हमारे भीतर की रोमांटिक भावनाओं के लिए ठंड के दिन बेहद सुहावने होते हैं और अकसर हम इस सीजन के और लंबा होने की कामना करते हैं. लेकिन सभी ठंड के दिनों में इतना अच्छा महसूस नहीं करते. खासतौर से वे लोग जिन्हें सर्दी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं और त्वचा की ऐलर्जी आदि होती है. ठंड की रूखी और ठिठुराने वाली स्थिति खासतौर से त्वचा के लिए काफी कठोर साबित होती है. हमारे पैर भी ठंड के रूखेपन को झेलते हैं, इसलिए फटी एडि़यां, तलवों में जलन, पैरों में सूजन और खारिश जैसी दिक्कतें आम होती हैं.
हालांकि हम अपने चेहरे की त्वचा की देखभाल के लिए काफी कुछ करते हैं, मगर पैर अकसर अनदेखी के शिकार हो जाते हैं, क्योंकि ये देखभाल की प्राथमिकता की सूची में सब से निचले पायदान पर होते हैं. हम अपने चेहरे और हाथों की त्वचा पर नियम से रोज क्रीम लगाते हैं, लेकिन पैरों की त्वचा पर हमारा ध्यान नहीं जाता. जब कभी हमें पैरों का खयाल आता है तब हम पैडिक्योर कराने भागते हैं, मगर ठंड ऐसा मौसम है जब हमारे पैरों को भी ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है.
ठंड से बचने के लिए हम ज्यादातर समय पैरों में जूते पहने रहते हैं. घंटों उन में बंद रहने की वजह से कई बार इन में बदबू आने लगती है. यहां तक कि कई बार हम सोते समय भी जुराबें या वार्मर पहने रहते हैं. ऐसे में पैर बाहरी वातावरण के संपर्क में बहुत कम समय के लिए आते हैं. कुछ लोग ठंड को ले कर ज्यादा ही संवेदनशील होते हैं. ऐसे लोगों को ठंड की शुरुआत में ही त्वचा में दिक्कतें होने लगती हैं. ठंड में होने वाली कुछ समस्याएं इतनी गंभीर होती हैं कि वे हमारे पैरों की सेहत और खूबसूरती को पूरी तरह छीन लेती हैं. इन में से कुछ ये हैं:
1. चिलबेन
चिलबेन ठंड में होने वाली सब से आम समस्या है. इस की वजह से पैरों की त्वचा पर छोटे, लाल, खुजली वाले निशान बन जाते हैं और पैरों की त्वचा में सूजन आ जाती है. ऐसा तब होता है जब हमारे पैर लंबे समय तक ठिठुराने वाली ठंड के सीधे संपर्क में रहते हैं. ठंड में रक्त नलिकाएं छोटी होती जाती हैं और ये जब उंगलियों को गरमाहट मिलती है तब अपने सामान्य आकार में लौटती हैं.
चिलबेन के चलते सूजन, छाले व अन्य कई समस्याएं भी सामने आती हैं. यह सूजन अकसर छोटी उंगलियों में होती है, लेकिन पैर के कई हिस्सों में फैल सकती है. लेकिन आप को इस से घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि इस से बचाव और इस का इलाज संभव है. फंगलरोधी लोशन, क्रीम और पाउडर लगा कर फंगल इन्फैक्शन से बचा जा सकता है.
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2. रेनौड्स डिजीज
यह उंगलियों की छोटी नसों को प्रभावित करती है. दरअसल, सिकुड़न की वजह से इन नसों में कम मात्रा में औक्सीजन का संचार होता है, इसलिए यह समस्या होती है. ऐसे मरीज अपनी उंगलियों के रंग में बदलाव देखते हैं. वे पहले सफेद फिर नीली और बाद में लाल हो सकती हैं. डायबिटीज के मरीजों में ठंड के दिनों में ज्यादा समस्या रहती है.
3. छाले
ठंड के मौसम में किसीकिसी के पैरों की त्वचा पर छाले हो जाते हैं और अगर वे संक्रमित हो जाते हैं तो उन में रक्त, पानी, तरल या फिर पस जमा हो जाता है. ऐसा बहुत ज्यादा ठंड, घर्षण या संक्रमण की वजह से होता है. अगर आप को जूतों की वजह से इस तरह की समस्या हो रही है, तो आप को तुरंत अपने जूते और जुराबें बदल देनी चाहिए और डाक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
4. घट्टे और गोखरू
शायद आप ने भी कभी अपने पैरों की त्वचा की मोटाई बढ़ना महसूस किया हो. ऐसा तब होता है जब आप की त्वचा ठंडे मौसम, घर्षण और दबाव से खुद को बचाने की कोशिश करती है. अधिकतर लोगों को दबाव या घर्षण के कारण हटाने से इस समस्या से नजात मिल जाता है. जिन लोगों को इस से लाभ न हो उन्हें डाक्टर से मिल कर बचाव के उपायों के बारे में जानना चाहिए.
ठंड में रूखी और पपड़ी वाली त्वचा आप के पैरों की रौनक छीन सकती है. ऐसे में न सिर्फ संक्रमण से बचाव और ठंड की बीमारियों से दूर रहने के लिए, बल्कि अपने पैरों को खूबसूरत बनाए रखने के लिए भी आप को अपने पैरों की उपयुक्त देखभाल करनी चाहिए.
