डॉ. हिमांशु मेहता
(नेत्र रोग विशेषज्ञ और सर्जन )
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए वैज्ञानिक नित्य नए रिसर्च के द्वारा इस बीमारी की जानकारी देते जा रहे है, पर अभी तक न तो इस दिशा में कोई ठोस जानकारी मिली है और न ही कोई इलाज. सबकी नजर वैक्सीन पर टिकी हुई है, ताकि जन मानस को इस जानलेवा बीमारी से बचाया जा सके,ऐसे में विकल्प सिर्फ मास्क पहनना, सेनीटाईजर का प्रयोग करना, साबुन से हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना ही है. कोरोना के लक्षण में लगातार परिवर्तन विश्व स्तर पर देखे जा रहे है. भारत में भी इस पर वैज्ञानिकों की अलग-अलग मत सामने आ रहे है. कोरोना आंखों के द्वारा कितना फ़ैल सकती है, इस बारें में विजन ऑय सेंटर के नेत्र रोग,सर्जन विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु मेहता कहते है कि आंखों में कॉनजन्क्तिवाईटिस या सब कॉनजंकटाइवल हेमरेज कभी-कभी कोरोना वायरस का पहला लक्षण हो सकता है. इन दिनों अधिकतर मरीजों को फ़ोन पर ही दवाइयां दी जा रही है, उन्हे बुलाया नहीं जाता, क्योंकि वे स्टाफ और दूसरे मरीजो को संक्रमित कर सकते है. लॉक डाउन से पहले कॉनजन्क्तिवाईटिस के रोगी आते थे, लेकिन तब किसी को कोरोना के बारें में पता नही था. जब ये बीमारी फैली तब जाकर रिसर्चर्स ने पाया कि ये दोनों बीमारी कोरोना संक्रमण के प्राम्भिक लक्षण हो सकते है. साधारणत: आंख आ जाना और इसमें काफी अंतर है. बारिश के मौसम में काफी लोगों को वायरल इन्फेक्शन होता है. सालों साल ये होता आ रहा है. पहले एडिनो वायरस था, अब कोरोना वायरस है.
इसके आगे डॉ, हिमांशु कहते है कि कोरोना की जांच तभी करवानी चाहिए जब आखों के इन लक्षणों के साथ-साथ कोरोना के बाकी लक्षण भी दिखने लगे. मसलम तेज बुखार आना, सांसों लेने में तकलीफ, ओक्सिजन का स्तर कम हो जाना आदि है. आंख आने से ही हर किसी को कोरोना संक्रमण हो ये जरुरी नहीं. इसके अलावा कोरोना से ठीक होने के बाद भी किसी प्रकार की आंखों को लेकर समस्या अभी तक कोई सामने नहीं आया है. ये सही है कि कोरोना संक्रमण एक वायरस है, इससे ठीक होने के बाद व्यक्ति के शरीर में कमजोरी आती है, लेकिन इससे शरीर के किसी ऑर्गन को कितनी क्षति हुई है, उसकी जानकारी होने में अभी और 6 महीने और लगेंगे, क्योंकि अभी सरवाईवल प्रमुख है. अगर किसी व्यक्ति को कोरोना के साथ मधुमेह की बीमारी भी है और उसे कंट्रोल करने के लिए स्टेरॉयड दी जाती है तो उसका असर आखों पर अवश्य पड़ेगा. ऐसे ठीक हुए व्यक्ति को रूटीन में चेकअप करवाने की बाद में जरुरत है, क्योंकि कोरोना संक्रमण के बाद हर एक ऑर्गन में इसका प्रभाव हो सकता है.
डॉ. हिमांशु का कोरोना संक्रमण से बचाव के सुझाव निम्न है,
- कोरोना वायरस नाक या मुंह से शरीर में प्रवेश करती है. चमड़ी, बालों या पैर से नहीं जा सकता. ये रेस्पिरेटरी वायरस है.
- ये केवल नाक या मुंह से ही जाता है. जब कोरोना संक्रमित व्यक्ति अधिक जोर से खांसता है, तो वह पास खड़े व्यक्ति को आसानी से संक्रमित कर देता है. इसलिए हाथों को धोते रहना, कभी किसी से मिलना है तो 6 फीट की दूरी बनाये रखना और मास्क एन 95 जैसा सही मास्क पहनना बहुत जरुरी है.
- अगर दो लोग सही मास्क पहने है और सामने खड़े भी है, तो इन्फेक्शन के चांसेस 9 पर्सेंट नहीं है. सही तरह से मास्क पहनना इस समय बहुत जरुरी है, जिसमें नाक और मुंह अच्छी तरह से ढके रहने की जरुरत है.
- मैंने कई बार देखा है कि लोग मास्क के आगे या उपर नीचे हाथ लगाते रहते है, जो नहीं होनी चाहिए. सबसे तकलीफ की बात है कि लोगों को मास्क पहनने में मुश्किल होने की वजह से वे निकाल कर या ऊपर नीचे खिसकाकर बात करते है, जो ठीक नहीं.
- मास्क से अपने हाथों को दूर रखिये. इसकी आदत बनाइये, क्योंकि वैक्सीन के बाद भी कोरोना को जाने में समय लगेगा. डरना नहीं है. अगले 2 से 3 साल तक ये रहेगा और जिंदगी भी इसके साथ ही चलानी पड़ेगी. थोड़ी दूरी सबको बनाये रखनी है.
- एयरकंडिशनर रूम में साथ में बैठकर काम न करें. एसी चालू करने पर खिडकियों को खुला छोड़े, ताकि क्रॉस वेंटिलेशन हो. बाहर से खाना लाने या समान लाने से कोरोना नहीं होगा उसका डर निकाले. लिफ्ट में अगर दो लोग पहले से हो, तो उसमें जाने से बचें.
- कॉमन सेन्स अगर आप प्रयोग नहीं करेंगे तो कोरोना पर लगाम लगाना मुश्किल है. सारे शहर को बंद न कर अपने घर के दरवाजे को बंद करें और सही मास्क पहनकर बाहर निकलें. मास्क पहनने के बाद उसे साबुन से धो लें या फेंक दें. अगर कोई वाल्ब वाला मास्क पहनता है तो वह अधिक सुरक्षित है, क्योंकि वह वन वे है, उसमें कोरोना के जर्म्स नहीं जा सकता.
- न्यूज़ पेपर, मैगज़ीन या कार्डबोर्ड पर कोरोना संक्रमण होने के विचार को मन से निकाल दीजिये.
डॉ, आगे कहते है कि अभी कोविड 19 की कोई दवा नहीं है और वायरस में एंटीबायोटिक काम नहीं करता. एंटीवायरल की दवा एच वन, एन वन की जो दवा बनी थी, उसे ही प्रयोग किया जा रहा है. वैक्सीन कारगर होगा, पर एहतियात बरतने की तब भी जरुरत होगी, क्योंकि हर घर तक वैक्सीन पहुँचने भी सालों लगेंगे. कोरोना आंखों से या आंसू से जाता नहीं है, ये मिथ है. अगर किसी को है तो वह दिखाई देगा. आंख के अंदर से ये किसी के शरीर में नहीं जा सकता. बंद जगहों से सबको आज डरने की आवश्यकता है. गाड़ी को खुद चलायें. व्हाट्स एप देखना सबको बंद करना चाहिए. मैं जब भी मरीज देखता हूं तो पूरी सावधानी रखता हूं. ये एयरबोर्न है, इसलिए अधिक सावधानी रखने की जरुरत पड़ती है.