आजकल हाई हील पहनना फैशन स्टेटमैंट बन चुका है. लेकिन इन्हें पहनने वाले यह नहीं जानते कि वे अपनी सेहत के साथ कितना खिलवाड़ कर रहे हैं यानी अनजाने में कई तरह की परेशानियों जैसे जौइंट प्रौब्लम, पैरों में दर्द आदि को न्योता दे रहे हैं. वरिष्ठ आर्थोपैडिक सर्जन डा. टी. शृंगारी का कहना है कि ऐसे में यह जरूरी है कि सैंडल खरीदते समय यह ध्यान रखें कि वे दोनों पैरों में आराम से फिट आएं. पैर के अंगूठों पर दबाव न पड़े. हाई हील को ज्यादा समय तक पहने रखने के बजाय थोड़ीथोड़ी देर के लिए इन्हें पैरों से निकालती रहें ताकि पैरों को रिलैक्स मिले. गाड़ी चलाते समय गाड़ी में 1 जोड़ी स्लीपर रखना न भूलें ताकि ड्राइविंग करते समय उन्हें पहन सकें. हील को रैग्युलर पहनने के बजाय खास अवसर पर ही पहनें. हील पहनने के बाद रात को सोते समय कुनकुने पानी में नमक गल कर थोड़ी देर के लिए पैरों को उस में रखें. रिलैक्स फील करेंगी.

पलकें झपकाना है जरूरी

सैंटर फौर साइट के डा. महिपाल सचदेव बताते हैं कि टीवी व कंप्यूटर देखते हुए पलकें झपकाना बहुत जरूरी है क्योंकि इस से आंखों में शुष्कता तथा जलन पैदा नहीं होती और पानी आता रहता है. अध्ययनों के अनुसार सामान्य स्थितियों के मुकाबले टीवी देखते हुए लोग पलकों को 5 गुना कम झपकाते हैं. पलकें न झपकाने की वजह से आंसू नहीं आते जिस से आंखें शुष्क हो जाती हैं. हर आधे घंटे बाद स्क्रीन से नजरें हटाएं और दूर रखी किसी चीज पर 5-10 सैकंड नजरें डालें. अपने फोकस को फिर से ऐडजस्ट करने के लिए पहले दूर रखी चीज पर 10-15 सैकंड तक नजरें टिकाए रखें. फिर पास की चीज पर 10-15 सैकंड तक फोकस करें. ऐसा 10 बार करें. इन दोनों व्यायामों से आप की दृष्टि तनावग्रस्त नहीं होगी और आप की आंखों की फोकस करने वाली मांसपेशियों में भी फैलाव होगा. इस के अलावा हर 20 मिनट बाद 20 सैकंड का बे्रक लें और 20 फुट दूर देखें. हर आधे घंटे में यह व्यायाम करें.

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स्मोकिंग, ड्रिंकिंग को कहें बायबाय

मेदांता मेडीसिटी, गुड़गांव के डा. विपुल गुप्ता के अनुसार कुछ साल पहले तक बे्रन स्ट्रोक जैसी बीमारी को बढ़ती उम्र का लक्षण माना जाता था, लेकिन आज यह किसी को भी कहीं पर भी अपना शिकार बना सकता है. यह हमारे देश में मौत का तीसरा सब से बड़ा कारण है और किसी और बीमारी की अपेक्षा शरीर के विकारग्रस्त होने का दूसरा बड़ा कारण है. स्ट्रोक के मरीजों में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है. इस के मुख्य कारणों में एक कारण युवाओं में बढ़ रहा सिगरेट और शराब का चलन भी है. वैसे भी अगर एक बार स्ट्रोक हो जाए तो 4 में से 1 इंसान तो मौत के मुंह में चला ही जाता है और जो बच जाते हैं वे जीवन में कभी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते हैं. स्ट्रोक से बचना है तो अपने लाइफस्टाइल को ठीक रखें तथा सिगरेट व शराब को हमेशा के लिए बाय कहें. इस के अलावा दिमाग की तंदुरुस्ती के लिए सूखा मेवा, मछली, दही, साबूत अनाज आदि को अपने भोजन में शामिल करें.

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