अमेरिका के न्यूयार्कसिटीकेब्रूनोक्स जूमें जब कोरोनावायरस से ग्रसित टाइगर कीबात सामने आई, तो सभी लोग जो घरों में पेट्स रखते है, उन्हें अपने पेट्स को घर में रखने से डरने लगे. मुंबईकी एक पॉश एरियामें एक पेट डॉग को किसी व्यक्ति ने इसी डर से गाड़ी में लादकरएक सोसाइटी के आगे छोड़ दिया. ये डॉग खाना खाने के लिए किसी के भी घर में घुसने लगा. परेशान होकर सोसाइटी वालोंने इसे वही पर रहने और खाने की व्यवस्था की. ये सही है कि डॉग, कैट्स और बर्ड्स को लोग शौकिया पालते है. ये जानवर मनुष्य से शारीरिक और भावनात्मक रूप से जुड़े होने के साथ-साथ आश्रित भीहोते है, ऐसे में जब इन्हें कोई अलग करता है,तो ये मानसिक रूप से बहुतटूट जाते है, जिसका अंदाज लगाना भी आमइंसानके लिए मुश्किल होताहै.

इस बारें में पेटा इंडिया की सीईओ वेटेरनरीडॉक्टरमनीलाल वलियातेकहते है कि वर्ल्ड एनिमल हेल्थऑर्गनाइजेशन का कहना है कि आजतक कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है, जिसके आधार पर ये कहा गया हो कि जानवर से कोविड 19 इंसान में फैला हो. हांगकांग में जो दो डॉग्स के सैंपल कोरोना टेस्ट केलिए जांचे गए और पॉजिटिव निकला , उसमें किसी भी प्रकार के क्लिनिकल सिम्पटॉम्स कोरोना वायरस के नहीं था. इसका अर्थ ये निकला कि ये वायरस इन्सान से ही डॉग्स में आये थे और वायरस मल्टीप्लाई भी नहीं कर रहे थे. बेल्जियम में जो कैट का मामला था, उसमें भी इन्फेक्शन उसके मालिक से ही आया था. टाइगरके केस में भी जू कीपर जो उसकी देखभाल करते थे वह कोरोना पॉजिटिव टेस्ट पाया गया था.

इस तरह से ये साफ़है कि जितने भी केस हुए सब मनुष्यों से ही जानवरों में संक्रमणआया है.जानवरों के अंदर ये वायरस विकसित होकर अपने आप ही ख़त्म भीहो जाता है.इसलिएडॉग्स, छोटे और बड़े कैट्स से किसी को भी कोई खतरा नहीं है. जब तक वह जानवर कोरोना वायरस के मरीज से दूर है, वह सुरक्षित है. जानवरों को हीमनुष्यों से अधिक सुरक्षित रखने की जरुरत है. घर के पालतू जानवरों को कोविड 19 के मरीज से दूर रखने की आवश्यकता है. कोरेंटाइन में रहने वाले व्यक्ति के पास भी इन जानवरों को जाने नहीं देना चाहिए. अगर कोई अकेला रहता हो और कोरोना वायरस से पीड़ित हो, तो ऐसे व्यक्ति को अपने पेट्स को किसी रिश्तेदार या दोस्तों के पास रहने दे देना चाहिए, ताकि वे सुरक्षित रहे.

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डॉ मनीलालकहते है कि आज सोशल डिस्टेंसिंग जरुरी हो चुका है, ऐसे में अगर कोई जानवरों को आसपास घूमाने ले जाता है, घर आने के बाद उनके पंजे, नाक और मुंह को गीले टिस्यू पेपर से साफ़ कर देनाचाहिए,ताकिकिसी प्रकार के वायरस से उन्हें बचाया जा सकें.इसके अलावा सरकार को भी पहले की चिड़ियाघर कांसेप्ट से हटकर नेशनल पार्क में रखने की जरुरत है, ताकिवे अपनी देखभाल खुद ही कर सकें और खुश रहे.साथ ही चिड़ियाघर में काम करने वाले व्यक्ति की भी कोरोना वायरस के जांच के बाद ही काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए. हमारे आसपास रहने वाले किसी भी जानवर को कोरोना से कोई लेना देना नहीं है, क्योंकि संक्रमण मनुष्यों सेही उनमें पाया गया है.

इसके आगे डॉ. मनीलाल बताते है किवेटमार्केट मेंभीकई तरह के वायरस पनपते है,क्योंकि वहां साफ़ सफाई कम होती है. इसके अलावा इंटेंसिवफार्मिंग सिस्टम में सुधार की जरुरत है, जहाँएक छोटे जगहों पर बहुत सारे जानवरों को पाला जाता है, जिसमें ये जानवर अपने लीद और पेशाब पर खड़े रहने को मजबूर होतेहै, जिससे कई बीमारियाँ फैलती है और उसे रोकने के लिए कई प्रकार की एंटीबायोटिक का प्रयोग होता है, जो मनुष्यों के लिए घातक होता है, ऐसेमेंभविष्य में हमारे फ़ूड हैबिट्स को भीबदलने की जरुरत है ताकि इस तरह के वायरस को दुबारा पनपने से बचा जा सकें. अगले पेंडेमिक से बचने के लिए इन सभीविषयों पर विचार करने की जरुरत है.

डॉ. मनीलाल का आगेकहना है कि लॉक डाउन में मनुष्यों के साथ-साथ पेट्सभी घर में बंद है, ऐसे में उनकी देखभाल करने में कई समस्याएं आ रही है, मसलन उन्हेंघूमाने ले जाना,मलमूत्र त्यागने के लिए सही जगह का न मिलना आदि. कुछ टिप्स निम्न है, जिससेपेट्सभी खुश और तंदुरुस्त रह सकें,

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  • पेट्स के साथ कुछ खेल खेले, ताकिवे शारीरिकऔर मानसिक रूप से तंदुरुस्त रहे,
  • सॉफ्ट टॉयज या लेज़र रेज उनके लिए काफी अच्छा रहता है, जिनके पीछे वे भागना पसंद करते है,
  • फिजिकल एक्टिविटी कम होने पर उनके खान पानकी मात्रा में थोड़ी कमी करें,
  • खाना देने की फ्रीक्वेंसीभीकम करें, अधिक खाने से वे बीमार न हो, इसका ध्यान रखें.
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