आप ने अकसर अपने मित्रों, पड़ोसियों व रिश्तेदारों को पैरों में दर्द होने की शिकायत करते सुना होगा. कुछ लोगों के पैरों में दर्द चलने से शुरू हो जाता है. जब वे चलना बंद कर देते हैं तो विश्रामावस्था में पैरों से दर्द गायब हो जाता है और दोबारा चलने से फिर वही दर्द उभरता है. कभीकभी बुजुर्ग लोग अकसर पैरों में दर्द होने की शिकायत करते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन के पैरों में दर्द चलने से कम हो जाता है पर लेटने पर दर्द की तीव्रता बढ़ जाती है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं या धूम्रपान, सिगरेट, बीड़ी व हुक्का के आदी हैं या फिर तंबाकू और उस से बने पदार्थों जैसे जर्दायुक्त पान मसाला, खैनी, चैनी, मैनपुरी या जाफरानी पत्ती के आदी हैं और साथ ही साथ पैरों में दर्द को ले कर परेशान हैं तो होशियार हो जाइए, वरना देरसवेर पैर गंवाने पड़ सकते हैं.
अकसर लोगों को यह भ्रम रहता है कि मधुमेह का पैरों से कोई संबंध नहीं है, मधुमेह का रोग सिर्फ हृदय से संबंधित है. उसी तरह से धूम्रपान के आदी लोग यह समझते हैं कि धूम्रपान से सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है और कैंसर हो सकता है. पर लोग यह नहीं जानते कि धूम्रपान के आदी व तंबाकू के व्यसनी लोगों में पैरों में गैंगरीन होने का खतरा हमेशा मंडराता रहता है. डायबिटीज का मरीज अगर धूम्रपान भी करता है या तंबाकू का सेवन करता है तो वह वही कहावत हो गई, ‘करेला वो भी नीम चढ़ा.’ मधुमेह व धूम्रपान दोनों मिल कर पैरों का सत्यानाश कर देते हैं. इसलिए, टांगों व पैरों को स्वस्थ व क्रियाशील रखने के लिए इन दोनों पर अंकुश रखना अत्यंत आवश्यक है. पैरों में दर्द क्यों
अपने देश में पैरों में दर्द होने का सब से बड़ा कारण टांगों की रक्त धमनियों की बीमारी है. ये रक्त धमनियां पैरों को औक्सीजनयुक्त शुद्ध खून की सप्लाई करती हैं जिस से पैर अपना कार्य सुचारु रूप से कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर शुद्ध खून की ज्यादा मात्रा पैरों को उपलब्ध करा सकें. पर जब ये रक्त धमनियां किसी वजह से शुद्घ रक्त की आवश्यक मात्रा टांगों को नहीं पहुंचा पाती हैं तो टांगों में चलने से दर्द शुरू हो जाता है, क्योंकि चलने से या पैरों का व्यायाम करने से शुद्ध औक्सीजन की मांग अचानक बढ़ जाती है जो रुग्ण धमनी पूरा नहीं कर पाती है. डायबिटीज व धूम्रपान टांगों में दर्द के बड़े कारण
पैरों की रक्त धमनी के ठीक से काम न करने के कई कारण होते हैं, जैसे मधुमेह रोग जिस में रक्त धमनी की दीवारों पर लगातार चरबी व कैल्शियम जमा होने लगता है जिस से रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है. रक्त धमनी के बीमार होने का दूसरा कारण धूम्रपान व तंबाकू का सेवन है. तंबाकू में एक रासायनिक तत्त्व निकोटिन पाया जाता है जो धमनी की छोटीछोटी शाखाओं में सिकुड़न ला देता है और पैर को जाने वाले रक्त प्रवाह को काफी हद तक कम कर देता है. अगर डायबिटीज व धूम्रपान के मरीज को पैर में दर्द होना शुरू हो जाए तो बिना किसी देरी के वैस्क्युलर का कार्डियो वैस्क्युलर विशेषज्ञ से परामर्श लें और रक्त धमनी की जांच करवाएं. वेन्स का रोग भी पैरों में
दर्द का कारण पैरों में दर्द उभरने का दूसरा मुख्य कारण वेन्स यानी शिरा का रोग है. जब टांगों को रक्त धमनियों द्वारा पहुंचाया गया शुद्ध खून औक्सीजन देने के बाद अशुद्घ हो जाता है तो यही वेन्स दोबारा से उस अशुद्ध खून को फेफड़े तक पहुंचाने का काम करती हैं या फिर दूसरे शब्दों में कहें तो पैरों में ड्रैनेज सिस्टम का निर्माण करती हैं.