आगे बताए जा रहे तरीके अपना कर आप अपने पैरों को ठंड में भी सुरक्षित रख सकती हैं:
5. रूखी हो चुकी त्वचा को हटाएं
रूखी त्वचा को मौइश्चराइज करने से कोई फायदा नहीं होता. इस के लिए सब से पहले त्वचा की डैड हो चुकी बाहरी परत को हटाना जरूरी होता है. आप महीने में एक बार ऐक्सफोलिएशन करें. इस के लिए झांवा या लूफा का इस्तेमाल कर सकती हैं. लेकिन ऐसा हलके हाथों से करें, रगड़ें नहीं. इस से डैड स्किन में जमा हो चुकी मैल और गंदगी भी निकल जाएगी. इस के बाद पैरों में हाइड्रेटिंग मौइश्चराइजर लगा कर रात भर छोड़ दें.
इस के लिए आप होम मेड स्क्रब का इस्तेमाल भी कर सकती हैं. शुगर और औलिव औयल लें, इस में मिंट या टी ट्री औयल की कुछ बूंदें मिला कर उस से पैरों की मसाज करें. इस से डैड स्किन निकल जाएगी. टी ट्री औयल में ऐंटी बैक्टीरियल तत्त्व होते हैं.
6. अपने पैरों से करें प्यार
पैरों को हलके गरम पानी में 10-15 मिनट के लिए डुबो कर रखें. इस से पैरों की त्वचा मुलायम हो जाएगी. अब हलके हाथ से उन्हें रगड़ें और मुलायम तौलिए से अच्छी तरह से सुखा लें. पैरों पर विटामिन ई युक्त कोल्ड क्रीम लगाएं. अगर आप के पैर संक्रमण और सूजन को ले कर संवेदनशील हैं, तो कोई ऐंटी बैक्टीरियल क्रीम लगाएं. यह प्रक्रिया महीने में 2 बार दोहराएं.
7. पैरों को दें पोषण
केला मैश कर के उस में नीबू का रस मिलाएं और उसे पैरों की त्वचा पर हाइड्रेटिंग मास्क की तरह लगाएं. इस मिक्सचर को पैरों पर अच्छे से लगा कर 20 मिनट के लिए छोड़ दें. इस के बाद कुनकुने पानी से पैर धो लें. पैरों में दिन में कम से कम 2 बार मौइश्चराइजिंग फुट क्रीम या पैट्रोलियम जैली लगाएं. इसे एक बार सुबह घर से बाहर निकलते समय और दोबारा रात में सोने से पहले इस्तेमाल करें. चूंकि ठंड में रूखी और तेज हवा चलती है और ठिठुरन से बचने के लिए लोग हर समय ब्लोवर आदि के पास बैठे रहना पसंद करते हैं, ऐसे में त्वचा की नमी खत्म हो जाती है. इसे बरकरार रखने के लिए खूब सारा पानी पीते रहें.
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8. पैरों के नाखूनों का रखें खयाल
ठंड में अपने पैरों को खूबसूरत बनाए रखने के लिए आप को अपने नाखूनों को नियमित रूप से काटना चाहिए. आप चटक रंगों की नेल पेंट लगा कर अपने पैरों की रंगत को उभार सकती हैं. कुछ लोग यह सोचते हैं कि नेल पेंट में हानिकारक तत्त्व होते हैं, जो नाखूनों को नुकसान पहुंचाते हैं, मगर बाजार में ऐसे अच्छे नेल पेंट भी उपलब्ध हैं, जो नाखूनों को सुरक्षित रखते हैं. ये नाखूनों की ग्रोथ बढ़ा सकते हैं और कुछ ब्रैंड के नेल पेंट तो ऐसे भी हैं जिन में विटामिन होता है. वे नाखूनों के बढ़ने और क्यूटिकल्स की सेहत के लिए अच्छे होते हैं.
9. जुराबें पहनें
सर्दियों में अपनी त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए जुराबें पहनें. ये भी उतनी ही जरूरी हैं, जितने कि आप के स्कार्फ, कैप और दस्ताने. जुराबें आप के पैरों की त्वचा को मौसम की मार से बचाएंगी. इस से पैरों में लगी क्रीम के साथ धूलमिट्टी भी नहीं चिपकेगी.
10. आरामदायक जूते पहनें
याद रखें कि आप को हमेशा वैसे ही जूते पहनने चाहिए, जिन में आप को आराम महसूस हो. अगर आप की एडि़यों में दर्द या चुभन है तो कभी भी टाइट या ऊंची एड़ी के जूते न पहनें. इस से आप की त्वचा में संक्रमण हो सकता है अथवा त्वचा छिल सकती है.
11. त्वचा रोग विशेषज्ञ को दिखाएं
अगर आप के पैरों की त्वचा में जलन या सूजन हो रही हो अथवा पपड़ी जैसी उतर रही हो तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं, ऐसा त्वचा में गंभीर ऐलर्जी की समस्या होने की वजह से हो सकता है, जिस में तुरंत डाक्टरी इलाज की जरूरत हो सकती है.
12. ज्यादा पसीना आए तो
सर्दियों में ऊनी जुराबें पहनें. हालांकि कुछ लोगों को हाइपरहाइड्रोसिस की समस्या भी होती है, जिस में बहुत ज्यादा पसीना आता है. ऐसे लोगों के पसीने को मौसम से कोई फर्क नहीं पड़ता है. ऐसे में बोटौक्स एक जादुई इलाज की तरह काम करता है. यह पसीना आने से रोकता है.
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गरमी का मौसम हो या ठंड का, हमें अपने पैरों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए. क्योंकि हमारे शारीरिक ढांचे में पैर ही वे अंग हैं, जो पूरे शरीर का भार उठाते हैं. अगर किसी तरह के फंगल संक्रमण को आप ने नजरअंदाज किया तो वह बदतर हालत में पहुंच सकता है, जिस के चलते आप पूरे सीजन परेशान रहेंगे.
-डा. चिरंजीव छाबड़ा
डर्मेटोलौजिस्ट, स्किन अलाइव क्लीनिक्स, दिल्ली