कोरोना का कहर जारी है. इससे बचाव के लिए लोग अपनी-अपनी तरह से सावधानियाँ बरत रहे हैं. कोरोना वायरस जैसे वैश्विक महामारी के दौर में मास्क के साथ-साथ हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल भी जरूरी बताया गया है. इसलिए किसी भी चीज को छूने के बाद हम अपने हाथों को सैनिटाइज़ करना नहीं भूलते. विश्व स्तर पर सैनिटाइजर की मांग भी काफी बढ़ गई है. हम घर में हों या बाहर कहीं भी जाएँ, अपने साथ सैनिटाइजर का एक बोतल रखना नहीं भूलते हैं और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना सुविधाजनक भी है. लेकिन क्या आपको पता है कि सैनिटाइजर के ज्यादा इस्तेमाल या जरा सी चूक से आप दुर्घटना ग्रस्त हो सकते हैं ?
रसोई में खड़े होकर सैनिटाइजर से मोबाइल फोन, चाबी व घर के अन्य सामान को साफ करना हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले एक शख्स को काफी भारी पड़ गया. दरअसल, जब वह इन सब सामानों को सैनिटाइजर से साफ कर रहा था तब उस वक़्त ही उसकी पत्नी खाना बना रही थी. इस दौरान सैनिटाइजर उस व्यक्ति के कपड़ों पर गिर गया और देखते ही देखते कपड़ों पर आग पकड़ ली. आननफानन में उसने अपने कपड़े तो उतारें, पर वह शख्स तब तक 35 फीसदी तक जल चुका था. इस घटना में पीड़ित व्यक्ति का छाती, पेट और दोनों हाथों की त्वचा झुलस गई.
डॉक्टर का कहना है कि सैनिटाइजर में 75 फीसदी तक अल्कोहल होता है. ज़्यादातर में 62 फीसदी तक इथाइल अल्कोहल होता है. इससे यह बहुत ज्वलनशील हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि रसोई में सैनिटाइजर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. डॉक्टर का यह भी कहना है कि बार-बार और बहुत ज्यादा मात्रा में सैनिटाइजर के इस्तेमाल से त्वचा रूखी हो जाती है. इसके अलावा कुछ दूसरी दिक्कतें भी हो सकती है. रिसर्च में पाया गया है कि सैनिटाइजर का ज्यादा इस्तेमाल करने से हमारे इम्यून सिस्टम पर भी बुरा असर पड़ता है.
- केमिकल से होता है नुकसान
सैनिटाइजर में ट्राइक्लोसान नामक एक केमिकल होता है. यह त्वचा में सूख जाता है. लेकिन अगर सैनिटाइजर का बार-बार इस्तेमाल किया जाए तो यह त्वचा के भीतरी परतों में भी जा सकता है और खून में मिल कर मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए जब हाथ साफ करने का दूसरा कोई विकल्प न हो, तभी सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए.
- हो सकता है एलर्जी
सैनिटाइजर में बेंजाल्कोनियम होता है, जो बैक्टीरिया और वायरस को मारता है. लेकिन इससे कुछ लोगों को एलर्जी की भी समस्या हो सकती है. जैसे त्वचा में जलन, खुजली जैसी समस्या हो सकती है.
- अंगों पर कर सकता है नुकसान
सैनिटाइजर का इस्तेमाल सुविधाजनक तो है ही, और इसे आप कहीं भी कैरी कर के ले जा सकते हैं. इसलिए दिन-प्रतिदिन इसकी मांग बढ़ती जा रही है. सैनिटाइजर में खुशबू के लिए फैथलेट्स नामक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है, इसकी मात्रा कुछ सैनिटाइजर में ज्यादा होता है. अत्यधिक खुशबू वाले सैनिटाइजर के इस्तेमाल से लीवर, किडनी, फेफड़े और रिप्रोडक्टिव सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है.
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गाड़ी के अंदर सैनिटाइजर के इस्तेमाल से बचें
अगर आप कार के अंदर सिगरेट पी रहे हैं तो सैनिटाइजर के इस्तेमाल से बचें. क्योंकि इससे आग लग सकती है. सैनिटाइजर में अल्कोहल होता है, इसलिए इसे ठंडी जगह पर रखने का निर्देश दिया जाता है. कार के अंदर सैनिटाइजर रखा है तो इस बात का ध्यान रखें कि विंडशील्ड के सामने न रखा हो. सैनिटाइजर को कार के अंदर ऐसी जगह पर रखें जहां धूप सीधे सैनिटाइजर की बोतल पर न पड़े. जब भी सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें, तो हाथों को कुछ देर के लिए आँखों से दूर रखें.