जब किसी वजह से ये वेन्स खून को टांगों से ऊपर फेफड़े की तरफ नहीं पहुंचा पाती हैं तो ये अशुद्ध खून टांगों व पैरों में इकट्ठा होना शुरू हो जाता है और जब इन शिराओं के रोग से पीडि़त मरीज चलता है तो इकट्ठे हुए अशुद्ध खून की मात्रा और बढ़ जाने की वजह से पैरों में दर्द व थकान शुरू हो जाती है. इन शिराओं के रोगों में सब से बड़ा कारण सीवीआई यानी क्रोनिक वेन्स इन्सफीशिएंसी का रोग है. इस रोग में अशुद्ध खून ऊपर की ओर चढ़ता तो है लेकिन शिराओं के अंदर स्थित कपाटों के कमजोर होने की वजह से चढ़े हुए खून की कुछ मात्रा फिर से नीचे आ जाती है और यही कारण है कि इकट्ठे हुए अशुद्ध खून की मात्रा बढ़ जाने का. वेरिकोस वेन्स भी पैरों में
दर्द पैदा कर सकती हैं पैरों में दर्द होने का एक महत्त्वपूर्ण कारण टांगों की वेरिकोस वेन्स हैं. वेरिकोस वेन्स आज के आधुनिक युग में टांगों पर कहर बरपा रही हैं. जैसेजैसे विलासिता और आरामतलबी के नएनए रास्ते ढूंढ़े जा रहे हैं. वैसेवैसे टांगों में वेरिकोस वेन्स विविध रूपों में प्रकट हो रही हैं. इस की शुरुआत नीले रंग वाली मकड़ी के जालेनुमा रूप में शुरू होती है. ये मकड़ी के जाले शुरुआती दिनों में जांघ पर या घुटने के पीछे पाए जाते हैं. अगर समय पर सावधानी न बरती गई तो उचित परामर्श के अभाव में ये विकराल रूप धारण कर लेती हैं और अंत में इस की परिणति टांगों में गहरे काले निशान व लाइलाज घाव के रूप में होती है. अगर ज्यादा देर बैठने से पैर दर्द व भारीपन महसूस होने लगता है और पैरों में नीले रंग की नसें दिखने लगें तो तुरंत किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श ले लें.
शिराओं में खून का जमाव पैरों में दर्द होने का तीसरा कारण शिराओं यानी वेन्स के अंदर खून के कतरे जमा हो जाना है, जिस की वजह से शिराओं का काफी हिस्सा पूरी तरह से बंद हो जाता है, रक्त के ऊपर चढ़ने की क्रिया बाधित हो जाती है. भारतीयों में लापरवाही की वजह से ये खून के कतरे स्थायी रूप से शिराओं में अपना डेरा बना लेते हैं और पैरों में बराबर दर्द बना रहता है. ऐसी परिस्थितियों में टांगों व पैरों में दर्द तो बना ही रहता है, साथसाथ टांगों व पैरों में सूजन भी आ जाती है. इसलिए टांगों के दर्द से पीडि़त मरीज हाथ पर हाथ धर कर न बैठें और समय रहते किसी जनरल सर्जन या हड्डी विशेषज्ञ के बजाय किसी वैस्क्युलर व कार्डियो वैस्क्युलर सर्जन को दिखाएं.
कभीकभी वृद्धावस्था में पैरों की मांसपेशियों में अकड़न यानी क्रैम्स होते हैं जो विशेषतया रात के समय उभरते हैं और टांगों में दर्द होता है. कभीकभी घुटने में औस्टियो आर्थ्राइटिस या घुटने की झिल्ली में सूजन यानी साइनोवाइटिस की वजह से भी चलने में टांगों में दर्द होता है. टांगों में दर्द होने पर कहां जाएं
टांगों में दर्द होने पर किसी जनरल सर्जन या हड्डी विशेषज्ञ के बजाय किसी वैस्क्युलर सर्जन से परामर्श लें और उन की निगरानी में रक्त धमनियों या शिराओं की जांच कराएं. इन की जांचों के लिए डौपलर स्टडी, एमआर वीनोग्राम, एमआरआर्टिरियोग्राफी व एंजियोग्राफी, डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी की जरूरत पड़ती है. इसलिए ऐसे किसी अस्पताल में जाएं जहां किसी वैस्क्युलर सर्जन की चौबीसों घंटे उपलब्धता हो व इन सब जांचों की सुविधा हो, क्योंकि इन सब जांचों के आधार पर ही इलाज की सही दिशा तय होती है. पैरों में दर्द के लिए अगर रुग्ण धमनियां जिम्मेदार हैं तो पैरों में रक्त प्रवाह को फिर बहाल करने के लिए कई सारी विधाओं का सहारा लेना पड़ता है, जैसे धमनी पुनर्निर्माण, धमनी बाईपास व एंजियोप्लास्टी, स्टेटिंग. अगर टांग में दर्द का कारण शिराओं का रोग है तो वौल्व पुनर्निर्माण, धमनी बाईपास व एंजियोप्लास्टी, स्टेटिंग. अगर टांग में दर्द का कारण शिराओं का रोग है तो वौल्व पुनर्निर्माण व वेन्स बाईपास सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है. शिराओं के रोग में ज्यादातर मामलों में अन्य तरकीबें, जैसे क्रमित दबाव जुराबें, न्यूमेटिक कौंप्रैशन डिवाइस व कुछ विशेष व्यायाम व आसन लाभदायक होते हैं.
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