बिग बी के बेटे अभिषेक बच्‍चन (Abhishek Bachchan) की बीमारी बहुत चर्चा में है. अभिषेक बच्‍चन को ‘फ्रूक्‍टोफोबिया’ (fructophobia) है. इस बीमारी में फल से डर लगने लगता है.

अभिषेक बच्‍चन की अजीब बीमारी

पिछले महीने से अभिषेक बच्‍चन किसी न किसी वजह से हमेशा चर्चा में बने रहे हैं. हालांकि इसमें से ज्‍यादा चर्चा की वजह नेगेटिव है. कुछ समय पहले अभिषेक का उनकी पत्‍नी से डीवोर्स की खबर चर्चा में थी. उसके बाद मीडिया में अभिषेक की मूवी दसवीं फेल एक्‍ट्रैस निमरत कौर से अफेयर की खूब चर्चा रही. यह कहा गया कि निमरत कौर और अभिषेक बच्‍चन के बीच प्‍यार की खिचड़ी पक रही है. अब अभिषेक के बारे में यह कहा जा रहा है कि उन्‍हें एक अलग तरह की बीमारी हो गई है, जिसमें फलों से डर लगता है. इस बीमारी को फ्रुक्‍टोफोबिया कहते हैं. आजकल अभिषेक अपनी नई मूवी i want to talk के कारण भी चर्चा में हैं . यह मूवी 22 नवंबर को रिलीज होगी. इसके डायरेक्‍टर है शुजीत सरकार

क्‍या है फ्रुक्‍टोफोबिया (Fructophobia )

फ्रुक्‍टोफोबिया एक एंग्‍जाइटी डिसऔर्डर (Anxiety Disorder) है. फोबिया का मतलब होता है किसी चीज से डर लगना. यह अलगअलग तरह का होता है किसी को अंधेरे से डर लगता है, तो किसी को ऊंचाई से . बिग बी के बेटे अभिषेक को फलों का फोबिया हुआ है. कहा जाता है कि इस बीमारी में फलों को देखते ही सांस तेजी से ऊपर नीचे होने लगती है. इस डिजीज के होने की कई वजहें होती है जैसे छोटी उम्र में फल से जुड़ा कोई बुरा अनुभव रहा हो, जिसकी वजह से बड़े होने पर भी डर बना रहता है. कुछ लोगों में यह देखा गया है कि फल खाने से उनके डाइजेशन पर बुरा असर पड़ता है, इस वजह से भी वे फल खाने से घबराते हैं. कुछ मामलों में यह देखा गया है कि मानसिक तनाव की वजह से भी मेंटल हेल्‍थ से जुड़ी यह समस्‍या हो जाती है.

कैसे पहचानेंगे fructophobia को

इस बीमारी में फलों को देखते ही टेंशन हो जाता है. इससे देखने से भी बचने की इच्‍छा होती है. फलों का जिक्र भी किया जाए, तो तनाव महसूस होने लगता है. मन में कभी भी फल खाने की इच्‍छा नहीं होती है, चाहे बात अमरूद खाने की हो या कीवी खाने की. न्‍यू लाइफस्‍टाइल को फौलो करने वाले युथ भी यह मानते हैं कि फलों में ढेर सारे विटामिन्‍स होते हैं इसलिए यह शरीर के लिए बेहद जरूरी है. इतना ही नहीं फलों में फाइबर भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसकी वजह से यह डाइजेशन को दुरुस्‍त रखता है. ऐसा नहीं है कि इस रोग का इलाज नहीं है. अगर आपको खुद में या किसी अपने में इस बीमारी के लक्षण नजर आए, तो साइकोलौजिस्‍ट से मिलें. कौग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी, दवाओं और दूसरे चिकित्‍सकीय तरीकों को अपना इस डिजीज का इलाज किया जा सकता है.

कई तरह के होते हैं फोबिया

किसी सिचुएशन और वस्‍तु से डर की वजह से होने वाला तनाव ही फाेबिया है. इस स्थिति में इन चीजों का सामना करने पर तुरंत तनाव होने लगता है. इसी वजह से इसे मेंटल हेल्‍थ की समस्‍या माना गया है. यूएस की नेशनल इंस्‍टीट्यूट औफ मेंटल हेल्‍थ वहां रहने वाले करीब 12. 5 प्रतिशत युवा किसी न किसी तरह की फोबिया की जकड़ में हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाओं में फोबिया अधिक पाया गया है. इस बीमारी में वोमिटिंग महसूस होना, कांपना, दिल की धड़कन बढ़ना जैसे लक्षण आम हैं.

जानें इन खास फोबियाज को उनके नाम से

माइसोफोबिया (Mysophobia) –  गंदगी या बैक्टीरिया का डर
हाइट्रोफोबिया (Hydrophobia) – तैरने या गहरे पानी में जाने का डर
हिमनोपोबिया (Hemophobia) –  खून देखने या खून से संबंधित स्थिति का सामना करने पर घबराहट होना
क्लॉस्ट्रोफोबिया (Claustrophobia) – छोटी या बंद जगहों में फँसने का डर, जैसे लिफ्ट, छोटे कमरे या सुरंगों में।

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