बात चाहे फैस्टिवल्स की हो या फिर अपने घर को हमेशा अपटूडेट रखने की, इस के लिए हम समयसमय पर घर के इंटीरियर को चेंज करने के साथसाथ दीवारों पर पेंट भी करवाते रहते हैं ताकि घर हमेशा चमकता व नए जैसा लगे. लेकिन कई बार हम दीवारों पर पेंट करवाते समय सिर्फ पेंट के कलर व डिजाइन पर ही विशेष ध्यान देते हैं और उस की सतह, कमरे के वातावरण इत्यादि चीजों को पूरी तरह से इग्नोर कर देते हैं, जिस की वजह से पेंट या तो पूरी तरह से खराब हो जाता है या फिर उस पर पैचेस आने लगते हैं.

कई बार पेंट करने के दौरान भी कई तरह की मिस्टेक्स कर दी जाती हैं, जिन की वजह से कई बार पेंट दीवारों की शोभा बढ़ाने के बजाय उसे और भद्दा दिखाने का काम करता है. इसलिए जरूरत है पेंट के दौरान इन बातों का ध्यान रखने की और यह जानना भी कि अगर पेंट करने के दौरान कुछ मिस्टेक्स हो जाएं तो उन्हें कैसे फिक्स किया जाए, आइए जानते हैं:

ब्लिस्टरिंग

अगर आप को दिखे कि दीवार पर पेंट करवाने के बाद उस की सतह से दानेदाने उभर रहे हैं यानी पेंट में बबल्स दिखने लगें तो उसे ब्लिस्टरिंग कहते हैं. यह समस्या अकसर तब आती है, जब दीवार पर पहले से सीलन या मौइस्चर होता है और उस पर ही बिना ध्यान दिए पेंट कर दिया जाता है या फिर पेंट के बिना सूखे ही उस पर दोबारा पेंट का रीकोट कर दिया जाता है, जिस की वजह से यह समस्या उत्पन्न होती है.

क्या है सौल्यूशन

दीवारों पर पेंट तभी करवाएं जब उन पर नमी या फिर मौइस्चर न हो. पहले एक कोट करें और जब तक वह सूख न जाए तब तक दूसरा कोट न करें वरना उस पर ब्लिस्टरिंग की प्रौब्लम आने के साथसाथ सारा पेंट खराब होने का भी डर बना रहता है. ऐसी दीवारों के लिए हमेशा सही अंडरकोट प्राइमर का चयन करें ताकि उन पर इस तरह की कोई दिक्कत न आए और पेंट को सैट होने में आसानी हो.

माउल्ड

माउल्ड एक तरह का फंगस होता है, जो दीवारों की सतह में ब्लैक, ग्रे, ब्राउन, ग्रीन जैसे धब्बों के रूप में उभरता है. यह समस्या ऐसी दीवारों पर उत्पन्न होती है, जहां दीवारों पर बहुत ज्यादा मौइस्चर, वैंटिलेशन न के बराबर और कमरे में सूर्य की रोशनी बिलकुल नहीं आती है. ऐसे में अगर अच्छे व क्वालिटी वाले पेंट का चयन नहीं किया जाता, तो यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है. इसलिए ऐक्सपर्ट की सलाह लेना बहुत जरूरी है ताकि सही समय व सही पेंट का चयन किया जा सके.

क्या है सौल्यूशन

जिन दीवारों पर मोल्ड की समस्या हो, उन पर पेंट करवाने से पहले इस प्रौब्लम का सौल्यूशन करने की जरूरत होती है. इस के लिए स्टेन ब्लौकिंग प्राइमर का चयन कर सकते हैं. इस से दीवारों पर एक तो धब्बे नहीं पड़ते हैं और दूसरा मौइस्चर वाली दीवारों को इस से प्रोटैक्शन भी मिलता है. ऐसी दीवारों के लिए लो क्वालिटी पेंट व औयल पेंट का चयन करने से बचें. ऐसी दीवारों के लिए मोल्ड रिसिस्टैंट पेंट व प्राइमर का चयन करें. यह थोड़ा महंगा जरूर होगा, लेकिन ऐसी दीवारों पर बेहतर रिजल्ट के लिए इसी का चयन करना ठीक है.

