‘मिस भोपाल’ की खिताब पा चुकीं खूबसूरत, विनम्र, स्पष्टभाषी अभिनेत्री दिव्यंका त्रिपाठी (Divyanka Tripathi ) ने धारावाहिक ‘बनूं मैं तेरी दुलहन’ में विद्या और दिव्या 2 अलगअलग भूमिका निभा कर चर्चा में आईं और इस भूमिका के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. इस के बाद भी उन्होंने कई धारावाहिकों, फिल्में और वैब सीरिजों में काम किया है, लेकिन उन की धारावाहिक ‘ये है मोहब्बतें’ में डा. इशिता भल्ला की भूमिका को दर्शकों ने खूब पसंद किया.

आज भी उस शो के फैन उन्हें मिलते रहते हैं और उन के अभिनय की तारीफ करते नहीं थकते. ऐडवैंचर की शौकीन दिव्यंका ने माउंटेनियरिंग का कोर्स भी किया है. काम के दौरान दिव्यंका का परिचय ‘ये है मोहब्बतें’ के सैट पर कोस्टार, अभिनेता विवेक दहिया से हुई. दोनों में प्यार हुआ और शादी हो गई. भोपाल में रहते हुए भी उन के मातापिता ने हमेशा उन्हें अपनी चौइस का काम करने की आजादी दी है, जिस से दिव्यंका को अभिनय के क्षेत्र में आने में कोई समस्या नहीं हुई. दिव्यंका ने हमेशा हर किरदार को बखूबी निभाया है.

इन दिनों जियो सिनेमा पर उन की वैब सीरीज ‘मैजिक औफ शिरी’ में उन्होंने शिरी श्रौफ की भूमिका निभाई है, जो सब से अलग और मजेदार भूमिका है, जिसे करने में उन्हें बहुत अच्छा लगा.

उन्होंने खास गृहशोभा के लिए बात की. पेश हैं, कुछ खास अंश :

मनोरंजक कहानी

इस शो को करने की खास वजह के बारे में पूछने पर दिव्यंका बताती हैं कि मैं काफी दिनों से कुछ नई भूमिका की तलाश कर रही थी. मेरे पास जो भी स्क्रिप्ट आते थे, वे अधिकतर थ्रिलर, घरगृहस्थी की रोनेधोने वाली या मारपीट वाली होती थी, जो मुझे पसंद नहीं थी. ऐसे में जब मुझे अलग हट कर शो की स्क्रिप्ट मिली, जो इंडियन टीवी या वैब सीरीज में देखने को नहीं मिला है तो मैं मना नहीं की. ऐसे शोज आजकल बनते नहीं हैं, जो परिवार के साथ बैठ कर ऐंजौय किया जा सके.

इस के अलावा 90 के दशक में जो जादूगरी होती भी थी, वह भी किसी महिला को कभी अधिक पौपुलर नहीं देखा गया. जादूगर पीसी सरकार या जादूगर आनंद के नाम तब से लिए जाते रहे हैं.

महिलाओं को देते हैं कलंक

यह सही है कि कोई भी महिला जादूगर उभर कर नहीं आया है, लेकिन महिलाओं को अधिकतर गांव या छोटे शहरों में डायन या फिर जादूगरनी का नाम दे कर घर से बाहर निकाल दिया जाता है. आप इस बात से कितनी सहमत हैं? इस सवाल पर वे कहती हैं कि मैं इस बात से सहमत हूं कि बड़े शहरों में तो नहीं, लेकिन गांवदेहातों में ऐसा आज भी महिलाओं के साथ होता है. मैं एक छोटे शहर से हूं, जहां मुझे ऐसी बातें सुनने को मिलती रहती हैं.

अंधविश्वास के नाम पर किसी को जादूगरनी या डायन कह कर घर से निकाल देना बहुत गलत है. देखा जाए तो जादू एक मनोरंजक कला है. यह एक तरह की हाथ की सफाई है. इसे करने वाले को हमेशा शाबाशी मिलनी चाहिए. पुरुष इस कला का प्रदर्शन करते हैं तो सब मान लेते हैं, लेकिन जब यह कला औरत करना चाहती है, तो परिवार वाले इसे करने की अनुमति नहीं देते.

