाब – माता-पिता से अच्छी बात बच्चे के लिए कोई सोच नहीं सकता, इसलिए माता-पिता कुछ बोले, तो सुन लेना ही उत्तम होता है.

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