पीलिंग

अकसर पेंट के बाद दीवार का निकल जाना बहुत ही आम समस्या है. इस का सीधा सा कारण या तो दीवार का कमजोर होना या फिर गंदी , मौइस्चर वाली दीवार पर बिना कोई ट्रीटमैंट किए उस पर सीधे पेंट कर देना या फिर सही व पूरी तैयारी से पेंट न करना, जिस वजह से दीवार जगहजगह से निकलने लगती है और सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है. दीवार पहले से भी ज्यादा भद्दी दिखने लगती है.

क्या है सौल्यूशन

सब से पहले सैंडिंग मशीन से दीवार को स्मूद करें ताकि उस पर पेंट लगाने के लिए स्मूद बेस मिल सके. इस के बाद इस पर अंडरकोट अप्लाई कर के फिर उस पर अच्छी गुणवत्ता वाला पेंट अप्लाई करें. इस से दीवार नहीं निकलने यानी पीलिंग औफ की समस्या नहीं आती है.

मड क्रैकिंग

दीवारों पर मड क्रैकिंग की समस्या तब होती है, जब टैक्सचर या उभरी हुई सतहों पर बैलेंस्ड तरीके से पेंट न कर के मोटा, भारी या फिर पतला पेंट कर दिया जाता है और कई बार यह समस्या तब भी होती है, जब पेंट को रोलर की मदद से न कर के ब्रश से किया जाता है. इसलिए दीवार की कंडीशन को देख कर ही पेंट करना चाहिए ताकि बैस्ट से बैस्ट रिजल्ट मिल सके.

क्या है सौल्यूशन

इस के लिए सब से पहले क्रैक्स में 2-3 पतले कोट्स अप्लाई करें ताकि उस पर पेंट को फाइनल कोट देने में आसानी हो और अगर उस जगह पर वाल पेपर लगा हुआ है, तो उसे चेंज कर के फिर दीवार को अच्छे से फिल कर के उस पर दोबारा वाल पेपर सैट किया जा सकता है.

शाइन में कमी

जब दीवार की जरूरत के अनुसार पेंट का चुनाव नहीं किया जाता है, तब ऐसी स्थिति में दीवार पर कई जगह शाइन आने की जगह उस पर फीकाफीकापन लगने लगता है और कई बार यह अच्छी क्वालिटी के पेंट्स का इस्तेमाल नहीं करने की वजह से भी होता है.

क्या है सौल्यूशन

अगर दीवार की सतह ज्यादा खुरदरी है, तो पहले उसे एकसमान यानी बराबर करें. फिर उस पर सौफ्ट पेंट्स अथवा औयल पेंट का भी सहारा ले सकते हैं. कभी ऐसी दीवारों के लिए सस्ते पेंट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इस से उन की रौनक बढ़ने के बजाय उन की शाइन पर गलत असर पड़ता है, जिस से दीवारें फीकीफीकी लगने लगती हैं.

पेंटिंग में रन

दीवार की जिस जगह पर एक ही कोट में अधिक पेंट लग जाता है, उस की वजह से न सिर्फ दीवार बेकार लगने लगती है, साथ ही पेंट कई बार बहने भी लगता है, जिसे पेंट में रन कहते हैं.

क्या है सौल्यूशन

अगर किसी जगह पर ज्यादा पेंट लग जाए, तो उस पर और कोटिंग न करें, बल्कि उसे सूखने दें. सूखने के बाद उसे टूल की मदद से हटा दें ताकि दोबारा से उस जगह पर पेंट एकसमान होने के साथसाथ पेंट करने में भी आसानी हो.

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