किसी के लिए भी अस्पताल का दौरा हमेशा योजनाबद्ध तरीके से नहीं होता, फिर भी कई मौके ऐसे आते हैं, जब हमें चुनना पड़ता है कि हमारे लिए कौन सा अस्पताल बेहतर है या हम अपने इलाज या फिर किसी भी प्रकार के टैस्ट के लिए किस अस्पताल को चुनें. आज देश में कई ऐसे अस्पताल हैं, जो बेहतर सुखसुविधा, इलाज और इलाज के परिणामों का भी दावा करते हैं. ऐसे में आप का दुविधा में पड़ना स्वाभाविक होता है, खासकर तब, जब बात किसी अपने किसी खास या परिवार की हो. अपना काम तो हम कैसे भी चला लेते हैं.
अकसर देखा जाता है कि लोग आपातकालीन परिस्थितियों में अपने निकटतम अस्पताल को ही चुनते हैं, लेकिन किसी भी अस्पताल को चुनते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आजकल अस्पतालों में भी संक्रमण के रूप में खतरा मौजूद है. साथ ही यह जरूर परख लें कि उस अस्पताल में आप को कौनकौन सी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं.
सब से पहले अपने आसपास के अस्पतालों की एक सूची तैयार कर लें. उदाहरण के तौर पर यदि आप को बाईपास सर्जरी की जरूरत है, तो इतना तो निश्चित है कि यह सर्जरी किसी छोटे अस्पताल में उपलब्ध नहीं होगी.
बुनियादी सुविधाओं से ज्यादा माने रखता है कि वह अस्पताल आप के स्वास्थ्य से संबंधित सभी जानकारियों और गतिविधियों का एक डाक्युमेंट रखता हो, जिस से भविष्य में कभी आप को दोबारा उस की जरूरत पड़ने पर वह काम आ सके. मरीजों की देखभाल में सिर्फ चिकित्सकीय देखभाल ही नहीं, अपितु परीक्षण, दवाएं, नर्स, संक्रमण नियंत्रण प्रणाली जैसी और भी कई बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए.
अस्पताल चुनते समय यह तय कर लें कि किसे प्राथमिकता देनी है. जैसे अधिकांश लोग अस्पताल चुनते समय अपनी पसंद के डाक्टर या फिर इंश्योरैंस तक ही सीमित रहते हैं, जबकि अपनी पसंद के डाक्टर से ज्यादा अस्पताल को प्राथमिकता देनी चाहिए. एक अच्छे अस्पताल में एक अच्छे डाक्टर के
साथसाथ अच्छी चिकित्सा सेवा भी उपलब्ध होती है. आप के इलाज में डाक्टर के साथसाथ अस्पताल की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इसे प्राथमिकता देनी चाहिए.
यह जान लेना भी सब से महत्त्वपूर्ण है कि जिस अस्पताल को आप ने चुना है उस में गुणवत्ता का कितना ध्यान रखा जाता है. इलाज के लिए अस्पताल को चुनने से पहले एक बार उस का दौरा कर के यह जान लें कि वहां पर साफसफाई का कितना ध्यान रखा जाता है. बेहतर हाईजीन होना अस्पताल में बहुत माने रखता है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसी संस्थाएं हैं, जो बेहतर हाईजीन, मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं इत्यादि के आधार पर अस्पतालों को मान्यता प्रदान करती हैं. इस मान्यता की जानकारी प्राप्त करें.
क्यूसीआई यानी क्वालिटी काउंसिल औफ इंडिया और नैशनल ऐक्डेरेशन बोर्ड औफ हौस्पीटल ने मिल कर अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करने वालों के लिए कड़े मानक तैयार किए हैं, जिन के आधार पर वे अस्पतालों को मान्यता देते हैं. इन मानकों में 500 से भी ज्यादा उद्देश्य तत्त्व शामिल हैं, जिन के आधार पर अस्पतालों को मान्यता दी जाती है.
जूनियर चैंबर इंटरनैशनल (जे.सी.आई.) रोगी के उपचार और संरक्षण में सर्वोच्च स्तरों को मान्यता देती है. इस मान्यता के मानदंड अंतर्राष्ट्रीय मानदंड सहमति पर आधारित हैं.
नभ (एन.ए.बी.एच.) किसी भी अस्पताल को मान्यता प्रदान करते वक्त कई बातों का ध्यान रखती है.
मरीजों का अधिकार और उन्हें लाभ.
मरीजों की सुरक्षा.
संक्रमण को नियंत्रित करना और उस से बचाव करने की क्षमता.
बेहतर और नियंत्रित नैदानिक परिणाम.
अलग से नर्सिंग सुविधा की उपलब्धता.
किसी अस्पताल को यह मान्यता मिली हुई है, तो आप इस बात को ले कर निश्चिंत रह सकती हैं कि उस में इन सब बातों का खास ध्यान रखा जाता होगा.
इस के अलावा आप निम्न बातों को ध्यान में रख कर भी अस्पताल का चयन कर सकती हैं:
क्या वह अस्पताल जौइंट कमिशन से मान्यता प्राप्त है?
अस्पताल साफसुथरा है और उस में मरीजों के सहूलियत का ध्यान रखा जाता है?
क्या उस अस्पताल में संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए कोई टीम गठित हुई है?
अस्पताल में संक्रमण को रोकने के लिए योग्य नर्स को रखा गया है?
लैब को नैशनल ऐक्डेरेशन बोर्ड फौर टैस्टिंग ऐंड कैलीबरेशन लैबोटरीज यानी एन.ए.बी.एल. उन की गुणवत्ता के आधार पर मान्यता प्रदान करता है. जिस लैब को यह मान्यता चाहिए उसे स्टैंडर्ड पैथोेलोजी लैब के लिए निर्धारित सभी मापदंडों पर खरा उतरना पड़ता है.