- सैनिटाइजर बच्चों के लिए ठीक नहीं
आप छोटे बच्चों की केयर को लेकर परेशान हैं और बार-बार सैनिटाइजर का प्रयोग करती हैं, तो ध्यान रखें कि बच्चों के लिए सैनिटाइजर सुरक्षित नहीं है. बच्चों के हाथ में सैनिटाइजर डालने से बचना चाहिए, क्योंकि बच्चों की त्वचा कोमल होती है इसलिए सैनिटाइजर के इस्तेमाल से बच्चों के कोमल त्वचा को नुकसान पहुँच सकता है. बच्चों की त्वचा रूखी हो सकती है. सैनिटाइजर के इस्तेमाल से बच्चों में एलर्जी होने की संभावना हो सकती है. 5 साल से छोटे बच्चे मास्क नहीं लगा पाते, इसलिए बेहतर है कि बच्चों को बाहर न निकालें और न ही उन्हें दूसरों के संपर्क में आने दें. छोटे बच्चों को परिवार के सदस्य के अलावा अन्य की गोद में न दें.
- एल्कोहल से बुरा असर
कुछ सैनिटाइजर में एल्कोहल की मात्र ज्यादा होती है. एल्कोहल से त्वचा ड्राई हो जाती है. कुछ लोगों को सैनिटाइजर की आदत हो जाती है. कुछ भी छूने पर, वे तुरंत बाद हाथ पर सैनिटाइजर लगा लेते हैं. इससे त्वचा की नमी खत्म हो जाती है. रूखापन बढ़ने से त्वचा फटने लगती है और कई बार तो खून भी निकलने लगता है. इसलिए सैनिटाइजर का इस्तेमाल तभी करना चाहिए, जब आप घर से बाहर हों और साबुन पानी की व्यवस्था न हो. कई प्रकर के सैनिटाइजर में हानिकारक केमिकल होते हैं, इसलिए हमेशा खाना खाने से पहले इसके इस्तेमाल के बाद, पानी हाथ जरूर धो लें.
- 5 ऐसी स्थितियाँ जहां आपको हैंड सैनिटाइजर करने की जरूरत बिल्कुल नहीं है
1-साबुन और पानी होने पर
अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, किटाणुओं से छुटकारा पाने के लिए साबुन और पानी से हाथ धोना बहुत कारगर तरीका है. कम से कम 20 सेकेंड तक साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए . सैनिटाइजर के बदले साबुन पानी को प्राथमिकता देनी चाहिए.
2-जब हाथ गंदे दिखाई दे
अगर आपके हाथों में गंदगी दिखाई दे रही है, लग रहा है आपका हाथ गंदा है,तो साफ करने के लिए साबुन और पानी का इस्तेमाल करें. गंदगी को हटाने के लिए सैनिटाइजर का प्रयोग प्रभावी नहीं है. अल्कोहल बेस्ट हैंड सैनिटाइजर आपके हाथों से गंदगी को दूर नहीं करता है और अगर आपके हाथ गंदे हैं तो वायरस और बैक्टीरिया को मारने में भी ये कम प्रभावी हैं.
3-अगर आपके बगल में कोई छींक रहा हो
अगर आपके बगल में कोई छींकता है तो आप हैंड सैनिटाइजर का कितनी बार इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, इसके इस्तेमाल से कोई खास फायदा नहीं होगा. आपके पास अगर कोई खाँसता छींकता है तो सांस लेते समय हवा के माध्यम से आप संक्रमण हो सकते हैं. इसलिए बेहतर होगा कि खाँसने छींकने वाले इंसान से दूरी बनाकर रहें. क्योंकि सावधानी ही सुरक्षा है.
4- बिना किसी चीज को छूए
कई लोग बिना किसी चीज को छूए ही बार-बार अपने हाथों को सैनिटाइज़ करते रहते हैं. उन्हें लगता है, कुछ छू दिया हो तो ? इसलिए वह सैनिटाइजर से हाथ साफ कर लेते हैं. लेकिन एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हैंड सैनिटाइजर के ज्यादा इस्तेमाल से प्रतिरोधी बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं. हम जितना ज्यादा हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं, उतने ही किटाणु अल्कोहल के प्रति सहनशील बनते हैं. ऐसे में बेहतर यही होगा कि जब बहुत ज्यादा जरूरत महसूस हो तभी हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें.
क्योंकि इसके ज्यादा उपयोग से त्वचा में जलन, एलर्जी और त्वचा शुष्क होने लगती है. सेंटर फॉर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, हैंड सैनिटाइजर लगाने का सही तरीका यह है कि इसे हाथों पर लगभग 20 सेकेंड तक दोनों हाथों से रगड़ें, तब तक, जब तक की हाथ सुख न जाए.
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन खतरनाक हैंड सैनिटाइजर को लेकर चेतावनी देते हैं कि इसमें ऐसे उत्पाद पाये जाते हैं जिनमें जहरीले मेथनॉल होते हैं एक जहरीली शराब जो प्रणालीगत प्रभाव, अंधापन और मृत्यु का कारण बन सकती है.
कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में भी व्यापक स्तर पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन पर्यावरण के जानकार इसे पारिस्थिकी तंत्र के लिए नया खतरा बता रहे हैं. खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में सैनिटाइजर के छिड़काव से कई छोटे किट-पतंगे और तितलियाँ मर रही है.
कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए हम काफी मेहनत कर रहे हैं, हालांकि, अगर आप प्रभावी और सस्ते तरीके की तलाश में हैं, तो बॉलीवुड एक्ट्रेस जुही चावला के इन आयुर्वेदिक नुख्से को जरूर आज़माएँ.
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हाल ही में, एक्ट्रेस जुही चावला ने अपने इंस्टाग्राम पर एक उपयोगी वीडियो शेयर किया. उन्होंने एक आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के साथ बात की और घर के हैंड सैनिटाइजर और एयर प्युरीफायर बनाने का तरीका बताया. उन्होंने वीडियो शेयर किया और कैप्शन में लिखा, “पवार ऑफ आयुर्वेद फन फ़ैक्ट. आप घर में प्युरीफायर लगाए बिना अपने कमरे की हवा को शुद्ध कर सकते हैं. कोरोना वायरस ने दुनिया भर के लोगों में आयुर्वेद की शक्ति में विश्वास को बढ़ाया है. आपके हाथों को साफ करने के लिए सैनिटाइजर घर में प्रभावी तरीके से बनाने के लिए सिर्फ नीम की पत्तियाँ और थोड़ी सी हल्दी की जरूरत होती है.
हैंड सैनिटाइजर और एयर प्युरीफायर बनाने के तरीके
सामग्री
नीम के पत्ते, मुट्ठी भर
हल्दी पाउडर, ½ चम्मच
पानी एक बाउल
बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका
एक बाउल में नीम की पत्तियाँ डालें और पानी भरें.
इसके बाद ½ चम्मच हल्दी पाउडर डालें, अच्छे से हिलाएँ और यह तैयार है. इस बाउल को अपने कमरे में रखें. यह हवा को शुद्ध करेगा.
अगर आप इसे सैनिटाइजर के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसे एक बोतल में स्टोर करें और इसे अपने हाथों को धोएँ.
नीम हल्दी के फायदे
नीम में एंटी-बैक्टीरिया, एंटी-फंगल गुण पाये जाते हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया और फंगल को दूर रखने में मदद करते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, इसलिए लंबे समय से यह भारतीय चिकित्सा का एक अहम हिस्सा है. माना जाता है कि नीम हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छे पौधों में से एक है. एयर प्युरीफायर तैयार करने के लिए नीम की पत्तों का उपयोग करना बहुत अच्छा माना जया है, क्योंकि यह हवा को तुरंत साफ करता है और आपके लिए पर्यावरण को हेल्दी बनाता है. नीम के पत्तों के कुछ और स्वास्थ्य लाभ हैं जैसे
नीम की पत्तियाँ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है जो शरीर को फ्री रेडिकल डैमेज से बचाती है जिससे कैंसर, हार्ट प्रोब्लेम और डायबिटीज़ जैसे हेल्थ प्रॉब्लेम्स दूर हो सकती है. इसमें एंटी-फंगल बैक्टीरिया गुण शरीर में अनहेल्दी बैक्टीरिया को मारते हैं. नीम की पत्तियाँ में क्लीजिंग गुण होते है, ये हवा और शरीर से टॉक्सिन को निकालने में मदद करते हैं.
हैंड सैनिटाइजर और एयर प्युरीफायर को बनाने में इस्तेमाल होने वाला दूसरा तत्व हल्दी है। अधिकांश लोग हल्दी के फायदे के बारे में जानते हैं. यह एक प्रकृतिक एंटीसेप्टिक के रूप में काम करता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते है जो एक अच्छा कीटाणुनाशक बनाते हैं. हल्दी के एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरस और एंटी-फंगल गुण हमारे सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं.
एक्सपर्ट भी कहते हैं
हल्दी में बायोएक्टिव तत्व मौजूद होने के कारण दवाओं को तैयार करने के लिए इसे एक बेहतरीन तत्व माना जाता है. इसमें शक्तिशाली औषधीय गुण होते हैं. ये एक अच्छा इम्यूनिटी बूस्टर है. यह हमारे शरीर में प्रवेश करने वाले किटाणुओं से लड़ती है. हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है जो फ्री रेडिकल्स से लड़ता है, जिससे कई स्वास्थय समस्याएँ हो सकती हैं.
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जब आप हैंड सैनिटाइजर और एयर प्युरीफायर बनाने का यह तरीका जान गए हैं तो इसे बनाए और जहरीले सैनिटाइजर से खुद को बचाएं.