दिल्ली में भले ही अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण से लोग बचे हुए हैं, लेकिन एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) वायरस यहां पर ऐक्टिव हो गया है. एक रिपोर्ट के अनुसार अब तक दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 43 केस आ चुके हैं, लेकिन अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है. यही अगर बात करें पिछले साल की तो दिल्ली में स्वाइन फ्लू से 3627 लोग संक्रमित हुए थे और 31 लोगों की जान चली गई थी. डॉक्टर्स का कहना है कि अगर समय रहते स्वाइन फ्लू की पहचान कर ली जाए और ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाए तो उसकी गंभीर स्थिति से निपटा जा सकता है.
कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू बुखार, जिसे एच1एन1 के नाम के भी जाना जाता है, खास तौर से सूअरों के श्वसन तंत्र से निकले वायरस के कारण होता है जिसकी चपेट में आने पर कोई भी इस एंफ्लुएंजा का शिकार हो सकता है. वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फौर एनिमल हेल्थ ने अपनी एक रिपोर्ट के जरिए दावा किया है कि यह वायरस अब केवल सूअरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इस वायरस ने अपने आप को अपग्रेड कर लिया है और अब यह इंसानों में भी बड़ी आसानी से फैल सकता है.
दरअसल स्वाइन फ्लू एक बहुत ही कॉमन बीमारी है. स्वाइन फ्लू एक फ्लू की तरह है फ्लू का मतलब होता है कि वायरल इनफेक्शन .यह एक प्रकार के वायरस से होता है. यह वायरस हवा में होता है और हवा के ज़रिये ही हमारे शरीर में प्रवेश करता है.
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स्वाइन फ्लू के लक्षण –
स्वाइन फ्लू से ग्रसित व्यक्ति में सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही लक्षण होते हैं-
1. गले में खराश
2. बार-बार खांसी आना
3. तेज़ बुखार
4. सिरदर्द, शरीर दर्द, थकान, ठंड लगना, पेटदर्द
5. सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ
अगर हम किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन की बात करें तो इसका सबसे बड़ा कारण होता है हमारे इम्यून सिस्टम का मज़बूत ना होना. यह flu कम उम्र के बच्चों, बूढ़े व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं में बहुत तेजी से फैलता है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम वीक होता है. यह उन लोगों में भी बहुत तेजी से फैलता है जिनको डायबिटीज की शिकायत है या हार्ट की प्रॉब्लम है और या किसी और बीमारी का पहले से इलाज चल रहा है.
आइए जानते हैं कि इससे बचने के लिए हमें किन चीजों से दूर रहना चाहिए और क्या खाना चाहिए-
1. कोशिश करें कि इनफेक्टेड व्यक्ति से दूर रहें.
2. खांसते, छींकते समय मुंह व नाक पर कपड़ा रखें.
3. तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें क्योंकि तनाव से हमारी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और प्रतिरोधक क्षमता कम होने से संक्रमण की संभावना ज्यादा हो जाती है
4. स्टार्च (आलू, चावल आदि) पदार्थों का सेवन कम करिए. इस प्रकार के पदार्थों का अधिक सेवन करने से शरीर में रोगों से लड़ने वाली कोशिकाओं (न्यूट्रोफिल्स) की सक्रियता कम हो जाती है.
5. दही का सेवन ना करें दही की जगह छाछ का सेवन कर सकते हैं और गरम पानी पिए
6. भीड़भाड़ से बचें एवं घर पर ही रहकर आराम करें.
7. लगभग 7-9 घंटे की नींद लें.
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इलाज-
अगर खांसी जुखाम के साथ तेज बुखार हो तो अपने चिकित्सक से संपर्क करें. बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाओं का सेवन ना करें. हम में से कई लोग अपने आप ही एंटीबायोटिक्स लेना स्टार्ट कर देते हैं जिससे स्थिति और भी कॉम्प्लिकेट हो जाती है. बुखार की स्थिति में आप नॉर्मल पेरासिटामोल ले सकते हैं लेकिन अगर इससे फायदा नहीं हो रहा है तो तुरंत अपने चिकित्सक के पास जाएँ.
डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं है. यह ऐसा संक्रमण है जिससे बचाव संभव है और इसका इलाज मौजूद है. स्वाइन फ्लू होने की स्थिति में यह सबसे ज्यादा जरूरी हो कि यह जल्दी से जल्दी पता चल जाये. क्योंकि स्वाइन फ्लू के एंटी- डोज तभी कारगर है जब यह जल्दी पता चल जाए.