ऐसे में जो महिला सशक्तिकरण पर बात कही जाती है, उतना कुछ होता नहीं है. महिला प्रधान फिल्में या वैब सीरीज कम बन रही है, उन की संख्या अधिक होने की जरूरत है, ताकि महिलाओं के साथ होने वाली किसी भी अन्याय को परदे पर लाया जाए. इस शो में भी मेरे बचपन की सपने को काफी देर बार मुकाम मिला, जो एक संघर्ष था. ऐसा रियल लाइफ में भी बहुत सारी महिलाओं के साथ होता है. वे सोचती कुछ हैं और उन के साथ होता कुछ और है.

सीखे कई जादू के ट्रिक्स

दिव्यंका आगे कहती हैं कि इस शो के लिए मैं ने कई वर्कशौप किए हैं. कई सारे ट्रिक्स सीखे हैं, जैसे कौइन को गायब कर फिर से ला देना, कार्ड गायब कर देना, छड़ी को हवा में घुमाना आदि.

जादू एक ट्रिक है, जिसे करने और सीखने में मेहनत लगती है. मैं भोपाल में जादूगर आनंद से बहुत प्रेरित हूं. उन के शोज मैं बचपन से ही देखती आई हूं. इस शो के लिए जादूगर अतुल थे और उन्होंने हमें ट्रिक सिखाया है. इसे करना आसान नहीं था. इस विधा में फुरती होने की जरूरत होती है, जिसे मैं ने दिनरात प्रैक्टिस कर पाया है. इसे करते हुए बहुत मजा आया. इस में मुझे रियल लोकेशन पर जा कर शूट करना पड़ा, जो बहुत कठिन था.

खुश हूं जर्नी से

दिव्यंका अपनी जर्नी से बहुत खुश हैं, क्योंकि एक छोटे शहर से आ कर इतना सफल हो पाना उन के लिए आसान नहीं था, लेकिन धीरेधीरे ही सही, काम मिला और वे आगे बढ़ीं.

वे कहती हैं कि मुझे जो भी शो मिला, मैं ने किया. कई बार सफल हुई कई बार नहीं. मैं ने हर काम को दिल से किया है.

कर्म पर है विश्वास

दिव्यंका सुपर नैचुरल चीजों पर विश्वास नहीं करतीं. उन्हे यह अंधविश्वास लगता है. उन का कहना है कि मैं कर्म पर अधिक विश्वास करती हूं और कर्म ही करती रहती हूं. कर्म के द्वारा ही हम दुनिया में सारे बदलाव ला सकते हैं.

खुश हूं जिंदगी से

दिव्यंका हंसती हुई कहती हैं कि शादी के बाद विवेक और मेरी जिंदगी बहुत अच्छी चल रही है. मेरी हमेशा से इच्छा रही है कि मेरा पति मेरे हर उतारचढ़ाव में मेरा साथ दें, जो वे करते हैं.

परिवार से गहरा लगाव

‘बिग बौस’ एक पौपुलर रियलिटी शो है. उस में न जाने की वजह के बारे में दिव्यंका कहती है कि मैं अपने परिवार के साथ बहुत इमोशनली जुड़ी हुई हूं, इसलिए ‘बिग बौस’ में नहीं जाना चाहती हूं, क्योंकि वहां काफी दिनों तक परिवार से दूर रहना पड़ता है. इस के अलावा वहां की भाषा मेरी समझ से परे है, वह मुझे खटकता है.

सुपर पावर मिलने पर

सुपर पावर मिलने पर औरतों के स्टेटस को बदलूंगी, क्योंकि पूरी दुनिया से अलगअलग खबरें आती रहती हैं, जिस में ईरान में लड़कियों की शादी की उम्र 9 साल कर दिया गया है. अमेरिका में औरतों को रेप होने पर भी अबौर्शन कराने का अधिकार कुछ जगहों पर नहीं है. ऐसे में रेपिस्ट के बच्चे को उन्हें पैदा करना पड़ता है. हमारे देश में भी हर जगह पर औरतों पर वाइलेंस होते रहते हैं, जिसे सुनने वाला कोई नहीं होता. इस से पता चलता है कि औरतों का स्तर दिनबदिन नीचे गिरता जा रहा है और वूमन सपोर्ट में आवाजें उठ नहीं पा रही हैं. मेरे पास सुपर पावर होने पर औरतों को मर्दों के बराबर के स्तर पर लाना चाहूंगी.

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